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सोनिया गांधी अब लॉकडाउन पॉलिटिक्स 3.0 की अगुवाई कर रही हैं

    • आईचौक
    • Updated: 08 मई, 2020 02:48 PM
  • 08 मई, 2020 02:48 PM
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जैसे जैसे लॉकडाउन बढ़ता रहा है, कांग्रेस की राजनीति भी उसी हिसाब से आगे बढ़ती देखने को मिली है. सियासी मार्केट में अब लॉकडाउन पॉलिटिक्स 3.0 (Lockdown Politics 3.0) भी लॉन्च हो चुकी है और हर बार की तरह अगुवाई सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ही कर रही हैं - साथ दे रहे हैं कांग्रेस सरकारों के मुख्यमंत्री (Congress Chief Ministers).

कोरोना वायरस से फैली महामारी के बीच लॉकडाउन पॉलिटिक्स 3.0 (Lockdown Politics 3.0) भी अंगड़ाई लेने लगी है. खास बात ये है कि कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ही इसे भी लीड कर रही हैं.

कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों (Congress Chief Ministers) की बैठक में सोनिया गांधी का सीधा सवाल था - लॉकडाउन 3.0 के बाद मोदी सरकार क्या करेगी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे सीधे सोनिया गांधी ने पूछा है कि कांग्रेस पार्टी जानना चाहती है कि 17 मई के बाद क्या होगा - और कैसे होगा? दरअसल, 4 मई से देश में लागू लॉकडाउन 3.0 की सीमा 17 मई को ही खत्म हो रही है.

लॉकडाउन पॉलिटिक्स 3.0

लॉकडाउन पॉलिटिक्स 3.0 में मोर्चे पर सबसे आगे मनमोहन सिंह, राहुल गांधी और पी. चिदंबरम पूरी तैयारी के साथ डटे हुए हैं. कोविड-19 को लेकर गठित कांग्रेस की 11 सदस्यों वाली कोर कमेटी में सबसे ऊपर नाम भी इन्हीं नेताओं के हैं.

लॉकडाउन पर सोनिया गांधी का शुरू से ही फोकस रहा है. पहले लॉकडाउन के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सोनिया ये बोल कर टारगेट करती रहीं कि बगैर तैयारी के घोषणा कर दी.

लॉकडाउन की दूसरी पारी में उसे मोदी सरकार की नोटबंदी जैसी गलती ठहराने की कोशिश हुई - और अब तीसरे चरण में लॉकडाउन के एग्जिट प्लान को लेकर घेरेबंदी शुरू हो गयी है.

खास बात ये है कि सोनिया गांधी के लॉकडाउन पॉलिटिक्स 3.0 में भी उनके फील्ड जनरल कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री ही हैं - जो अपने अपने इलाके से मोदी सरकार के विरोध में कांग्रेस नेतृत्व की आवाज को तेज करने में जुट गये हैं.

कांग्रेस नेतृत्व की इस सक्रियता की एक बड़ी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अचानक नेपथ्य में चले जाना भी हो सकता है. जो प्रधानमंत्री मोदी जनता कर्फ्यू के बाद ताली और थाली बजवाने से लेकर दीया जलाने के लिए लोगों के बीच आ जाते रहे, वो लॉकडाउन 3.0 के बारे में बताने तक नहीं लोगों के बीच नहीं है - और कोरोना वॉरियर्स पर फूल बरसाने की घोषणा से लेकर टास्क...

कोरोना वायरस से फैली महामारी के बीच लॉकडाउन पॉलिटिक्स 3.0 (Lockdown Politics 3.0) भी अंगड़ाई लेने लगी है. खास बात ये है कि कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ही इसे भी लीड कर रही हैं.

कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों (Congress Chief Ministers) की बैठक में सोनिया गांधी का सीधा सवाल था - लॉकडाउन 3.0 के बाद मोदी सरकार क्या करेगी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे सीधे सोनिया गांधी ने पूछा है कि कांग्रेस पार्टी जानना चाहती है कि 17 मई के बाद क्या होगा - और कैसे होगा? दरअसल, 4 मई से देश में लागू लॉकडाउन 3.0 की सीमा 17 मई को ही खत्म हो रही है.

लॉकडाउन पॉलिटिक्स 3.0

लॉकडाउन पॉलिटिक्स 3.0 में मोर्चे पर सबसे आगे मनमोहन सिंह, राहुल गांधी और पी. चिदंबरम पूरी तैयारी के साथ डटे हुए हैं. कोविड-19 को लेकर गठित कांग्रेस की 11 सदस्यों वाली कोर कमेटी में सबसे ऊपर नाम भी इन्हीं नेताओं के हैं.

लॉकडाउन पर सोनिया गांधी का शुरू से ही फोकस रहा है. पहले लॉकडाउन के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सोनिया ये बोल कर टारगेट करती रहीं कि बगैर तैयारी के घोषणा कर दी.

लॉकडाउन की दूसरी पारी में उसे मोदी सरकार की नोटबंदी जैसी गलती ठहराने की कोशिश हुई - और अब तीसरे चरण में लॉकडाउन के एग्जिट प्लान को लेकर घेरेबंदी शुरू हो गयी है.

खास बात ये है कि सोनिया गांधी के लॉकडाउन पॉलिटिक्स 3.0 में भी उनके फील्ड जनरल कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री ही हैं - जो अपने अपने इलाके से मोदी सरकार के विरोध में कांग्रेस नेतृत्व की आवाज को तेज करने में जुट गये हैं.

