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क्या सऊदी अरब भी महफूज़ जगह नहीं है रोहिंग्या मुसलमानों के लिए?

    • अनुज मौर्या
    • Updated: 13 नवम्बर, 2018 03:06 PM
  • 13 नवम्बर, 2018 03:06 PM
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भारत के कई बुद्धिजीवियों और लगभग पूरे पाकिस्तान ने भारत सरकार की रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर नीति की आलोचना की. उसे हिन्दू-मुस्लिम विवाद की शक्ल दी. लेकिन सऊदी अरब ने एक फैसला लेकर इस बहस को खत्‍म कर दिया है.

सऊदी अरब अपने देश से रोहिंग्या शरणार्थियों को उनकी मर्जी के बगैर ही बांग्लादेश भेज रहा है. इससे पहले उन्हें काफी समय सऊदी की शुमैसी जेल में रखा गया था. ये घटना तब सामने आई जब सऊदी अरब ने बांग्लादेश को आदेश दिया कि वह बांग्लादेशी पासपोर्ट पर सऊदी अरब में घुसे रोहिंग्या मुसलमानों को अपने देश में वापस लें. सऊदी अरब के अनुसार ये लोग इस डर से बांग्लादेश से भागकर सऊदी अरब आए थे कि कहीं बांग्लादेश सरकार उन्हें वापस म्यांमार ना भेज दे. रोहिंग्या शरणार्थियों को जबरदस्ती सऊदी अरब से निकाल कर बांग्लादेश में भेजने की ये खबर जब से बाहर आई है, इस पर चर्चा शुरू हो गई है. जब भारत से रोहिंग्या मुसलमानों के निर्वासन की बात रखी गई थी तो भारत के कई बुद्धिजीवियों और लगभग पूरे पाकिस्तान ने भारत सरकार की रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर नीति की आलोचना की. उसे हिन्दू-मुस्लिम विवाद की शक्ल दी. अब सऊदी अरब द्वारा ऐसा ही किए जाने से ये मामला हिंदू-मुस्लिम का नहीं रह जाता है, क्योंकि अब तो मुस्लिम और मुस्लिम के बीच ही विवाद हो गया है.

सऊदी अरब में रोहिंग्या शरणार्थियों से मारपीट कर के निर्वासन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं.

जिन रोहिंग्या मुसलमानों को बांग्लादेश भेजे जाने की तैयारी की जा रही है, उनका कहना है कि उनके पास बर्मा के आईडी कार्ड हैं, जो साबित करते हैं कि वह बर्मा के रोहिंग्या हैं, ना कि बांग्लादेशी. आपको बता दें कि अगस्त 2017 के बाद से अब तक करीब 7,00,000 लोग म्यांमार छोड़ कर भाग चुके हैं. ध्यान देने की बात ये है कि अक्टूबर मध्य में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा सऊदी अरब का चार दिवसीय दौरा किए जाने के महज कुछ दिनों बाद ही ये घटना सामने आई है.

मारपीट कर कराए जा रहे हस्ताक्षर

म्यांमार में उत्पीड़न से तंग आकर बहुत से...

सऊदी अरब अपने देश से रोहिंग्या शरणार्थियों को उनकी मर्जी के बगैर ही बांग्लादेश भेज रहा है. इससे पहले उन्हें काफी समय सऊदी की शुमैसी जेल में रखा गया था. ये घटना तब सामने आई जब सऊदी अरब ने बांग्लादेश को आदेश दिया कि वह बांग्लादेशी पासपोर्ट पर सऊदी अरब में घुसे रोहिंग्या मुसलमानों को अपने देश में वापस लें. सऊदी अरब के अनुसार ये लोग इस डर से बांग्लादेश से भागकर सऊदी अरब आए थे कि कहीं बांग्लादेश सरकार उन्हें वापस म्यांमार ना भेज दे. रोहिंग्या शरणार्थियों को जबरदस्ती सऊदी अरब से निकाल कर बांग्लादेश में भेजने की ये खबर जब से बाहर आई है, इस पर चर्चा शुरू हो गई है. जब भारत से रोहिंग्या मुसलमानों के निर्वासन की बात रखी गई थी तो भारत के कई बुद्धिजीवियों और लगभग पूरे पाकिस्तान ने भारत सरकार की रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर नीति की आलोचना की. उसे हिन्दू-मुस्लिम विवाद की शक्ल दी. अब सऊदी अरब द्वारा ऐसा ही किए जाने से ये मामला हिंदू-मुस्लिम का नहीं रह जाता है, क्योंकि अब तो मुस्लिम और मुस्लिम के बीच ही विवाद हो गया है.

सऊदी अरब में रोहिंग्या शरणार्थियों से मारपीट कर के निर्वासन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं.

