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ये स्कर्ट इतनी भी शॉर्ट नहीं...

    • पारुल चंद्रा
    • Updated: 02 नवम्बर, 2015 03:12 PM
  • 02 नवम्बर, 2015 03:12 PM
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अमेरिका जैसे आधुनिक देश में एक बच्‍ची ने अपने अनुभवों के आधार पर यह फेसबुक पोस्‍ट डाली है, जो अब वायरल हो गई है. उसकी टिप्‍पणी है- 'हमारा समाज अभी इतना आधुनिक नहीं हुआ कि मेरी तीन इंच जांघें बर्दाश्त कर सके'

दुनिया भर में स्कर्ट की लंबाई को लेकर अक्सर विवाद होते रहते हैं. अमेरिका के दक्षिण कैरोलीना में स्कूल की एक छात्रा की स्कर्ट पर जब टीचर ने टिप्पणी की तो उसने खुद को अपमानित महसूस करते हुए अपने दिल की बात सोशल मीडिया पर शेयर की, जिसे पढ़कर आप भी हैरत में पड़ जाएंगे कि एक हाई स्कूल में पढ़ने वाली लड़की को स्कर्ट के लिए टोकना किस हद तक आहत कर सकता है. 

17 साल की केरी बरजेस(Carey Burgess) स्कूल में एक शॉर्ट खाकी स्कर्ट पहनकर आईं थी, जो उनके घुटनों से सिर्फ तीन इंच ऊपर थी. जिसे देखकर केरी को तुरंत स्कूल छोड़कर घर वापस जाने के लिए कह दिया गया. केरी ने खुद को शर्मिंदा महसूस किया और फफक कर रो पडीं. बाद में उन्होंने अपने इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंड पर एक पोस्ट शेयर की जिसे अब तक 12000 से भी ज्यादा बार शेयर किया गया है.

केरी ने अपनी पोस्ट में कहा कि- 'मुझे अपने बारे में एक बात पता चली है कि मैं एक वेश्या हूं'. स्कूल प्रांगण में चलते वक्त मुझे पीछे से आवाज़ आई कि 'तुम्हारी स्कर्ट बहुत छोटी है, तुम्हें इसी वक्त स्कूल से बाहर जाना होगा'.

उस टीचर को शुक्रिया कहते हुए केरी ने कहा कि- 'मुझे ये समझाने के लिए आपका शुक्रिया कि असल में मैं अपने स्कूल के लिए नहीं बल्कि एक नाइट क्लब या किसी वेश्यालय में जाने के लिए तैयार हुई थी.'

दुनिया भर में स्कर्ट की लंबाई को लेकर अक्सर विवाद होते रहते हैं. अमेरिका के दक्षिण कैरोलीना में स्कूल की एक छात्रा की स्कर्ट पर जब टीचर ने टिप्पणी की तो उसने खुद को अपमानित महसूस करते हुए अपने दिल की बात सोशल मीडिया पर शेयर की, जिसे पढ़कर आप भी हैरत में पड़ जाएंगे कि एक हाई स्कूल में पढ़ने वाली लड़की को स्कर्ट के लिए टोकना किस हद तक आहत कर सकता है. 

17 साल की केरी बरजेस(Carey Burgess) स्कूल में एक शॉर्ट खाकी स्कर्ट पहनकर आईं थी, जो उनके घुटनों से सिर्फ तीन इंच ऊपर थी. जिसे देखकर केरी को तुरंत स्कूल छोड़कर घर वापस जाने के लिए कह दिया गया. केरी ने खुद को शर्मिंदा महसूस किया और फफक कर रो पडीं. बाद में उन्होंने अपने इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंड पर एक पोस्ट शेयर की जिसे अब तक 12000 से भी ज्यादा बार शेयर किया गया है.

केरी ने अपनी पोस्ट में कहा कि- 'मुझे अपने बारे में एक बात पता चली है कि मैं एक वेश्या हूं'. स्कूल प्रांगण में चलते वक्त मुझे पीछे से आवाज़ आई कि 'तुम्हारी स्कर्ट बहुत छोटी है, तुम्हें इसी वक्त स्कूल से बाहर जाना होगा'.

उस टीचर को शुक्रिया कहते हुए केरी ने कहा कि- 'मुझे ये समझाने के लिए आपका शुक्रिया कि असल में मैं अपने स्कूल के लिए नहीं बल्कि एक नाइट क्लब या किसी वेश्यालय में जाने के लिए तैयार हुई थी.'

                                                       इसी स्कर्ट को पहनकर केरी स्कूल गई थीं

केरी ने ये भी कहा कि- मुझे मेरे दोस्तों और क्लास के बच्चों के सामने शर्मिंदा करने के लिए आपका शुक्रिया, क्योंकि आपमें इतनी भी शिष्टता नहीं थी कि आप मुझे एकतरफ ले जाकर अपनी बात कह सकती थीं.' 

केरी अपने स्कूल की स्टूडेंट बॉडी प्रेसिडेंट भी हैं. वो निराश तो हुईं लेकिन बेबाकी से अपनी बात कही. उन्होंने कहा कि- 'हो सकता है कि मैं गलत हूं. हो सकता है कि हमारा समाज अभी इतना आधुनिक नहीं हुआ कि मेरी तीन इंच जांघें बर्दाश्त कर सके. ये पुरुष प्रधान समाज है और मैं एक महिला हूं'

केरी ने स्कूल में लड़कियों पर होने वाले भेदभाव पर निशाना साधा और उसका विरोध करते हुए कहा कि- 'हां, मैं एक महिला हूं, जिसके पास जांघें भी हैं और दिमाग भी. मेरी स्कर्ट के बारे में फिक्र करने से बेहतर है कि स्कूल अपने अक्षम कर्मचारियों और सेक्सिस्ट नेताओं पर ध्यान दे.'

स्कूल के तानाशाह रवैये पर केरी का ये जवाब वाकई समाज के सामने एक सवाल बन गया है. स्कर्ट की ऊंचाई को लेकर हर समाज ने अपने अलग नियम और कायदे बना रखे हैं. इन नियमों की अनदेखी करने वालों को अक्सर शर्मिंदा होना पड़ता है. स्कर्ट की लंबाई कितनी हो कि वो शिष्ट लगे, ये असल में लोगों की सोच पर निर्भर करता है. कोलंबिया में तो स्कर्ट को बलात्कार के लिए जिम्मेदार भी ठहराया गया. भारत में भी स्कर्ट को लेकर विवाद होते रहे हैं. स्कर्ट कोई नया फैशन नहीं बल्कि इसका इतिहास 50 साल से भी ज्यादा पुराना है. पर इस दुनिया में फैशन बदलना जितना आसान है, समाज की सोच बदलना उतना ही मुश्किल.

ये है केरी की फेसबुक पोस्ट-

 

इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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