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'प्राइम मिनिस्टर' इमरान खान और पाक राजनीति का क्रिकेटीकरण

    • अश्विनी कुमार
    • Updated: 26 जुलाई, 2018 02:41 PM
  • 26 जुलाई, 2018 02:31 PM
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इमरान की अगुवाई वाले पाकिस्तान की फौज जब सीमा पर सीजफायर का उल्लंघन करेगी, तो ये स्लेजिंग कहलाएगा और भारत ने अगर इसके जवाब में सर्जिकल स्ट्राइक कर दी, तो माना जाएगा कि उनकी स्लेजिंग के जवाब में हमने उन्हें पारी के अंतर से ठोक दिया है.

सावधान! पाकिस्तान में सत्ता बदल गई है. सीमा पार के राजनीतिक मौलवी (इधर के राजनीतिक पंडितों का पाकिस्तानी रूप) इमरान पर दांव खेल रहे थे, जो सच ही निकला. मैं ये सब कहते हुए अस्सी-नब्बे के दशक के गैर पाकिस्तानी बल्लेबाजों की तरह खौफ में नहीं हूं. वैसे भी उनसे डरता ही कौन है? उनके लोग भले ही कहते हैं कि- “भूलो नहीं कि उधर सत्ता में कौन बैठा है? मोदी.” उनके बड़े नेता ने चुनाव प्रचार में कहा- “मैं पाकिस्तान को भारत जैसा सुंदर बना दूंगा.” तो फिर उनसे कैसा डरना? हमारी उपलब्धियों और हमारे प्रधानमंत्री के दबदबे से डरे हुए तो वो हैं.

इमरान खान होंगे अपने घर में. वैसे भी न ये क्रिकेट का मैदान है और न ही तीन शादियां करने के बावजूद इमरान अब जवां हैं. और अब न ही भारतीय क्रिकेट और क्रिकेटरों में सीमा पार के गोलंदाजों (ये शब्द प्रभाष जोशी साहब के सौजन्य से) से खौफ खाने जैसी कोई बात है.

फिर भी उधर अगर इमरान होंगे, तो कुछ बदलाव जरूरी और प्रासंगिक होगा. भारत की राजनीति में क्रिकेट का तड़का लगता ही रहा है, अब थोड़ी राजनीति की शब्दावली भी बदलनी होगी. उसमें ‘क्रिकेटिंग सेंस’ पैदा करना होगा. मसलन, सबसे पहले तो इमरान की इस जीत को आप एक त्रिकोणीय सीरीज (पीटीआई, पीएमएल-एन, पीपीपी) में उनकी टीम की जीत कह सकते हैं. भारत के साथ संबंधों (मैच) की बात करें, तो अगर द्विपक्षीय वार्ता से पहले इमरान और मोदी साहब हाथ मिला रहे होंगे, तो कहा जाएगा- कि टॉस के लिए दोनों टीमों के कप्तान आमने-सामने खड़े हैं.

जब दोनों के बीच वार्ता चल रही होगी, तो कहा जाएगा कि मैच जारी है और दोनों टीमों के बीच कांटे का मुकाबला चल रहा है. वार्ता के बाद दोनों जब मीडिया के सामने होंगे, तो इसे मैच बाद के प्रजेंटेशन के तौर पर देखा जाएगा. लेकिन न कभी विजेता का ऐलान होगा और न ही...

सावधान! पाकिस्तान में सत्ता बदल गई है. सीमा पार के राजनीतिक मौलवी (इधर के राजनीतिक पंडितों का पाकिस्तानी रूप) इमरान पर दांव खेल रहे थे, जो सच ही निकला. मैं ये सब कहते हुए अस्सी-नब्बे के दशक के गैर पाकिस्तानी बल्लेबाजों की तरह खौफ में नहीं हूं. वैसे भी उनसे डरता ही कौन है? उनके लोग भले ही कहते हैं कि- “भूलो नहीं कि उधर सत्ता में कौन बैठा है? मोदी.” उनके बड़े नेता ने चुनाव प्रचार में कहा- “मैं पाकिस्तान को भारत जैसा सुंदर बना दूंगा.” तो फिर उनसे कैसा डरना? हमारी उपलब्धियों और हमारे प्रधानमंत्री के दबदबे से डरे हुए तो वो हैं.

