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Hijab पर मुस्कान की शान में कसीदे पढ़ना पाकिस्तान का Anti India स्टैंड है!

    • बिलाल एम जाफ़री
    • Updated: 15 फरवरी, 2022 01:13 PM
  • 15 फरवरी, 2022 01:13 PM
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Hijab Row In Karnataka भारत का आंतरिक मामला है लेकिन इस पर जैसा रुख पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का है एक बार फिर पाकिस्तान ने अपने दोगले चरित्र से दुनिया को रू-ब-रू कराया है. पाकिस्तान में भी हिजाब को लेकर मामला गर्म है और इसके समर्थन में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

भारत में हिजाब पर राजनीति गर्म है. कर्नाटक के उडुपी से शुरू हुई हिजाब कॉन्ट्रोवर्सी भले ही अदालत की शरण में हो और मामले के मद्देनजर कोई ठोस फैसला आना बाकी हो लेकिन जैसे हालात हैं, तय है कि हिजाब को लेकर जो आग देश में लगी है वो इतनी जल्दी ठंडी नहीं होगी. आने वाले वक्त में हिजाब पूरे देश के सामने एक बड़ा मुद्दा रहेगा जिसपर राजनीति कैसे होगी? प्लानिंग उन तमाम लोगों / दलों ने शुरू कर दी है जिनका काम देश को जोड़े रखना नहीं बल्कि तोड़ना है. जिक्र हिजाब कॉन्ट्रोवर्सी का हुआ है तो शायद ही कोई होगा जो मुस्कान खान के नाम से न वाकिफ हो. हिजाब के विरोध में जय श्री राम के नारे का उद्घोष करती भीड़ के सामने जिस तरह मुस्कान ने अल्लाह हू अकबर का नारा दिया उसने हिजाब को लेकर पूरी डिबेट का न केवल रुख मोड़ा बल्कि लोगों को दो वर्गों में विभाजित कर दिया. हिजाब कॉन्ट्रोवर्सी भारत का आंतरिक मामला है लेकिन इस पर जैसा रुख पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का है एक बार फिर पाकिस्तान ने अपने दोगले चरित्र से दुनिया को रू-ब-रू कराया है. पाकिस्तान में भी हिजाब को लेकर मामला गर्म है और इसके समर्थन में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

पाकिस्तान में कर्नाटक की मुस्कान को किसी सुपर हीरो की तरह ट्रीट किया जा रहा है

हिजाब को लेकर अभी बीते दिनों ही पाकिस्तान में जमात-ए-इस्लामी की महिला विंग ने प्रदर्शन किया है. प्रदर्शनकरियों ने मुस्कान को खुला समर्थन दिया है और तमाम तरह की बातें करते हुए भारत के खिलाफ अपना एजेंडा जाहिर किया है. जमात-ए-इस्लामी की पूर्व सांसद समिया राहील काज़ी ने मीडिया से बात करते हुए मुस्कान की शान में कसीदे पढ़े हैं

समिया ने कहा है कि,'अल्लाह ने मुस्कान को एक ज़रिया बनाया है कि वह न केवल मुसलमानों की बल्कि दुनिया भर में विभिन्न धर्मों से संबंधित...

भारत में हिजाब पर राजनीति गर्म है. कर्नाटक के उडुपी से शुरू हुई हिजाब कॉन्ट्रोवर्सी भले ही अदालत की शरण में हो और मामले के मद्देनजर कोई ठोस फैसला आना बाकी हो लेकिन जैसे हालात हैं, तय है कि हिजाब को लेकर जो आग देश में लगी है वो इतनी जल्दी ठंडी नहीं होगी. आने वाले वक्त में हिजाब पूरे देश के सामने एक बड़ा मुद्दा रहेगा जिसपर राजनीति कैसे होगी? प्लानिंग उन तमाम लोगों / दलों ने शुरू कर दी है जिनका काम देश को जोड़े रखना नहीं बल्कि तोड़ना है. जिक्र हिजाब कॉन्ट्रोवर्सी का हुआ है तो शायद ही कोई होगा जो मुस्कान खान के नाम से न वाकिफ हो. हिजाब के विरोध में जय श्री राम के नारे का उद्घोष करती भीड़ के सामने जिस तरह मुस्कान ने अल्लाह हू अकबर का नारा दिया उसने हिजाब को लेकर पूरी डिबेट का न केवल रुख मोड़ा बल्कि लोगों को दो वर्गों में विभाजित कर दिया. हिजाब कॉन्ट्रोवर्सी भारत का आंतरिक मामला है लेकिन इस पर जैसा रुख पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का है एक बार फिर पाकिस्तान ने अपने दोगले चरित्र से दुनिया को रू-ब-रू कराया है. पाकिस्तान में भी हिजाब को लेकर मामला गर्म है और इसके समर्थन में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

