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'क्या मेरे सांड को आजम की भैंसों की तरह खोजेगा प्रशासन?'

    • आईचौक
    • Updated: 12 अप्रिल, 2016 04:37 PM
  • 12 अप्रिल, 2016 04:37 PM
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आपने आजम खान की भैंसों के चीरी होने के बारे में सुना होगा लेकिन अब वाराणसी में एक सांड के गायब होने पर उसके मालिक द्वारा 50 हजार इनामी राशि की घोषणा करने का मामला चर्चा में है.

कुछ वर्षों पहले उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री आजम खान की भैंसों की चोरी के मामले ने पूरी देश में सुर्खियां बटोरी थीं. खासकर आजम की भैंसों को खोजने के लिए लगाए गए सात पुलिसवालों की टीम चर्चा का विषय बन गई थी. खैर, तब भी आजम की भैंसों को खोज निकालने में पुलिस को लगभग डेढ़ साल का वक्त लग गया था.

लेकिन जरा सोचिए तब क्या हो अगर किसी आम आदमी की भैंस चोरी हो जाए, जाहिर सी बात है पुलिस एक मंत्री की भैंस खोजने जैसी तत्परता तो नहीं ही दिखाएगी. तब क्या होगा? ऐसा ही कुछ हुआ वाराणसी में एक आदमी के सांड के गायब होने पर. शहर के मनोज कुमार पाण्डेय का सांड पिछले एक हफ्ते से गायब है. इस बात की गुहार लेकर पुलिस के पहुंचे मनोज को अब तक इस मामले में रिपोर्ट दर्ज हो जाने के अलावा कुछ नहीं मिला है.

आखिरकार अपने सांड के न मिलने से परेशान मनोज ने उसे खोजने को 50 हजार रुपये इनाम देने का ऐलान कर दिया. इस सांड की फोटो और उसके शारीरिक वर्णन वाले पोस्टर जगह-जगह लगाए गए हैं. मनोज पाण्डेय के इस तीन साल के सांड का नाम 'बादशाह' है. बादशाह को खोजने में नाकाम होने के बाद पाण्डेय पुलिस की शरण में पहुंच गए. पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली है और सांड की तलाश जारी है.

एक हफ्ते पहले गायब हुए बादशाह नामक सांड को खोजने वाले को 50 हजार रुपये का इनाम मिलेगा

पाण्डेय का कहना है कि कुछ हफ्ते पहले उनके पास कुछ लोग अपनी गाय को लेकर वीर्यारोपण के लिए आए थे. पाण्डेय को लगता है कि वही लोग बादशाह को अपने साथ ले गए.

सांड के लिए इतनी बड़ी इनामी राशि की घोषणा की क्या वजह है, ये पूछे जाने पर पाण्डेय कहते हैं कि इसका एक ही उद्देश्य है कि यह उन लोगों को आकर्षित...

कुछ वर्षों पहले उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री आजम खान की भैंसों की चोरी के मामले ने पूरी देश में सुर्खियां बटोरी थीं. खासकर आजम की भैंसों को खोजने के लिए लगाए गए सात पुलिसवालों की टीम चर्चा का विषय बन गई थी. खैर, तब भी आजम की भैंसों को खोज निकालने में पुलिस को लगभग डेढ़ साल का वक्त लग गया था.

लेकिन जरा सोचिए तब क्या हो अगर किसी आम आदमी की भैंस चोरी हो जाए, जाहिर सी बात है पुलिस एक मंत्री की भैंस खोजने जैसी तत्परता तो नहीं ही दिखाएगी. तब क्या होगा? ऐसा ही कुछ हुआ वाराणसी में एक आदमी के सांड के गायब होने पर. शहर के मनोज कुमार पाण्डेय का सांड पिछले एक हफ्ते से गायब है. इस बात की गुहार लेकर पुलिस के पहुंचे मनोज को अब तक इस मामले में रिपोर्ट दर्ज हो जाने के अलावा कुछ नहीं मिला है.

आखिरकार अपने सांड के न मिलने से परेशान मनोज ने उसे खोजने को 50 हजार रुपये इनाम देने का ऐलान कर दिया. इस सांड की फोटो और उसके शारीरिक वर्णन वाले पोस्टर जगह-जगह लगाए गए हैं. मनोज पाण्डेय के इस तीन साल के सांड का नाम 'बादशाह' है. बादशाह को खोजने में नाकाम होने के बाद पाण्डेय पुलिस की शरण में पहुंच गए. पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली है और सांड की तलाश जारी है.

एक हफ्ते पहले गायब हुए बादशाह नामक सांड को खोजने वाले को 50 हजार रुपये का इनाम मिलेगा

पाण्डेय का कहना है कि कुछ हफ्ते पहले उनके पास कुछ लोग अपनी गाय को लेकर वीर्यारोपण के लिए आए थे. पाण्डेय को लगता है कि वही लोग बादशाह को अपने साथ ले गए.

सांड के लिए इतनी बड़ी इनामी राशि की घोषणा की क्या वजह है, ये पूछे जाने पर पाण्डेय कहते हैं कि इसका एक ही उद्देश्य है कि यह उन लोगों को आकर्षित करेगा जो बादशाह को बेचने के लिए अपने साथ ले गए होंगे. 

लेकिन बादशाह के गायब होने से दुखी पाण्डेय का कहना है कि बादशाह हमारे लिए सिर्फ एक जानवर नहीं बल्कि घर के सदस्य की तरह है. वह कहते हैं, 'ये हमारे लिए नंदी जैसा था जिसकी हम पूजा करते थे, लेकिन अब वो गायब हो गया है.’

मनोज कुमार पाण्डेय ने ichowk से कहा, 'हम इस सांड की पूजा करते हैं, मेरे माता-पिता और मैं इसकी पूजा करते रहे हैं.' वह कहते हैं, 'वह हमारे बेटे की तरह है, इसलिए उसको खोजने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं.'एक हफ्ते से गायब अपने सांड के बारे में कोई सुराग हाथ न लगने से निराश मनोज कहते हैं कि क्या आजम खान की भैंसों को खोजने के लिए दिन-रात एक कर देने वाला प्रशासन एक आम आदमी को ऐसी मुसीबत से उबरने के लिए कार्रवाई करेगा?

पाण्डेय के इस सवाल का सही जवाब को अखिलेश सरकार और यूपी पुलिस ही दे सकती है!

इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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