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बीजेपी का मिशन उड़ीसा

    • अभिनव राजवंश
    • Updated: 15 अप्रिल, 2017 01:17 PM
  • 15 अप्रिल, 2017 01:17 PM
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जब वर्तमान समय में बीजेपी के लिए उड़ीसा से अच्छे परिणाम आये हैं, तो बीजेपी का अगला लक्ष्य उड़ीसा के विधानसभा और लोकसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन का है.

देश के पूर्वी भाग में अपनी जड़े ज़माने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी के सारे दिग्गज आज से दो दिनों के लिए भुवनेश्वर में जुटेंगे. मौका होगा बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का, इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी समेत पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, सारे केंद्रीय मंत्री, राज्यों के पार्टी प्रमुख, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर के अलावा 13 बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल रहेंगे.

भारतीय जनता पार्टी के विस्तार की होगी योजना

वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के तेरह राज्यों में मुख्यमंत्री हैं, इसके अलावा बीजेपी अपने सहयोगियों के साथ 4 अन्य राज्यों के सरकार में है. हालांकि इन सबके बावजूद बीजेपी की उपस्थिति जहां देश के पश्चिमी भाग में काफी मजबूत है तो वहीं देश के पूर्वी भाग में बीजेपी काफी कमजोर है. ऐसे में बीजेपी की रणनीति देश के पूर्व में भी अपनी स्थिति मजबूत करने पर रहेगी. वैसे भी बीजेपी का प्रदर्शन पिछले कुछ सालों में शानदार रहा है, बीजेपी ने देश भर में विधानसभा चुनाव, उपचुनाव से लेकर निकाय चुनावों तक में बेहतरीन प्रदर्शन किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में पिछले तीन सालों में कोई कमी नहीं आयी है और वो देश के सबसे विश्वसनीय बने हुए हैं. बीजेपी की कोशिश होगी की इस अनुकूल समय का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाया जाय और उड़ीसा और बंगाल जैसे राज्यों में भी बीजेपी की जमीन तलाशी जाए.

उड़ीसा क्यों है खास

वैसे तो उड़ीसा के विधानसभा चुनाव साल 2019 में होने हैं मगर बीजेपी स्थानीय चुनावों में किये बेहतर प्रदर्शन को पूरी तरह भुनाना चाहती है, बीजेपी ने उड़ीसा के पंचायत चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया है. बीजेपी जहां 2012 के पंचायत चुनावों में 851 मे से मात्र 36 सीटें जीत सकने मे कामयाब रही तो 2017 के चुनावों बीजेपी ने 306 सीट जीत कर आयी है. बीजेपी के उत्साहित करने वाली बात ये भी है कि बीजेपी स्थानीय चुनावों मे बीजू जनता दाल के गढ़ मे सेंध लगाने मे कामयाब रही है, और साथ ही साथ कांग्रेस...

देश के पूर्वी भाग में अपनी जड़े ज़माने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी के सारे दिग्गज आज से दो दिनों के लिए भुवनेश्वर में जुटेंगे. मौका होगा बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का, इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी समेत पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, सारे केंद्रीय मंत्री, राज्यों के पार्टी प्रमुख, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर के अलावा 13 बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल रहेंगे.

भारतीय जनता पार्टी के विस्तार की होगी योजना

वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के तेरह राज्यों में मुख्यमंत्री हैं, इसके अलावा बीजेपी अपने सहयोगियों के साथ 4 अन्य राज्यों के सरकार में है. हालांकि इन सबके बावजूद बीजेपी की उपस्थिति जहां देश के पश्चिमी भाग में काफी मजबूत है तो वहीं देश के पूर्वी भाग में बीजेपी काफी कमजोर है. ऐसे में बीजेपी की रणनीति देश के पूर्व में भी अपनी स्थिति मजबूत करने पर रहेगी. वैसे भी बीजेपी का प्रदर्शन पिछले कुछ सालों में शानदार रहा है, बीजेपी ने देश भर में विधानसभा चुनाव, उपचुनाव से लेकर निकाय चुनावों तक में बेहतरीन प्रदर्शन किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में पिछले तीन सालों में कोई कमी नहीं आयी है और वो देश के सबसे विश्वसनीय बने हुए हैं. बीजेपी की कोशिश होगी की इस अनुकूल समय का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाया जाय और उड़ीसा और बंगाल जैसे राज्यों में भी बीजेपी की जमीन तलाशी जाए.

उड़ीसा क्यों है खास

वैसे तो उड़ीसा के विधानसभा चुनाव साल 2019 में होने हैं मगर बीजेपी स्थानीय चुनावों में किये बेहतर प्रदर्शन को पूरी तरह भुनाना चाहती है, बीजेपी ने उड़ीसा के पंचायत चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया है. बीजेपी जहां 2012 के पंचायत चुनावों में 851 मे से मात्र 36 सीटें जीत सकने मे कामयाब रही तो 2017 के चुनावों बीजेपी ने 306 सीट जीत कर आयी है. बीजेपी के उत्साहित करने वाली बात ये भी है कि बीजेपी स्थानीय चुनावों मे बीजू जनता दाल के गढ़ मे सेंध लगाने मे कामयाब रही है, और साथ ही साथ कांग्रेस को भी तीसरे स्थान पर धकेलने मे कामयाब रही है.

वर्तमान मे उड़ीसा मे भारतीय जनता पार्टी का केवल एक सांसद है, जबकि पार्टी के केवल 10 विधायक हैं. हालांकि बीजेपी साल 2000 से नौ साल तक बीजेडी सरकार का हिस्सा रही मगर इस दौरान बीजेपी वहां अपनी जड़ें जमाने में नाकामयाब रही, बीजेपी हमेशा एक सहयोगी की भूमिका में ही रही.

अब जब वर्तमान समय में बीजेपी के लिए उड़ीसा से अच्छे परिणाम आये हैं, तो बीजेपी का अगला लक्ष्य उड़ीसा के विधानसभा और लोकसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन का है. इसके लिए पार्टी विशेष रणनीति पर भी काम कर रही है, जिसके तहत अमित शाह अगले चुनाव तक हर महीने कम से कम तीन दिन राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बिताएंगे. इसके अलावा पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान समेत कुछ वरिष्ठ नेता भी अगले चुनाव तक उड़ीसा में अपना पूरा जोर लगाते नजर आएंगे जिससे आने वाले समय में उड़ीसा में भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्ता में आ सके.

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इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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