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भारत अफ्रीका के मैच ने बताया कि क्यों टेस्ट क्रिकेट आज भी लोकप्रिय है ..

    • अभिनव राजवंश
    • Updated: 28 जनवरी, 2018 04:55 PM
  • 28 जनवरी, 2018 04:55 PM
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इस मैच में बहुत दिनों बाद भारतीय टीम बिना किसी स्पिनर के उतरी थी और ऐसे में भारत के तेज गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम की जीत सुनिश्चित की.

जोहानिसबर्ग में समाप्त हुए तीसरे टेस्ट में भारत ने अफ्रीका को हरा कर दक्षिण अफ्रीका की धरती पर तीसरी जीत दर्ज कर ली. हालाँकि, इस जीत से सीरीज के परिणाम पर कोई असर नहीं हुआ मगर निश्चित रूप से यह जीत आने वाली एकदिवसीय श्रृंखला के लिए भारतीय टीम के मनोबल को ऊँचा रखेगी. टेस्ट सीरीज के पहले दो मैच हार कर सीरीज गँवा चुकी भारतीय टीम के लिए यह जीत कई मायनों में ख़ास रही. इस मैच में बहुत दिनों बाद भारतीय टीम बिना किसी स्पिनर के उतरी थी और ऐसे में भारत के तेज गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम की जीत सुनिश्चित की.

हालाँकि, तीसरे दिन का खेल में जिस प्रकार की अगर मगर की स्तिथि उत्पन्न हुई थी उससे इस मैच के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए. इस मैच में जिस प्रकार की पिच बनायी गयी थी वो पहले ही दिन से चर्चा में रही थी. पिच जहाँ तेज गेंबाजों के लिए स्वर्ग के सामान तो बल्लेबाजों के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं कही जा सकती. मैच के चारों ही दिन बल्लेबाजों को सामने रन बनाने की चुनौती के साथ खुद को ज़ख़्मी होने से बचाने की भी चुनौती थी. मगर तीसरे दिन के आखिरी घंटे में जब एक गेंद डीन एल्गर के हेलमेट के अंदर जा लगी तो ऐसे आशंका हुई कि अब शायद इस मैच को रद्द्द के दिया जाएगा. उस समय तक भारतीय टीम मैच जीतने के बहुत करीब लग रही और ऐसा लग रहा था कि भारत की जीत अब एक औपचारिकता मात्र रह गयी है.

हालाँकि, यही टेस्ट क्रिकेट की खूबसूरती है और शायद इसलिए टेस्ट क्रिकेट को सबसे कठिन परीक्षा भी माना जाता है, क्योंकि इस खेल में मैच हर घंटे बदल सकता है. और ऐसा ही कुछ भारत और दक्षिण अफ्रीका के मैच में भी देखने को मिला जब शाम तक मैच को पूरी तरह अपने कब्जे में कर चुकी भारतीय टीम को चौथे दिन डीन एल्गर और हाशिम अमला को आउट करने में काफी मस्सकत करनी पड़ी. तीसरे दिन की खतरनाक पिच चौथे दिन काफी अच्छा खेलने लगी...

जोहानिसबर्ग में समाप्त हुए तीसरे टेस्ट में भारत ने अफ्रीका को हरा कर दक्षिण अफ्रीका की धरती पर तीसरी जीत दर्ज कर ली. हालाँकि, इस जीत से सीरीज के परिणाम पर कोई असर नहीं हुआ मगर निश्चित रूप से यह जीत आने वाली एकदिवसीय श्रृंखला के लिए भारतीय टीम के मनोबल को ऊँचा रखेगी. टेस्ट सीरीज के पहले दो मैच हार कर सीरीज गँवा चुकी भारतीय टीम के लिए यह जीत कई मायनों में ख़ास रही. इस मैच में बहुत दिनों बाद भारतीय टीम बिना किसी स्पिनर के उतरी थी और ऐसे में भारत के तेज गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम की जीत सुनिश्चित की.

हालाँकि, तीसरे दिन का खेल में जिस प्रकार की अगर मगर की स्तिथि उत्पन्न हुई थी उससे इस मैच के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए. इस मैच में जिस प्रकार की पिच बनायी गयी थी वो पहले ही दिन से चर्चा में रही थी. पिच जहाँ तेज गेंबाजों के लिए स्वर्ग के सामान तो बल्लेबाजों के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं कही जा सकती. मैच के चारों ही दिन बल्लेबाजों को सामने रन बनाने की चुनौती के साथ खुद को ज़ख़्मी होने से बचाने की भी चुनौती थी. मगर तीसरे दिन के आखिरी घंटे में जब एक गेंद डीन एल्गर के हेलमेट के अंदर जा लगी तो ऐसे आशंका हुई कि अब शायद इस मैच को रद्द्द के दिया जाएगा. उस समय तक भारतीय टीम मैच जीतने के बहुत करीब लग रही और ऐसा लग रहा था कि भारत की जीत अब एक औपचारिकता मात्र रह गयी है.

हालाँकि, यही टेस्ट क्रिकेट की खूबसूरती है और शायद इसलिए टेस्ट क्रिकेट को सबसे कठिन परीक्षा भी माना जाता है, क्योंकि इस खेल में मैच हर घंटे बदल सकता है. और ऐसा ही कुछ भारत और दक्षिण अफ्रीका के मैच में भी देखने को मिला जब शाम तक मैच को पूरी तरह अपने कब्जे में कर चुकी भारतीय टीम को चौथे दिन डीन एल्गर और हाशिम अमला को आउट करने में काफी मस्सकत करनी पड़ी. तीसरे दिन की खतरनाक पिच चौथे दिन काफी अच्छा खेलने लगी थी. और एक समय तो ऐसा लगा कि भारत अब इस मैच को भी हार जाएगा.

हालाँकि दो घंटे के बाद ही खेल फिर से भारत कि तरफ झुक गया जब भारत अमला को आउट करने में सफल रहा और उसके बाद अफ्रीकी टीम अपने विकेट के पतझड़ों को रोकने में नाकाम रही. वैसे इस मैच के पिच के बारे में काफी कुछ कहा सुना गया मगर इस टेस्ट मैच में वो सारी खूबसूरती जो टेस्ट के प्रारूप को रोचक बनाती है. कहने को तो इस पिच पर बल्लेबाजी काफी मुश्किल थी बावजूद इसके कुछ बल्लेबाजों ने जिस तरह विकेट पर टिकने को लेकर संघर्ष किया वो वाकई देखने लायक था. भले ही मैच में चौके छक्के कम लगे हों मगर रोमांच भरपूर था, मैच चारों ही दिन दोनों ही टीम को जीत के बराबर मौके भी देते रहा. और ऐसे ही मैच टेस्ट की प्रायोगिकता बनाये रहने के लिए आवश्यक है क्योंकि T20 क्रिकेट के दौर में अक्सर टेस्ट क्रिकेट के भविष्य पर सवाल उठते रहते हैं.

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इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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