इमरान खान होंगे अपने घर में. वैसे भी न ये क्रिकेट का मैदान है और न ही तीन शादियां करने के बावजूद इमरान अब जवां हैं. और अब न ही भारतीय क्रिकेट और क्रिकेटरों में सीमा पार के गोलंदाजों (ये शब्द प्रभाष जोशी साहब के सौजन्य से) से खौफ खाने जैसी कोई बात है.

फिर भी उधर अगर इमरान होंगे, तो कुछ बदलाव जरूरी और प्रासंगिक होगा. भारत की राजनीति में क्रिकेट का तड़का लगता ही रहा है, अब थोड़ी राजनीति की शब्दावली भी बदलनी होगी. उसमें ‘क्रिकेटिंग सेंस’ पैदा करना होगा. मसलन, सबसे पहले तो इमरान की इस जीत को आप एक त्रिकोणीय सीरीज (पीटीआई, पीएमएल-एन, पीपीपी) में उनकी टीम की जीत कह सकते हैं. भारत के साथ संबंधों (मैच) की बात करें, तो अगर द्विपक्षीय वार्ता से पहले इमरान और मोदी साहब हाथ मिला रहे होंगे, तो कहा जाएगा- कि टॉस के लिए दोनों टीमों के कप्तान आमने-सामने खड़े हैं.

जब दोनों के बीच वार्ता चल रही होगी, तो कहा जाएगा कि मैच जारी है और दोनों टीमों के बीच कांटे का मुकाबला चल रहा है. वार्ता के बाद दोनों जब मीडिया के सामने होंगे, तो इसे मैच बाद के प्रजेंटेशन के तौर पर देखा जाएगा. लेकिन न कभी विजेता का ऐलान होगा और न ही मैन ऑफ द मैच या मैन ऑफ द सीरीज का, क्योंकि किसी भी मुद्दे पर (किसी भी मैच में) न पाकिस्तानी कप्तान मानेंगे कि वो हार गए हैं और न ही भारतीय. भारत को हराना तो वैसे भी उनके वश में कहां रहा. न क्रिकेट के मैदान में, न सैन्य मोर्चे पर और न ही राजनीति की पिच पर.

इमरान की अगुवाई वाले पाकिस्तान की फौज जब सीमा पर सीजफायर का उल्लंघन करेगी, तो ये स्लेजिंग कहलाएगा और भारत ने अगर इसके जवाब में सर्जिकल स्ट्राइक कर दी, तो कहा और माना जाएगा कि उनकी स्लेजिंग के जवाब में हमने उन्हें पारी के अंतर से ठोक दिया है. जबकि उनकी खुद की धरती पर होने वाले धमाके को दुनिया पाकिस्तान के हिट विकेट होने के रूप में देखेगी.

कश्मीर में अगर उन्होंने अलगाववादियों के लिए फंडिंग जारी रखी, तो ये फिक्सिंग की कोशिश मानी जाएगी और नतीजे में हमारे अवांछित खिलाड़ी (अलगावादी), ग्राउंड अंपायर (भारत) और सीमा पार के खिलाड़ी (इमरान एंड कंपनी) ग्राउंड अंपायर (भारत) के साथ-साथ आईसीसी (यूनाइटेड नेशन) की कार्रवाई के भी पात्र होंगे.

आतंकवादियों को शह देने के लिए पाकिस्तान को अमेरिका या यूएन से झिड़की मिलेगी, तो कहा जाएगा कि थर्ड अंपायर ने पाकिस्तान को गेम के नियम-फलां और लेवल-चिलां का दोषी पाया है और चेतावनी दी है. यूएन के किसी अधिवेशन में अगर किसी बड़े मुद्दे पर पाकिस्तान हमारे सामने मुंह की खाएगा, तो इस रिकॉर्ड को विश्व कप में भारत के हाथों उसकी एक और हार के तौर पर दर्ज किया जाएगा. जबकि अमेरिका अगर किसी बात को लेकर पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाता है, तो इमरान शासित पाकिस्तान इसे कुछ मैचों के प्रतिबंध की तरह देखेगा.

एक बार इन्हीं इमरान खान ने कहा था कि कश्मीर का फैसला क्रिकेट मैच से कर लेना चाहिए. दोनों टीमों में से जो जीतेगी, कश्मीर उसका. अब उधर इमरान आ ही चुके हैं, तो PoK को लेकर अब यही प्रस्ताव पाकिस्तान के नए सियासी कप्तान (इमरान खान) के सामने रखने का वक्त और मौका हमारे पास है.

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