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...तो इसलिए लिएंडर पेस के साथ नहीं खेलना चाहते थे बोपन्ना!

    • आईचौक
    • Updated: 11 जून, 2016 07:53 PM
  • 11 जून, 2016 07:53 PM
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आखिरकार, तमाम अटकलबाजी और चर्चाओं के बीच रियो ओलंपिक के लिए टेनिस टीम का फैसला हो ही गया. मेन्स डबल में रोहन बोपन्ना और लिएंडर पेस मेडल की दावेदारी पेश करेंगे. लेकिन कई सवाल फिर भी है. क्या रोहन वाकई इस फैसले से खुश हैं? या ये मजबूरी है....

आखिरकार, तमाम अटकलबाजी और चर्चाओं के बीच रियो ओलंपिक के लिए टेनिस टीम का फैसला हो ही गया. मेन्स डबल में रोहन बोपन्ना और लिएंडर पेस मेडल की दावेदारी पेश करेंगे तो मिकस्ड डबल्स में सानिया मिर्जा और बोपन्ना कोर्ट में उतरेंगे. महिला युगल में कमान सानिया और प्रार्थना थोंबारे के हाथों में होंगी.

चलिए, ये तो कहानी का एक सिरा है, लेकिन क्या इससे टेनिस प्रेमियों के तमाम सवालों के जवाब मिल गए? क्योंकि बोपन्ना ओलंपिक में साकेत मैननी के साथ बतौर जोड़ीदार कोर्ट में उतरना चाहते थे. रोहन फिलहाल डबल्स रैंकिंग में 10वें पायदान पर हैं.

 बोपन्ना ने सफाई दी, लेकिन बात बनी क्या?

टीम के फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन (AITA) के प्रेसिडेंट अनिल खन्ना ने कहा कि बोपन्ना की नजर में पेस के लिए बहुत सम्मान है. लेकिन उनके साथ न खेलने की वजह दूसरी है. बयान रोहन बोपन्ना की ओर से भी आया...

बोपन्ना ने क्या सफाई दी..

''मेरी रैंकिंग, मुझे ये अधिकार देती है कि मैं मेन्स डबल में अपने पसंद के खिलाड़ी का नाम आगे बढ़ा सकता हूं. इसीलिए मैंने अपनी पसंद के बारे में AITA को बताया था और सभी कारण भी गिनाए थे. मैंने AITA को जो खत भेजा था, उसमें उक्त बातें लिखी हुई थी...

'मैंने रियो के लिए अपने जोड़ीदार के तौर पर साकेत को चुना है. मुझे लगता है कि उनका खेल मेरी कमजोरियों और स्ट्रेंथ से काफी मिलता-जुलता है. आप मेरा ट्रैक रिकॉर्ड भी देख सकते हैं जिससे जाहिर होता है कि मैं उन जोड़िदारों के साथ ज्यादा सफल रहा हूं जो सर्विस या फोरहैंड के मामले में बेहतर हों. वैसे भी, डबल्स में रैंकिंग से ज्यादा महत्वपूर्ण एक-दूसरे से...

आखिरकार, तमाम अटकलबाजी और चर्चाओं के बीच रियो ओलंपिक के लिए टेनिस टीम का फैसला हो ही गया. मेन्स डबल में रोहन बोपन्ना और लिएंडर पेस मेडल की दावेदारी पेश करेंगे तो मिकस्ड डबल्स में सानिया मिर्जा और बोपन्ना कोर्ट में उतरेंगे. महिला युगल में कमान सानिया और प्रार्थना थोंबारे के हाथों में होंगी.

चलिए, ये तो कहानी का एक सिरा है, लेकिन क्या इससे टेनिस प्रेमियों के तमाम सवालों के जवाब मिल गए? क्योंकि बोपन्ना ओलंपिक में साकेत मैननी के साथ बतौर जोड़ीदार कोर्ट में उतरना चाहते थे. रोहन फिलहाल डबल्स रैंकिंग में 10वें पायदान पर हैं.

 बोपन्ना ने सफाई दी, लेकिन बात बनी क्या?

टीम के फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन (AITA) के प्रेसिडेंट अनिल खन्ना ने कहा कि बोपन्ना की नजर में पेस के लिए बहुत सम्मान है. लेकिन उनके साथ न खेलने की वजह दूसरी है. बयान रोहन बोपन्ना की ओर से भी आया...

