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घर बनाने के लिए लेना है लोन, पहले जान लें ये बातें

    • श्रुति दीक्षित
    • Updated: 08 जून, 2017 06:42 PM
  • 08 जून, 2017 06:42 PM
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लोन लेना आसान प्रोसेस लगेगा, लेकिन कुछ बातें हैं जो आपको होम लोन लेने से पहले ध्यान रखनी चाहिएं..

अगर जीएसटी, रेरा (रिएल एस्टेट रेग्युलेशन एक्ट) और एसबीआई और अन्य बैंकों के होम लोन इंट्रेस्ट रेट कम करने को देखा जाए तो साल 2017 घर खरीदने के लिए सबसे अच्छा साल हो सकता है. होम लोन लेना आसान प्रोसेस लगेगा, लेकिन कुछ बातें हैं जो आपको होम लोन लेने से पहले ध्यान रखनी चाहिएं..

1. एलिजिबिलिटी कैसी हो...

कई बार होम लोन एप्लिकेशन छोटी-छोटी बातों से रिजेक्ट हो जाती है. अधिकतर बार जो इंस्टॉलमेंट्स होती हैं वो यूजर के 40-50% सैलरी के बराबर होती है जिसमें बेसिक और डियरनेस अलावंस होता है. रीइम्बर्समेंट और बाकी अलावंस इसमें नहीं जोड़े जाते हैं. अब ऐसे में अगर आपके ऊपर कोई और लोन हो या फिर आपके ऊपर कई लोगों का खर्चा उठाने का भार हो तो भी आपको अपने हिसाब से लोन लेने में दिक्कत होगी.

होम लोन लेने से पहले ध्यान रखें इन बातों का

इसके अलावा, कम उम्र वालों को लोन मिलना आसान होता है. लोन प्रोसेस में कभी भी नौकरी से रिटायरेंट के बाद ईएमआई नहीं वसूली जा सकती है. ऐसे में जिन लोगों का रिटायरमेंट समय नजदीक है उन्हें तब तक लोन नहीं मिल सकता जब तक उनके साथ कोई कम उम्र का को-लोन ओनर ना हो.

2. लोन का टाइप...

दो तरह के होम लोन होते हैं एक जहां होम लोन इंट्रेस्ट रेट फिक्स होता है और एक फ्लोटिंग इंट्रेस्ट जहां इंट्रेस्ट रेट मार्केट रेट के हिसाब से बदल जाता है. आम तौर पर फिक्स रेट फ्लोटिंग रेट से 1-2.5 पर्सेंट प्वाइंट ज्यादा होता है.

वैसे अधिकतर लोग फिक्स इंट्रेस्ट रेट लेते हैं, लेकिन अगर हालिया मार्केट स्थिती देखी जाए तो फ्लोटिंग इंट्रेस्ट से भी आपको काफी फायदा होगा. EMI का अमाउंट भी ऐसे में बदल सकता है.

3. प्रॉपर्टी...

आप कहां घर लेना चाहते हैं और कब तक उस...

अगर जीएसटी, रेरा (रिएल एस्टेट रेग्युलेशन एक्ट) और एसबीआई और अन्य बैंकों के होम लोन इंट्रेस्ट रेट कम करने को देखा जाए तो साल 2017 घर खरीदने के लिए सबसे अच्छा साल हो सकता है. होम लोन लेना आसान प्रोसेस लगेगा, लेकिन कुछ बातें हैं जो आपको होम लोन लेने से पहले ध्यान रखनी चाहिएं..

1. एलिजिबिलिटी कैसी हो...

कई बार होम लोन एप्लिकेशन छोटी-छोटी बातों से रिजेक्ट हो जाती है. अधिकतर बार जो इंस्टॉलमेंट्स होती हैं वो यूजर के 40-50% सैलरी के बराबर होती है जिसमें बेसिक और डियरनेस अलावंस होता है. रीइम्बर्समेंट और बाकी अलावंस इसमें नहीं जोड़े जाते हैं. अब ऐसे में अगर आपके ऊपर कोई और लोन हो या फिर आपके ऊपर कई लोगों का खर्चा उठाने का भार हो तो भी आपको अपने हिसाब से लोन लेने में दिक्कत होगी.

होम लोन लेने से पहले ध्यान रखें इन बातों का

इसके अलावा, कम उम्र वालों को लोन मिलना आसान होता है. लोन प्रोसेस में कभी भी नौकरी से रिटायरेंट के बाद ईएमआई नहीं वसूली जा सकती है. ऐसे में जिन लोगों का रिटायरमेंट समय नजदीक है उन्हें तब तक लोन नहीं मिल सकता जब तक उनके साथ कोई कम उम्र का को-लोन ओनर ना हो.

2. लोन का टाइप...

दो तरह के होम लोन होते हैं एक जहां होम लोन इंट्रेस्ट रेट फिक्स होता है और एक फ्लोटिंग इंट्रेस्ट जहां इंट्रेस्ट रेट मार्केट रेट के हिसाब से बदल जाता है. आम तौर पर फिक्स रेट फ्लोटिंग रेट से 1-2.5 पर्सेंट प्वाइंट ज्यादा होता है.

वैसे अधिकतर लोग फिक्स इंट्रेस्ट रेट लेते हैं, लेकिन अगर हालिया मार्केट स्थिती देखी जाए तो फ्लोटिंग इंट्रेस्ट से भी आपको काफी फायदा होगा. EMI का अमाउंट भी ऐसे में बदल सकता है.

3. प्रॉपर्टी...

आप कहां घर लेना चाहते हैं और कब तक उस प्रॉपर्टी पर रहेंगे आप या कोई प्रॉपर्टी कितनी पुरानी है ये भी मायने रखने वाली चीज है. अगर आप अपना घर खरीद रहे हैं और वो ऐेसे एरिया में है जहां बैंक ज्यादातर लोन नहीं देते हैं तो आपके लिए ये एक निगेटिव प्वाइंट साबित हो सकता है.

4. प्रॉपर्टी की कीमत...

आपको लोन उसी हिसाब से मिलेगा जितनी प्रॉपर्टी की कीमत बैंक की तरफ से आंकी जाएगी. तो आपने अगर ज्यादा पैसा बैंक से लोन लेने की कोशिश की तो भी आपका लोन रिजेक्ट हो सकता है. अगर प्रॉपर्टी की कीमत बहुत ज्यादा है जैसे 75 लाख से ऊपर तो ही आपको 80 प्रतिशत तक कीमत लोन के तौर पर मिलेगी. अगर उससे कम है तो आपको 75% तक लोन मिलेगा.

5. क्रेडिट कार्ड...

अगर आपके पास क्रेडिट कार्ड है और उसका बिल चुकाने में आपको देर होती है तो ये लोन लेने के प्रोसेस में एक निगेटिव बात साबित हो सकती है. आपके क्रेडिट कार्ड का बिल काफी हद तक किसी भी तरह के लोन लेने में आड़े आ सकता है.

6. क्रेडिट स्कोर...

ज्यादातर बैंक आजकर CIBIL क्रेडिट स्कोर देखने लगे हैं. ऐसे में आपका स्कोर 750 से ऊपर होना चाहिए.

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इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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