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महिलाएं पेट्रोल नहीं अब कार हैं...

    • ऑनलाइन एडिक्ट
    • Updated: 13 फरवरी, 2017 12:51 PM
  • 13 फरवरी, 2017 12:51 PM
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राजनीति में महिलाओं को कभी गुड़ कहा जाता है तो कभी पेट्रोल, ताजा मामला कुछ ऐसा है कि महिलाओं की तुलना कार से कर दी गई है. जो कहा गया है वो बहस का विषय है!

महिलाओं पर अगर कभी कोई बयान ना आए तो ये अपवाद ही माना जाएगा. शायद यही कारण है कि राजनीति में अगर कभी कोई महिलाओं पर बयान ना दे ऐसा हो ही नहीं सकता. चाहें कोई भी पार्टी हो या फिर कोई भी नेता, महिलाओं के मामले में बयानबाजी जरूर होगी और उन्हें हिदायतें भी दी जाएंगी. ताजा मामला है आद्र प्रदेश के लोकसभा स्पीकर का जिन्होंने महिलाओं की तुलना कार से की है.

ताजा मामले में आंद्र प्रदेश के स्पीकर कोडेला शिवप्रसाद राव ने अम्रावती में कहा कि 'जरा सोचिए अगर आप कोई गाड़ी खरीदते हैं. जब वो घर में है गराज में खड़ी है तो एक्सिडेंट नहीं होंगे, जब वो बाजार जाएगी या कहीं और जाएगी तो रोड एक्सिडेंट होंगे ही. जब कार की स्पीड बढ़ रही हो तो एक्सिडेंट होंगे, 50 किलोमीटर प्रतिघंटे की स्पीड होगी तो एक्सिडेंट कम होंगे और 100 किलोमीटर की होगी तो ज्यादा.'

आगे पुराने दिनों के बारे में बात करते हुए राव ने कहा कि 'पुराने जमाने में गृहणियां सुरक्षित रहती थीं क्योंकि वो घर के अंदर रहती थीं. अब महिलाएं बाहर निकलती हैं. काम करती हैं तो उनके साथ घटनाएं होती हैं.'

गौर करने वाली बात ये है कि ये बयान अमरावती में दिया था. वो भी उस इवेंट में जहां महिलाओं की पार्लियामेंट चल रही थी और उस फंक्शन की थीम थी महिला सशक्तिकरण.

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब महिलाओं को लेकर कोई ऐसा कमेंट जारी किया गया हो. इसके पहले भी कई बार बहुत सी बातें कही गई हैं. जैसे बेंगलुरु मास मॉलेस्टेशन के केस में समाजवादी पार्टी के अबू आजमी का कहना था कि महिलाएं पेट्रोल की तरह हैं. अगर पेट्रोल को आग के पास ले जाओगे तो धमाका तो होगा ही. आखिर क्यों महिलाएं छोटे कपड़े पहनती हैं. गुड़ होगा तो चीटिंया तो आएंगी ही.

महिलाओं की तुलना किसी सामान से करना और उन्हें हिदायत या धमकी देना तो बहुत आम बात है. चलिए कुछ किस्से...

महिलाओं पर अगर कभी कोई बयान ना आए तो ये अपवाद ही माना जाएगा. शायद यही कारण है कि राजनीति में अगर कभी कोई महिलाओं पर बयान ना दे ऐसा हो ही नहीं सकता. चाहें कोई भी पार्टी हो या फिर कोई भी नेता, महिलाओं के मामले में बयानबाजी जरूर होगी और उन्हें हिदायतें भी दी जाएंगी. ताजा मामला है आद्र प्रदेश के लोकसभा स्पीकर का जिन्होंने महिलाओं की तुलना कार से की है.

ताजा मामले में आंद्र प्रदेश के स्पीकर कोडेला शिवप्रसाद राव ने अम्रावती में कहा कि 'जरा सोचिए अगर आप कोई गाड़ी खरीदते हैं. जब वो घर में है गराज में खड़ी है तो एक्सिडेंट नहीं होंगे, जब वो बाजार जाएगी या कहीं और जाएगी तो रोड एक्सिडेंट होंगे ही. जब कार की स्पीड बढ़ रही हो तो एक्सिडेंट होंगे, 50 किलोमीटर प्रतिघंटे की स्पीड होगी तो एक्सिडेंट कम होंगे और 100 किलोमीटर की होगी तो ज्यादा.'