बोपन्ना ने क्या सफाई दी..

''मेरी रैंकिंग, मुझे ये अधिकार देती है कि मैं मेन्स डबल में अपने पसंद के खिलाड़ी का नाम आगे बढ़ा सकता हूं. इसीलिए मैंने अपनी पसंद के बारे में AITA को बताया था और सभी कारण भी गिनाए थे. मैंने AITA को जो खत भेजा था, उसमें उक्त बातें लिखी हुई थी...

'मैंने रियो के लिए अपने जोड़ीदार के तौर पर साकेत को चुना है. मुझे लगता है कि उनका खेल मेरी कमजोरियों और स्ट्रेंथ से काफी मिलता-जुलता है. आप मेरा ट्रैक रिकॉर्ड भी देख सकते हैं जिससे जाहिर होता है कि मैं उन जोड़िदारों के साथ ज्यादा सफल रहा हूं जो सर्विस या फोरहैंड के मामले में बेहतर हों. वैसे भी, डबल्स में रैंकिंग से ज्यादा महत्वपूर्ण एक-दूसरे से तालमेल जरूरी होता है. मैं अपने करियर में 70 से ज्यादा खिलाड़ियों के साथ जोड़ी बना चुका हूं. और इसलीए अनुभव के आधार पर बता सकता हूं कि किस खिलाड़ी के साथ मेरी जोड़ी ज्यादा बेहतर होगी.'

मेरे दिल में लिएंडर पेस और उनकी उपलब्धियों के लिए बहुत सम्मान है. लेकिन दुर्भाग्यवश कॉम्बिनेशन के तौर पर हम दोनों आपस में अच्छे साबित नहीं हुए हैं. मुझे नहीं लगाता कि हम दोनों के खेल का तरीका एक-दूसरे से तालमेल बैठा पाएगा. फिर भी, चूकी ये टीम इवेंट है जहां दो खिलाड़ियों को अच्छा करने के लिए मिलकर खेलना होता है. व्यक्तिगत उपलब्धियों से ज्यादा यहां टीम कॉम्बिनेशन महत्वपूर्ण है.'

बहरहाल, AITA चयन समिति ने अपना फैसला ले लिया है और ओलंपिक के लिए टीम का चयन हो गया है. मैं इस फैसले का सम्मान करता हूं और रियो के लिए तैयार हूं.''

सवाल अब भी बाकी

चार साल पहले जब भारतीय दल लंदन ओलंपिक में हिस्सा लेने की तैयारी में जुटा था तो एक विवाद खूब गर्माया. तब रोहन बोपन्ना और महेश भूपति ने लिएंडर पेस के साथ पेयर बनाने से इंकार कर दिया था. बाद में टेनिस संघ ने लिएंडर पेस और सानिया को जोड़ीदार बनाकर मिक्सड डबल्स के लिए भेजा था. कोई पदक तो नहीं आया लेकिन सानिया की नाराजगी की खबर मीडिया में खूब चली. सानिया ने कहा था कि उन्हें भारतीय टेनिस के एक सुपरस्टार को खुश करने के लिए चारे की तरह इस्तेमाल किया गया. इस बयान और पूरे विवाद से AITA की खूब किरकिरी हुई थी.

हालिया विवाद भी उसी घटना की याद दिलाता है. वैसे AITA को वाहवाही तो देनी चाहिए कि उसने कम से कम इस बार किसी फजीहत से खुद को बचा लिया. लेकिन कई सवाल फिर भी है. क्या रोहन वाकई इस फैसले से खुश हैं? क्योंकि वे तो पहले ही कह चुके हैं कि पेस के साथ उनका कॉम्बिनेशन जमता नहीं. ऐसे में मेडल को लेकर कितना आश्वस्त हुआ जाए? और फिर, अगर पिछली बार सानिया ने इस्तेमाल होने का आरोप लगाया था तो क्या इस बार बोपन्ना की बारी है!

वैसे, 18 ग्रैंडस्लैम जीत चुके लिएंडर पेस के लिए जरूर राहत की बात होगी जो अपना सातवां ओलंपिक खेलने का सपना पूरा कर सकेंगे.

इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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