जिन रोहिंग्या मुसलमानों को बांग्लादेश भेजे जाने की तैयारी की जा रही है, उनका कहना है कि उनके पास बर्मा के आईडी कार्ड हैं, जो साबित करते हैं कि वह बर्मा के रोहिंग्या हैं, ना कि बांग्लादेशी. आपको बता दें कि अगस्त 2017 के बाद से अब तक करीब 7,00,000 लोग म्यांमार छोड़ कर भाग चुके हैं. ध्यान देने की बात ये है कि अक्टूबर मध्य में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा सऊदी अरब का चार दिवसीय दौरा किए जाने के महज कुछ दिनों बाद ही ये घटना सामने आई है.

मारपीट कर कराए जा रहे हस्ताक्षर

म्यांमार में उत्पीड़न से तंग आकर बहुत से रोहिंग्या रिफ्यूजी नकली दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाकर दक्षिण एशियाई देशों जैसे बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल और पाकिस्तान में भाग गए. कुछ साल पहले बहुत सारे रोहिंग्या उमराह के दौरान तीर्थयात्री वीजा पर सऊदी अरब में घुस गए. जब वह सऊदी अरब में पकड़े गए तो उन्हें जेद्दाह की शुमैसी जेल में रखा गया, जहां उन्होंने यह कबूल किया कि उन्होंने नकली दस्तावेजों के दम पर फर्जी पासपोर्ट बनवाया था. कुछ रोहिंग्या शरणार्थियों ने बताया कि दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाने के लिए पुलिस ने उनके साथ मारपीट भी की.

फंस गए हैं रोहिंग्या

अक्टूबर के दौरान बांग्लादेश अथॉरिटी ने कहा था कि वह हजारों रोहिंग्याओं को शरणार्थी कैंपों से निकालकर वापस म्यांमार भेजने की योजना बना रहे हैं. इस पर संयुक्त राष्ट्र ने भी रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार भेजने के कदम की आलोचना की, क्योंकि म्यांमार में पहले ही रोहिंग्याओं के खिलाफ हिंसा हो रही है. एक शरणार्थी का कहना है कि पहले हम बांग्लादेश में अपने परिवारों की चिंता करते थे और अब हमें चिंता है कि हमें बांग्लादेश ना भेज दिया जाए. वह कहते हैं कि अगर उन्हें बांग्लादेश वापस भेज दिया गया तो उनके सामने सिर्फ आत्महत्या करने का ही विकल्प बचेगा.

भारत में हिंदू-मुस्लिम विवाद की शक्ल

जब मोदी सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ पॉलिसी तैयार की थी, जो भारत की भी खूब आलोचना हुई थी. लेकिन भारत की आलोचना का कारण था हिंदू-मुस्लिम विवाद. आरोप लगाए जा रहे थे कि मुस्लिम होने की वजह से ही उन्हें देश से निकाला जा रहा है, लेकिन अब सऊदी अरब जैसे मुस्लिम देश ने भी रोहिंग्या मुसलमानों को देश से बाहर निकालने का फैसला किया है. इस पर लेखिका तस्लीमा नसरीन ने एक ट्वीट करते हुए लिखा है- 'सऊदी अरब रोहिंग्या मुसलमानों का निर्वासन कर रहा है. अभी तक तो मैंने यही सुना था कि मुस्लिम लोग आपस में भाई होते हैं ! लेकिन हमेशा देखा यही है कि अमीर मुस्लिम गरीब मुस्लिम से नफरत करता है, शिया मुस्लिम सुन्नी मुस्लिम को पसंद नहीं करता और सुन्नी मुस्लिम शिया मुस्लिम से नफरत करता है. सुन्नी मुस्लिम अहमदिया मुस्लिम से नफरत करते हैं. सऊदी मुस्लिम यमन के मुस्लिमों, पंजाबी मुस्लिमों, बंगाली मुस्लिमों और अन्य सभी मुस्लिमों से नफरत करते हैं.'

सऊदी अरब द्वारा रोहिंग्या मुसलमानों को देश से निकालने जाने का हर ओर विरोध हो रहा है. ह्यूमन राइट्स वॉच के मिडिल ईस्ट रिसर्चर Adam Coogle का कहना है कि सऊदी अरब को जबरन निर्वासन को तुरंत रोक देना चाहिए और रोहिंग्या मुसलमानों को सऊदी अरब में शरण देनी चाहिए. वहीं दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के प्रवक्ता Amina Zoubairi का कहना है कि उन्हें इस बारे में पता है और उन्होंने सऊदी अरब से इस पर बात भी की है. सऊदी अरब का कहना है कि वह रोहिंग्या मुसलमानों को जबरन निर्वासन नहीं करा रहे हैं, बल्कि उन अन्य लोगों का निर्वासन करा रहे हैं जो फर्जी पासपोर्ट के दम पर देश में घुसे हैं और खुद को रोहिंग्या मुसलमान बताकर सऊदी सरकार की सुविधाओं का फायदा उठाना चाह रहे हैं. खैर, ये देखना दिलचस्प होगा कि सऊदी अरब दबाव में आकर रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देता है या फिर उन्हें देश से बाहर निकालता है.

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इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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