आगे पुराने दिनों के बारे में बात करते हुए राव ने कहा कि 'पुराने जमाने में गृहणियां सुरक्षित रहती थीं क्योंकि वो घर के अंदर रहती थीं. अब महिलाएं बाहर निकलती हैं. काम करती हैं तो उनके साथ घटनाएं होती हैं.'

गौर करने वाली बात ये है कि ये बयान अमरावती में दिया था. वो भी उस इवेंट में जहां महिलाओं की पार्लियामेंट चल रही थी और उस फंक्शन की थीम थी महिला सशक्तिकरण.

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब महिलाओं को लेकर कोई ऐसा कमेंट जारी किया गया हो. इसके पहले भी कई बार बहुत सी बातें कही गई हैं. जैसे बेंगलुरु मास मॉलेस्टेशन के केस में समाजवादी पार्टी के अबू आजमी का कहना था कि महिलाएं पेट्रोल की तरह हैं. अगर पेट्रोल को आग के पास ले जाओगे तो धमाका तो होगा ही. आखिर क्यों महिलाएं छोटे कपड़े पहनती हैं. गुड़ होगा तो चीटिंया तो आएंगी ही.

महिलाओं की तुलना किसी सामान से करना और उन्हें हिदायत या धमकी देना तो बहुत आम बात है. चलिए कुछ किस्से देखते हैं-

1. कर्नाटक के तत्कालीन होम मिनिस्टर केजे जॉर्ज ने एक लड़की के रेप पर सवाल उठाते हुए कहा था कि आप उस घटना को गैंगरेप कैसे कह सकते हैं. गैंगरेप में 4-5 लोग होते हैं.

2. बीजेपी के मुख्तार अब्बास नक्वी ने कहा था कि महिलाएं जो लिपस्टिक और पाउडर लगाती हैं वो जम्मू और कश्मीर के आतंकवादियों की तरह हैं.

3. ममता बनर्जी ने कहा था कि देश में रेप केस इसलिए बढ़ गए हैं क्योंकि महिलाओं को अब पुरुषों के साथ खुलकर घूमने की आजादी मिल गई है.

4. हरयाणा कांग्रेस कमेटी के मेंबर धरमवीर गोयट ने कहा था कि 90 प्रतिशत रेप केस सहमती से होते हैं.

5. बीजेपी लीडर दयाशंकर सिंह ने बसपा चीफ मायावती की तुलना वैश्या तक से कर डाली.

6. मुलायम सिंह यादव ने रेप के लिए फांसी की सजा का विरोध करते हुए मुरादाबाद की रैली में कहा था कि 'लड़कियां पहले दोस्ती करती हैं, लड़के-लड़की में मतभेद हो जाता है, मतभेद होने के बाद उसे रेप का नाम दे देती हैं. लड़कों से गलती हो जाती है अब क्या रेप केस में फांसी दे दी जाएगी.'

7. कांग्रेस मेंबर यूसुफ भट्ट ने कहा था कि बिन ब्याही लड़कियां माता-पिता के लिए एक बोझ होती हैं. मेरी बेटियां अभी पढ़ रही हैं और उनकी शादी होनी है. जाहिर सी बात है कि वो मेरे लिए बोझ हैं.

8. त्रणमूल कांग्रेस के विधायक तपस पाल ने कहा था कि अगर कोई हमारी पार्टी के वर्करों की माताओं और बहनों की निंदा करेगा तो मैं अपने लड़कों को छोड़ दूंगा और वो घर में घुसकर उस इंसान के परिवार की महिलाओं का रेप करके आएंगे.

9. अबू आजमी ने एक और बयान में कहा था कि अगर कोई भी शादीशुदा या कुंवारी महिला किसी आदमी के साथ बाहर जाती है तो उसे सूली पर टांग देना चाहिए. भले ही वो मर्जी से गई हो या बिना मर्जी के.

10. कांग्रेस लीडर सत्यदेव कटारे ने कहा था कि जब तक महिला तिरछी निगाहों से नहीं देखेगी तब तक पुरुष उन्हें नहीं छेड़ेगा.

इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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