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इन तस्वीरों पर ये चांटा जरूरी था..

    • आईचौक
    • Updated: 25 जनवरी, 2017 10:08 PM
  • 25 जनवरी, 2017 10:08 PM
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बर्लिन की एक बेहद संवेदनशील जगह 'होलोकॉस्ट मेमोरियल' में बेहद अशिष्ट सेल्फी खीचीं गईं, जिससे एक आर्टिस्ट बेहद आहत हुए और उन्होंने उन्हीं तस्वीरों का इस्तेमाल करके उन लोगों को अच्छा सबक सिखाया.

सेल्फी लेना आजकल का चलन है, हर कोई सेल्फी का दीवाना है. पर ये सेल्फी तब बहुत बुरी लगती हैं जब सेल्फी लेने वाले न जगह देखते हैं और न मौका. ऐसे लोग फिर लोगों की आलोचनाओं का शिकार होते हैं. कुछ ऐसी ही बेहद अशिष्ट सेल्फी खीचीं गईं बर्लिन की एक बेहद संवेदनशील जगह 'होलोकॉस्ट मेमोरियल' में, जिससे एक इजराइली आर्टिस्ट बेहद आहत हुए और उन्होंने उन्हीं तस्वीरों का इस्तेमाल उन लोगों को जबाव देने के लिए किया.

दरअसल बर्लिन का होलोकॉस्ट मेमोरियल वो जगह है जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मारे गए हजारों लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए बनाया गया था, खासकर उन लोगों को जिन्हें यूरोप के आसपास यातना शिविरों में दर्दनाक मौत दी गई थी. लेकिन यहां आने वाले कुछ लोग उस शिष्टता को भूल जाते हैं जो इस जगह पर उन्हें दिखानी चाहिए.

ऐसे कुछ लोगों की तस्वीरें जिन्हें फेसबुक, इंस्टाग्राम टिंडर जैसे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर शेयर किया गया था उन्हें आर्टिस्ट शाहक शपीरा ने उठाया और अपने प्रोजेक्ट 'योलोकॉस्ट' के लिए इस्तेमाल किया. ये प्रोजेक्ट इन्हीं लोगों को शर्मिंदा करने के लिए बनाया गया है, जिसमें उन लोगों की असल तस्वीरों को विश्व युद्ध के दौर की तस्वीरों के साथ फोटोशॉप किया गया.

ये पहले और बाद की तस्वीरें हैं जो किसी को भी शर्मिंदा कर सकती हैं, खासकर जो लोग इनमें दिखाई दे रहे हैं, वो तो सेल्फी लेने से पहले हजार बार सोचेंगे.

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सेल्फी लेना आजकल का चलन है, हर कोई सेल्फी का दीवाना है. पर ये सेल्फी तब बहुत बुरी लगती हैं जब सेल्फी लेने वाले न जगह देखते हैं और न मौका. ऐसे लोग फिर लोगों की आलोचनाओं का शिकार होते हैं. कुछ ऐसी ही बेहद अशिष्ट सेल्फी खीचीं गईं बर्लिन की एक बेहद संवेदनशील जगह 'होलोकॉस्ट मेमोरियल' में, जिससे एक इजराइली आर्टिस्ट बेहद आहत हुए और उन्होंने उन्हीं तस्वीरों का इस्तेमाल उन लोगों को जबाव देने के लिए किया.

दरअसल बर्लिन का होलोकॉस्ट मेमोरियल वो जगह है जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मारे गए हजारों लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए बनाया गया था, खासकर उन लोगों को जिन्हें यूरोप के आसपास यातना शिविरों में दर्दनाक मौत दी गई थी. लेकिन यहां आने वाले कुछ लोग उस शिष्टता को भूल जाते हैं जो इस जगह पर उन्हें दिखानी चाहिए.

ऐसे कुछ लोगों की तस्वीरें जिन्हें फेसबुक, इंस्टाग्राम टिंडर जैसे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर शेयर किया गया था उन्हें आर्टिस्ट शाहक शपीरा ने उठाया और अपने प्रोजेक्ट 'योलोकॉस्ट' के लिए इस्तेमाल किया. ये प्रोजेक्ट इन्हीं लोगों को शर्मिंदा करने के लिए बनाया गया है, जिसमें उन लोगों की असल तस्वीरों को विश्व युद्ध के दौर की तस्वीरों के साथ फोटोशॉप किया गया.

ये पहले और बाद की तस्वीरें हैं जो किसी को भी शर्मिंदा कर सकती हैं, खासकर जो लोग इनमें दिखाई दे रहे हैं, वो तो सेल्फी लेने से पहले हजार बार सोचेंगे.

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इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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