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ऐसे हुई अप्रेजल सिस्टम की शुरुआत!

    • विकास यादव
    • Updated: 26 अप्रिल, 2016 05:48 PM
  • 26 अप्रिल, 2016 05:48 PM
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संसार का कोई भी जानवर हो. अगर उससे आज खूब काम लिया जाये लेकिन उसे उसकी खुराक से कम खाना दिया जाए तो वो भी शायद कल आज जितना काम नहीं करेगा. मगर संसार के सारे जानवरों में इंसान अपवाद है.

एक बार एक बहुत बड़ी कंपनी की मीटिंग हुई जिसमें कंपनी के मालिक से लेकर तमाम ऊंचे पदों के लोग शामिल हुए. चर्चा का विषय था कि कंपनी का मुनाफा कैसे बढ़ाया जाये? सही बाजार रणनीति, इन्वेंटरी कंट्रोल, नए ग्राहकों की खोज और जाने कितने विषयों पर चर्चा हुई. इन्हीं सारे विषयों के बीच एक बात उठ के आई- कर्मचारियों की गुणवत्ता बढ़ाई जाये और उनसे ज्यादा से ज्यादा काम लिया जाये. लेकिन अब गुणवत्ता कैसे बढ़ाई जाये? इसपर भी तमाम सुझाव मिले लेकिन सारे सुझाव महंगे साबित हो रहे थे. मालिक ने कहा कि कोई ऐसा हल ढूंढा जाये जिससे कर्मचारियों की गुणवत्ता अपने आप बढ़ जाये और वो ज्यादा से ज्यादा काम खुद करे. मीटिंग खत्म करके मैनजरों से कहा गया की अगले हफ्ते इस समस्या का हल खोज के लाओ.  

अगले हफ्ते फिर मीटिंग हुई. एक मैनेजर खड़े हुए और उन्होंने सबको सम्बोधित करते हुए कहा, " समस्या का हल है- 'डंकी लॉ ऑफ़ वर्क' "

ये भी पढ़ें- कम छुट्टियां लेना भारतीयों की जरूरत या मजबूरी?

सब चौंक गए की भला ये किस चिड़िया का नाम है. सबकी फुसफुसाहट को शांत करवा के उन्होंने आगे कहा," यहाँ पर बैठे ज्यादातर लोगों ने एक गधे की कहानी सुन रखी होगी कि जब मालिक को उस गधे से ज्यादा काम लेना होता था तो वो उसके मुंह के आगे डंडे में गाजर बाँध के लटका देता था. गधा उसे पाने की लालच में चलता रहता था. काम खत्म होने के बाद मालिक गधे को गाजर के पत्ते खाने को दे देता था और गाजर खुद रख लेता था. ठीक ऐसा ही हमें भी करना है. कल हम लोग ये घोषणा करेंगे कि अब से एक अप्रैजल सिस्टम होगा, मतलब साल भर आप कोई काम कितनी गुणवत्ता से और कितनी जल्दी करते हैं, उसके  हिसाब से यह तय किया जायेगा कि आपकी सालाना तनख्वाह में कितनी बढ़ोत्तरी की जायेगी. "

एक बार एक बहुत बड़ी कंपनी की मीटिंग हुई जिसमें कंपनी के मालिक से लेकर तमाम ऊंचे पदों के लोग शामिल हुए. चर्चा का विषय था कि कंपनी का मुनाफा कैसे बढ़ाया जाये? सही बाजार रणनीति, इन्वेंटरी कंट्रोल, नए ग्राहकों की खोज और जाने कितने विषयों पर चर्चा हुई. इन्हीं सारे विषयों के बीच एक बात उठ के आई- कर्मचारियों की गुणवत्ता बढ़ाई जाये और उनसे ज्यादा से ज्यादा काम लिया जाये. लेकिन अब गुणवत्ता कैसे बढ़ाई जाये? इसपर भी तमाम सुझाव मिले लेकिन सारे सुझाव महंगे साबित हो रहे थे. मालिक ने कहा कि कोई ऐसा हल ढूंढा जाये जिससे कर्मचारियों की गुणवत्ता अपने आप बढ़ जाये और वो ज्यादा से ज्यादा काम खुद करे. मीटिंग खत्म करके मैनजरों से कहा गया की अगले हफ्ते इस समस्या का हल खोज के लाओ.  

