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व्यंग्य: मेरे पास जियो का सिम है, तुम्हारे पास क्या है ?

    • अभिनव राजवंश
    • Updated: 04 सितम्बर, 2016 10:55 AM
  • 04 सितम्बर, 2016 10:55 AM
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आज अगर बॉलीवुड में कालजयी 'दीवार' बनती तो मेरे पास गाड़ी है, बंगला है की जगह जरूर यही डायलॉग होता कि मेरे पास रिलायंस जियो का सिम है, तुम्हारे पास क्या है?

पिछले कुछ दिनों से मोहल्ले में मेरी पूछ काफी बढ़ गयी है. ऐसा नहीं है कि मैंने इन दिनों कोई बहुत बड़ा कारनामा कर दिया हो, हां इतना जरूर है कि इन दिनों मेरे हाथों में रिलायंस जियो का 4G सिम लग गया है (अब इन दिनों इससे बड़ी कोई फतह तो हो नहीं सकती ). लोग मुझे अब इस नज़र से देख रहें है जैसे 'भारत रत्न' के लिए मेरे नाम की घोषणा हो गयी हो. आये दिन दोस्त यार मिलने आ रहे हैं बस एक ही मिन्नत के साथ 'भाई, किसी तरह से जुगाड़ करा दे'.

अगर सही मायनो में कहूं तो आई एम फीलिंग लाइक ऑन द टॉप ऑफ़ द वर्ल्ड. उम्मीद नहीं थी इक छोटी सी चीज आपका मान इतना बढ़ा सकती है!

मगर एक बात जो बचपन से ही बताई गयी है कि हर अच्छी चीज के साथ कुछ बुराइयां भी होती है. कुछ ऐसी बुराईयां इसमें भी है. अब तक जो दोस्त मिलने आने पर मुझसे बात किया करते थे वो अब मेरे मोबाइल से बात करने को ज्यादा उत्सुक दिखाई देते हैं. और तो और अब तक मिलने के बाद जो लोग हाल चाल पूछते थे वो अब 'भाई तुम्हारा मोबाइल कहां है' पूछ कर इस परंपरा की इतिश्री करते नजर आ रहें हैं.

 जियो वाली सेल्फी...

खैर, इन सब में जो सबसे दुखद पहलू है वो यह कि पिछले हफ्ते तक जो मोबाइल मेरा पर्सनल हुआ करता था वो अब पब्लिक हो गया है. मेरे मोबाइल का लॉक कोड मुझसे मिलने वाले हर बन्दे को मालूम हो गया है. वो तो भला हो मोबाइल में फिंगरप्रिंट लॉक बनाने वालों का वरना जो मेरी थोड़ी बहुत जरुरत आन पड़ रही है वो भी जाती रहती. और मेरे नंबर पर ऐसे कॉल ज्यादा आ रहें हैं, जो इंटरव्यू की भांति प्रतीत हो रहे हैं. मसलन, कौन बोल रहा है, कहां से बात कर रहें हैं आदि...

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पिछले कुछ दिनों से मोहल्ले में मेरी पूछ काफी बढ़ गयी है. ऐसा नहीं है कि मैंने इन दिनों कोई बहुत बड़ा कारनामा कर दिया हो, हां इतना जरूर है कि इन दिनों मेरे हाथों में रिलायंस जियो का 4G सिम लग गया है (अब इन दिनों इससे बड़ी कोई फतह तो हो नहीं सकती ). लोग मुझे अब इस नज़र से देख रहें है जैसे 'भारत रत्न' के लिए मेरे नाम की घोषणा हो गयी हो. आये दिन दोस्त यार मिलने आ रहे हैं बस एक ही मिन्नत के साथ 'भाई, किसी तरह से जुगाड़ करा दे'.

अगर सही मायनो में कहूं तो आई एम फीलिंग लाइक ऑन द टॉप ऑफ़ द वर्ल्ड. उम्मीद नहीं थी इक छोटी सी चीज आपका मान इतना बढ़ा सकती है!

मगर एक बात जो बचपन से ही बताई गयी है कि हर अच्छी चीज के साथ कुछ बुराइयां भी होती है. कुछ ऐसी बुराईयां इसमें भी है. अब तक जो दोस्त मिलने आने पर मुझसे बात किया करते थे वो अब मेरे मोबाइल से बात करने को ज्यादा उत्सुक दिखाई देते हैं. और तो और अब तक मिलने के बाद जो लोग हाल चाल पूछते थे वो अब 'भाई तुम्हारा मोबाइल कहां है' पूछ कर इस परंपरा की इतिश्री करते नजर आ रहें हैं.

 जियो वाली सेल्फी...

खैर, इन सब में जो सबसे दुखद पहलू है वो यह कि पिछले हफ्ते तक जो मोबाइल मेरा पर्सनल हुआ करता था वो अब पब्लिक हो गया है. मेरे मोबाइल का लॉक कोड मुझसे मिलने वाले हर बन्दे को मालूम हो गया है. वो तो भला हो मोबाइल में फिंगरप्रिंट लॉक बनाने वालों का वरना जो मेरी थोड़ी बहुत जरुरत आन पड़ रही है वो भी जाती रहती. और मेरे नंबर पर ऐसे कॉल ज्यादा आ रहें हैं, जो इंटरव्यू की भांति प्रतीत हो रहे हैं. मसलन, कौन बोल रहा है, कहां से बात कर रहें हैं आदि...

यह भी पढ़ें- इमेजवा की फिक़र में..

हालांकि हम भारतियों का मुफ्त की चीजों के प्रति लगाव जगजाहिर है. मगर जियो ने जो कमाल किया वो वाकई में काबिलेगौर है. देश का युवा जिन्हें राष्ट्र का भविष्य बताया जाता है, घंटो लंबी लाइन में लग एक अदद सिम की जुगाड़ में लगे दिख रहे हैं. हमारे भविष्य शायद अपनी नौकरी के लिए उतनी पैरवी करते न नजर आएं जितनी एक सिम के लिए करते नजर आ रहें हैं. और अगर गलती से सिम मिल जाये तो सम्राट अशोक सा विजयी तेज चेहरे पर चमक जाता है.

अब इतना कुछ देखने के बाद मन में यही ख्याल आ रहा है कि आज अगर बॉलीवुड में कालजयी 'दीवार' बनती तो मेरे पास गाड़ी है, बंगला है की जगह जरूर यही डायलॉग होता कि मेरे पास रिलायंस जियो का सिम है, तुम्हारे पास क्या है?

यह भी पढ़ें- रिलायंस जियो के लिए मोबाइल उपभोक्ता के ‘मन की बात’

इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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