कांग्रेस नेतृत्व की इस सक्रियता की एक बड़ी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अचानक नेपथ्य में चले जाना भी हो सकता है. जो प्रधानमंत्री मोदी जनता कर्फ्यू के बाद ताली और थाली बजवाने से लेकर दीया जलाने के लिए लोगों के बीच आ जाते रहे, वो लॉकडाउन 3.0 के बारे में बताने तक नहीं लोगों के बीच नहीं है - और कोरोना वॉरियर्स पर फूल बरसाने की घोषणा से लेकर टास्क पूरा करने तक सारी जिम्मेदारी सेना के लिए छोड़ दिये.

कांग्रेस मुख्यमंत्रियों की मीटिंग में राहुल गांधी ने कोरोना संकट के बीच मरीजों और बुजुर्गों की सेहत पर चिंता जतायी है

सोनिया गांधी ने दिहाड़ी मजदूरों को घर भेजे जाने के लिए टिकट के किराये वसूले जाने को लेकर भी बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर हमला बोला था - और ऐलान किया कि अगर रेलवे को श्रमिक स्पेशल ट्रेन के लिए किराया चाहिये ही तो मजदूरों की तरफ से ये कांग्रेस पार्टी देगी. कांग्रेस के कोषाध्यक्ष और सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल ने कांग्रेस की राज्य इकाइयों को पैसे का इंतजाम करने को भी कहा था. हालांकि, बाद में कई दौर की सफाई के बाद रेलवे और राज्य सरकारें आगे आईं और कहा गया कि मजदूरों से पैसा नहीं लिया जाएगा या लिया गया है तो वापस कर दिया जाएगा.

कांग्रेस मुख्यमंत्रियों की बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तो सोनिया गांधी की ही बात दोहरा दी कि जो सवाल सोनिया गांधी ने पूछा है केंद्र सरकार को बताना चाहिये कि उसके पास क्या प्लान है? पी. चिदंबरम में राज्यों के सामने वित्तीय संकट गहराने की बात करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से कोई पैसा नहीं दिया जा रहा है.

राहुल गांधी ने इस मौके पर कोविड-19 से लड़ाई में कमजोर सेहत वालों और बुजुर्गों को लेकर चिंता जतायी. राहुल गांधी ने कहा कि डायबिटीज और हार्ट के मरीजों और बुजुर्गों को बचाना सबसे अहम है.

क्या एग्जिट प्लान बताना बाकी है?

कोरोना वायरस संकट काल में राजनीतिक तौर पर कांग्रेस मुख्यमंत्रियों में अशोक गहलोत आगे नजर आये हैं. देश में सबसे पहले लॉकडाउन लागू करने वाले मुख्यमंत्री भी अशोक गहलोत ही हैं. अशोक गहलोत की शिकायत है कि वो प्रधानमंत्री मोदी से लगातार राजस्थान के लिए राहत पैकेज की मांग कर रहे हैं लेकिन जवाब ही नहीं मिला है. अशोक गहलोत ने कहा, 'हमें 10 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है. राज्यों ने पैकेज के लिए बार-बार प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है - लेकिन हमारी बात को अनसुना कर दिया गया है.'

अशोक गहलोत के बाद देश में लॉकडाउन लागू करने वाले दूसरे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की शिकायत है, 'दिल्ली में बैठे लोग जमीनी हकीकत जाने बिना जोन का वर्गीकरण कर रहे हैं.' कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बताया कि पंजाब में दो कमेटियां बनायी गयी हैं जो लॉकडाउन से हुए नुकसान और उसके बाद के आर्थिक रिवाइवल प्लान तैयार करेंगी. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी आर्थिक पैकेज को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखने की जानकारी दी और पुड्डुचेरी के सीएम वी. नारायणसामी ने भी रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन के बंटवारे पर आपत्ति जतायी.

नाराजगी का ये आलम तब देखने को मिल रहा है जब मुख्यमंत्रियों की बैठक के बाद ही प्रधानमंत्री मोदी को लॉकडाउन से जुड़ी चीजों पर फैसला लेते देखा गया है. शुरू से ही मोदी मुख्यमंत्रियों को भरोसे में लेकर चले हैं. मुख्यमंत्रियों ने कहा तो प्रधानमंत्री मोदी ने लॉकडाउन बढ़ा दिया. हां, राजनीति ये हुई कि मीटिंग में जब मुख्यमंत्रियों ने कहा कि लॉकडाउन बढ़ाया जाये तो गैर बीजेपी राज्य सरकारों ने पहले ही लॉकडाउन बढ़ा दिया. उससे पहले वाली मीटिंग में बात हुई और सहमति बनी की लॉकडाउन जरूरी है और लागू करना ही ठीक रहेगा अशोक गहलोत और कैप्टन अमरिंदर ने पहले ही लॉकडाउन की घोषणा कर दी - दूसरी बार भी केंद्र से पहले ही तारीख आगे बढ़ा दी.

21 दिनों के लॉकडाउन के दौरान ही मुख्यमंत्रियों की एक मीटिंग में प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों को एक ऐसा प्लान तैयार करने को कहा था जिस पर जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक एकरूपता हो - और उसी के हिसाब से लॉकडाउन के दौरान और हटाये जाने के बाद काम हो - और वही आगे चल कर गृह मंत्रालय की गाइडलाइन के रूप में सामने आया.

अब जबकि लॉकडाउन के तहत ज्यादातर फैसले राज्य सरकारों की तरफ से और जिला स्तर पर कलेक्टर ले रहे हैं - मोदी सरकार से एग्जिट प्लान के बारे में पूछने को कुछ बचता है क्या?

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इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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