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अब चोटियों का भी इंश्योरेंस !

    • अभिनव राजवंश
    • Updated: 05 अगस्त, 2017 07:01 PM
  • 05 अगस्त, 2017 07:01 PM
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अब खबर है कि देश भर की इंश्योरेंस कंपनियां अब इस बात पर बड़ी गंभीरता से विचार कर रही हैं कि चोटियों के लिए भी एक इंश्योरेंस प्लान हो. जिसमें चोटियों कि क़्वालिटी के हिसाब से मुआवजे कि रकम दी जाएगी.

दिल्ली में कटी तीन और चोटी. दिल्ली-एनसीआर में चोटी काट चुड़ैल का खौफ. चोटी चुड़ैल का आतंक. पिछले एक हफ्ते में अखबारों और न्यूज़ चैनलों में इसी तरह कि खबरों ने विशेष जगह पायी है. और यकीन मानिये इन खबरों के बाद से ही मेरी भी रातों की नींद गायब हो चुकी है. हालांकि अभी तक चोटिकटवा महोदय ने किसी भी पुरुष के बाल को नुकसान नहीं पहुंचाया है मगर क्या पता कब इनकी नियत बदल जाए!

राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, यूपी होते हुए चोटिकटवा का आतंक अब बिहार तक पहुंच चुका है. हालांकि इस 'चोटिकटवा' को अब तक किसी ने नहीं देखा. मगर अलग-अलग लोग अलग-अलग तरीके से इसकी व्याख्या कर रहे हैं. कोई इसे चुड़ैल बता रहा है तो कोई प्रेत. किसी को यह बिल्ली की तरह नजर आया तो किसी को उड़ने वाले साधु के रूप में. मगर यकीन मानिये कि आज देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद किसी की सबसे अधिक चर्चा है तो इन्हीं 'चोटिकटवा महाशय' की. और इनका फैलाव भी भारतीय जनता पार्टी की ही तरह है. राजस्थान से शुरू होकर, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश से अब बिहार तक पहुंच चुका है.

घबराएं नहीं इंश्योरेंस पाएं!

इस चोटिकटवा के आतंक की इंतहा इसी बात से समझी जा सकती है कि कम से कम पांच राज्यों की पुलिस इनकी तलाश में अपना माथा खपा रही है. मगर चोटिकटवा महाशय भी डॉन के माफिक शायद यही कह रहे है कि मुझे पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है. अब इसे त्रासदी ही कहें कि जो देश अपने कदम मंगल ग्रह तक पहुंचा चुका है, वहां इस अद्भुत प्राणी ने देश भर की महिलाओं की रातों की नींद उड़ा रखी है. हालांकि इन महाशय की शराफत की तारीफ तो बनती ही है कि इतने पॉवरफुल होने के बाद भी आज तक इन्होंने सिवाय बाल काटने के एक ढेला भी नहीं उठाया. नहीं तो इस कलियुग में कौन रुपये पैसों को छोड़, केवल बाल काटने के लिए अपनी जान जोखिम में...

दिल्ली में कटी तीन और चोटी. दिल्ली-एनसीआर में चोटी काट चुड़ैल का खौफ. चोटी चुड़ैल का आतंक. पिछले एक हफ्ते में अखबारों और न्यूज़ चैनलों में इसी तरह कि खबरों ने विशेष जगह पायी है. और यकीन मानिये इन खबरों के बाद से ही मेरी भी रातों की नींद गायब हो चुकी है. हालांकि अभी तक चोटिकटवा महोदय ने किसी भी पुरुष के बाल को नुकसान नहीं पहुंचाया है मगर क्या पता कब इनकी नियत बदल जाए!

राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, यूपी होते हुए चोटिकटवा का आतंक अब बिहार तक पहुंच चुका है. हालांकि इस 'चोटिकटवा' को अब तक किसी ने नहीं देखा. मगर अलग-अलग लोग अलग-अलग तरीके से इसकी व्याख्या कर रहे हैं. कोई इसे चुड़ैल बता रहा है तो कोई प्रेत. किसी को यह बिल्ली की तरह नजर आया तो किसी को उड़ने वाले साधु के रूप में. मगर यकीन मानिये कि आज देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद किसी की सबसे अधिक चर्चा है तो इन्हीं 'चोटिकटवा महाशय' की. और इनका फैलाव भी भारतीय जनता पार्टी की ही तरह है. राजस्थान से शुरू होकर, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश से अब बिहार तक पहुंच चुका है.

घबराएं नहीं इंश्योरेंस पाएं!

इस चोटिकटवा के आतंक की इंतहा इसी बात से समझी जा सकती है कि कम से कम पांच राज्यों की पुलिस इनकी तलाश में अपना माथा खपा रही है. मगर चोटिकटवा महाशय भी डॉन के माफिक शायद यही कह रहे है कि मुझे पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है. अब इसे त्रासदी ही कहें कि जो देश अपने कदम मंगल ग्रह तक पहुंचा चुका है, वहां इस अद्भुत प्राणी ने देश भर की महिलाओं की रातों की नींद उड़ा रखी है. हालांकि इन महाशय की शराफत की तारीफ तो बनती ही है कि इतने पॉवरफुल होने के बाद भी आज तक इन्होंने सिवाय बाल काटने के एक ढेला भी नहीं उठाया. नहीं तो इस कलियुग में कौन रुपये पैसों को छोड़, केवल बाल काटने के लिए अपनी जान जोखिम में डालेगा!

हालांकि खौफ कि इन रातों के बाद भारतीय महिलाओं के लिए कुछ अच्छी खबरें आ रही हैं. अब खबर है कि देश भर की इंश्योरेंस कंपनियां अब इस बात पर बड़ी गंभीरता से विचार कर रही हैं कि चोटियों के लिए भी एक इंश्योरेंस प्लान हो. जिसमें चोटियों कि क़्वालिटी के हिसाब से मुआवजे कि रकम दी जाएगी. चर्चा ऐसी भी है कि इस प्लान में न्यूनतम प्रीमियम भरकर सारी सुविधाएं ली जा सकती हैं. इस बीमा में परिवार के पुरुष सदस्यों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है. क्योंकि अंदेशा इस बात का भी जताया जा रहा है कि इस चोटिकटवा का अगला निशाना पुरुष भी हो सकते हैं.

यह खबर निश्चित रूप से डर के साये में रह रहीं महिलाओं के लिए राहत की बात हो सकती है. क्योंकि इस मुद्दे पर अब तक न तो केंद्र और ना ही किसी राज्य सरकार ने किसी भी तरह के मुआवजे की घोषणा की है. ऐसे में बीमा कंपनियों की यह पहल निश्चित रूप से तारीफ के काबिल है. अब उम्मीद यही की जानी चाहिए की जल्द से जल्द यह प्लान लोगों के बीच आ जाये और लोगों को उनके चोटी के साथ सुकून से रहने का मौका दे.

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इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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