अगले हफ्ते फिर मीटिंग हुई. एक मैनेजर खड़े हुए और उन्होंने सबको सम्बोधित करते हुए कहा, " समस्या का हल है- 'डंकी लॉ ऑफ़ वर्क' "

ये भी पढ़ें- कम छुट्टियां लेना भारतीयों की जरूरत या मजबूरी?

सब चौंक गए की भला ये किस चिड़िया का नाम है. सबकी फुसफुसाहट को शांत करवा के उन्होंने आगे कहा," यहाँ पर बैठे ज्यादातर लोगों ने एक गधे की कहानी सुन रखी होगी कि जब मालिक को उस गधे से ज्यादा काम लेना होता था तो वो उसके मुंह के आगे डंडे में गाजर बाँध के लटका देता था. गधा उसे पाने की लालच में चलता रहता था. काम खत्म होने के बाद मालिक गधे को गाजर के पत्ते खाने को दे देता था और गाजर खुद रख लेता था. ठीक ऐसा ही हमें भी करना है. कल हम लोग ये घोषणा करेंगे कि अब से एक अप्रैजल सिस्टम होगा, मतलब साल भर आप कोई काम कितनी गुणवत्ता से और कितनी जल्दी करते हैं, उसके  हिसाब से यह तय किया जायेगा कि आपकी सालाना तनख्वाह में कितनी बढ़ोत्तरी की जायेगी. "

 कर्मचारियों की गुणवत्ता बढ़ेगी 'डंकी लॉ ऑफ़ वर्क' से

सबको बात पसंद आई मगर एक दूसरी समस्या खड़ी हुई कि अगर सब लोग ही अच्छा काम करने लगे तो सबकी तनख्वाह में ज्यादा बढ़ोत्तरी करनी पड़ेगी. अब इससे कैसे निपटा जाये? इस पर 'डंकी लॉ ऑफ़ वर्क' का हल देने वाले महाशय बोले," इसका भी हल है. हम सबको गाजर एक जैसे ही दिखाएंगे मगर अप्रैजल के समय सभी कर्मचारियों को ये बोला जाएगा की आप सब में कई लोगों ने एक जैसा काम किया है मगर फला फला व्यक्ति ने वही काम और अच्छे से किया है.  इसलिए उन्हें आपसे ज्यादा इंक्रीमेंट मिलेगा. उसके अलावा हम कम इंक्रीमेंट वाले कमर्चारी को उसकी तमाम कमियां गिन कर बोलेंगे की आपको फलां फलां जगह अभी सुधार की ज़रूरत है. इन कमियों के साथ आपके अंदर फलां फलां अच्छाइयां भी हैं. अगर आप इसी तरह काम करते रहे तो मुझे पूर्ण विश्वास है अगले साल आपको ही सबसे अच्छा इंक्रीमेंट मिलेगा."

इतने पर किसी महाशय ने कहा कि, "इससे तो कर्मचारियों में असंतोष बढ़ जायेगा और कर्मचारी या तो काम नहीं करेंगे या फिर हमारी प्रतियोगी कंपनियों में काम करना शुरू कर देंगे."

ये भी पढ़ें- जानिए कैसे काम करता है कंपनियों का कार्टेल

लेकिन नियम बनाने वाले महापुरुष अपनी मंद मुस्कान के साथ बोले, "आप सही कह रहे हैं, ऐसा होगा और ऐसा होना स्वाभाविक भी है. संसार का कोई भी जानवर हो. अगर उससे आज खूब काम लिया जाये लेकिन उसे उसकी खुराक से कम खाना दिया जाए, और उससे ये वायदा किया जाए कि कल तुम्हें पूरा खाना मिलेगा तो वो भी शायद कल आज जितना काम नहीं करेगा. मगर संसार के सारे जानवरों में इंसान अपवाद है."

सब लोग बहुत खुश हुए और ये तय हुआ कि 'डंकी लॉ ऑफ़ वर्क' को अप्रैजल सिस्टम के नाम से लागू किया जायेगा और साथ ही यह भी तय हुआ की इसे अप्रैजल हर बार अप्रैल के महीने में होगा ताकि बड़े स्तर पर सबका अप्रैल फूल बनाया जा सके.  

इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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