पाकिस्तान में कर्नाटक की मुस्कान को किसी सुपर हीरो की तरह ट्रीट किया जा रहा है

हिजाब को लेकर अभी बीते दिनों ही पाकिस्तान में जमात-ए-इस्लामी की महिला विंग ने प्रदर्शन किया है. प्रदर्शनकरियों ने मुस्कान को खुला समर्थन दिया है और तमाम तरह की बातें करते हुए भारत के खिलाफ अपना एजेंडा जाहिर किया है. जमात-ए-इस्लामी की पूर्व सांसद समिया राहील काज़ी ने मीडिया से बात करते हुए मुस्कान की शान में कसीदे पढ़े हैं

समिया ने कहा है कि,'अल्लाह ने मुस्कान को एक ज़रिया बनाया है कि वह न केवल मुसलमानों की बल्कि दुनिया भर में विभिन्न धर्मों से संबंधित लोगों की आवाज़ बने. इसके अलावा समिया ने ये भी कहा कि भारत के कर्नाटक राज्य में 19 साल की एक लड़की मुस्कान ने उग्र भीड़ के सामने डट कर अपनी आवाज़ बुलंद की और अब उसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है.'

बात तार्किक और वजनदार लगे इसके लिए समिया ने यूएन के चार्टर का हवाला दिया है और कहा है कि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में सभी को अपनी इच्छानुसार कपड़े पहनने की इजाज़त दी गई है, तो किसी महिला के हिजाब पहनने पर आपत्ति क्यों?

हिजाब को लस्कर समिया कुछ कहें लेकिन जैसा कि हम ऊपर ही बता चुके हैं हिजाब को मुद्दा बनाना पाकिस्तान का दोगलापन दिखाता है तो ये बात यूं ही नहीं है. आज भले ही मुस्कान और हिजाब के मद्देनजर आम पाकिस्तानी आवाम बड़ी बड़ी बातें कर रहा है मगर इसे तब सांप सूंघ जाता है जब जिक्र पाकिस्तान के अंतर्गत महिला और उसके अधिकारों का हो.

इसे हम पाकिस्तान में हुए महिला मार्च से भी समझ सकते हैं जिसमें न केवल पाकिस्तान की महिलाओं को तमाम तरह के अपशब्द सुनने पड़े बल्कि कई मामले तो ऐसे भी आए जहां आंदोलन में शामिल पाकिस्तानी महिलाओं पर आत्मघाती हमले हुए और उन्हें अपनी जान तक से हाथ धोना पड़ा.

मामले में दिलचस्प ये कि पकिस्तान में महिला मार्च से जुड़ी महिलाएं यदि पुलिस या कानून की शरण में जाती हैं तो वहां भी उनके हाथ निराशा ही लगती है और उल्टे उन्हीं पर ही मुकदमे दर्ज होते हैं.

ध्यान रहे बीते कुछ वक्त से पकिस्तान में महिलाओं ने 'मेरा जिस्म मेरी मर्ज़ी' नाम से कैंपेन चला रखा है जिसने कट्टरपंथियों की भावनाओं को आहत किया है और प्रदर्शनकारी महिलाओं पर फतवे की बरसात हो गई है. महिला मार्च के तहत तमाम प्रदर्शनकारी महिलाएं ऐसी हैं जिनका मानना यही है कि पाकिस्तानियों का दिमाग़ और सोच बहुत छोटी है जिसे एक प्लेकार्ड पर लिखी कुछ लाइनें आहत कर देती हैं.

यानी जो पाकिस्तान आज भारत में चल रही हिजाब कॉन्ट्रोवर्सी के तहत अपनी छाती पीट रहा है वो इस बात की पुष्टि कर देता है कि भारत के खिलाफ बात करके पाकिस्तान भारत की छवि को विश्व पटल पर धूमिल करना चाहता है. बात सीधी और एकदम साफ़ है पाकिस्तान हिजाब को मुद्दा बनाए, खूब बनाए लेकिन उससे पहले ये न भूले की वहां तो महिलाओं के मूलभूत अधिकार हैं ही नहीं।

क्योंकि बात पाकिस्तान की महिलाओं के सन्दर्भ में हुई है. तो उनके लिए बेहतर यही है कि वो भारत के उठाए मुद्दों को दरकिनार करें और इसके लिए प्रयत्न करे कि कैसे उनकी अपनी स्थिति सही होगी। इस बात में कोई शक नहीं है कि भारत से कहीं ज्यादा पाकिस्तान में मुस्लिम समुदाय से जुड़ी मुस्लिम महिलाओं की हालत ख़राब है. 

अंत में हम बस ये कहते हुए अपनी बात को विराम देंगे कि दुनिया जानती है कि पाकिस्तान का चाल चरित्र और चेहरा क्या है ? हिजाब को लेकर पाकिस्तान, भारत की नहीं बल्कि अपनी खुद की बेइज्जती करा रहा है.

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इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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