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महिलाएं किसी बाबा के लिए 'सेक्स स्लेव' क्यों बना दी जाती हैं?

    • श्रीमई पियू कुंडू
    • Updated: 13 अगस्त, 2015 07:03 PM
  • 13 अगस्त, 2015 07:03 PM
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हम महिलाओं के दिमाग के अंदर यह बात बैठा दी गई है कि कोई हमसे ताकतवर संस्था या शरीर ही हमारी तकदीर को बदल सकता है. महिलाओं की सेक्स लाइफ को ही हम क्यों उसके किसी के प्रति निष्ठा से जोड़ कर देखने लगते हैं?

आपकी शादी नहीं हो रही है? बच्चे नहीं हो रहे? पति के साथ सेक्स को लेकर कोई समस्या है? पैसे से जुड़ी कोई परेशानी है? सास के साथ आपकी नहीं बन रही? क्या पति आप पर शक करते हैं? क्या आप दूसरी शादी के बारे में सोच रही हैं? आप मांगलिक हैं? आप पर काल सर्पदोष है या शनि की महादशा चल रही है? यह तमाम सवाल और फिर पाप से लेकर पश्चाताप और शुद्धता की बात. इस देश में धर्म और महिलाओं को लेकर ऐसी सोच क्यों हैं जहां मां से लेकर सास, बहन से लेकर ननद और दादी, सहकर्मी, दोस्त, ऑन्टी सबने चुप्पी साधी हुई है और एक-दूसरे को ही पछतावे वाली मनोदशा में जीने को मजबूर करती आ रही हैं.

हम महिलाओं के दिमाग के अंदर यह बात बैठा दी गई है कि कोई हमसे ताकतवर संस्था या शरीर ही हमारी तकदीर को बदल सकता है. महिलाओं की सेक्स लाइफ को ही हम क्यों उसके किसी के प्रति निष्ठा से जोड़ कर देखने लगते हैं? इस देश में महिलाएं अपनी पसंद को क्यों स्वतंत्र रूप से जाहिर नहीं कर सकतीं? इच्छा की पूर्ति के नाम पर क्यों सदियों से महिलाओं का शोषण किया जाता रहा है? क्यों इन नकली बाबाओं के लिए महिलाएं आसान शिकार बन जाती हैं?

विवाद की जड़

हाल में, स्वघोषित देवी राधे मां से जुड़ी खबरें सुर्खियों में रही. कांदिवली की एक महिला ने राधे मां पर अपने पति और घरवालों को दहेज के लिए भड़काने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया है. सब जानते हैं कि राधे मां आज इटरनेट पर मजाक का विषय बनी हुई है. खासकर, अपने लुक, लाल स्कर्ट में सामने आई उनकी एक तस्वीर के कारण जिसमें वह हाई बूट पहने हुई हैं.

इस पुरुष प्रधान समाज में हम अध्यात्मिक नेतृत्व के रूप में आम तौर पर बाबाओं की ही कल्पना करते रहे हैं जो खड़ाऊं पहनते हैं और भगवा वस्त्र ओढ़ते हैं. जो राधे मां करती हैं या करती रही हैं उसे हम पहले केवल इन्हीं बाबाओं से जोड़ कर देखते रहे हैं. राधे मां देश के सभी राष्ट्रीय चैनलों पर बता रही हैं, 'मैं अश्लीलता नहीं फैला रही हूं. मैं एक मां हूं. अगर एक मां अपने घर में अपने बच्चे को प्यार करती...

आपकी शादी नहीं हो रही है? बच्चे नहीं हो रहे? पति के साथ सेक्स को लेकर कोई समस्या है? पैसे से जुड़ी कोई परेशानी है? सास के साथ आपकी नहीं बन रही? क्या पति आप पर शक करते हैं? क्या आप दूसरी शादी के बारे में सोच रही हैं? आप मांगलिक हैं? आप पर काल सर्पदोष है या शनि की महादशा चल रही है? यह तमाम सवाल और फिर पाप से लेकर पश्चाताप और शुद्धता की बात. इस देश में धर्म और महिलाओं को लेकर ऐसी सोच क्यों हैं जहां मां से लेकर सास, बहन से लेकर ननद और दादी, सहकर्मी, दोस्त, ऑन्टी सबने चुप्पी साधी हुई है और एक-दूसरे को ही पछतावे वाली मनोदशा में जीने को मजबूर करती आ रही हैं.

हम महिलाओं के दिमाग के अंदर यह बात बैठा दी गई है कि कोई हमसे ताकतवर संस्था या शरीर ही हमारी तकदीर को बदल सकता है. महिलाओं की सेक्स लाइफ को ही हम क्यों उसके किसी के प्रति निष्ठा से जोड़ कर देखने लगते हैं? इस देश में महिलाएं अपनी पसंद को क्यों स्वतंत्र रूप से जाहिर नहीं कर सकतीं? इच्छा की पूर्ति के नाम पर क्यों सदियों से महिलाओं का शोषण किया जाता रहा है? क्यों इन नकली बाबाओं के लिए महिलाएं आसान शिकार बन जाती हैं?

विवाद की जड़

हाल में, स्वघोषित देवी राधे मां से जुड़ी खबरें सुर्खियों में रही. कांदिवली की एक महिला ने राधे मां पर अपने पति और घरवालों को दहेज के लिए भड़काने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया है. सब जानते हैं कि राधे मां आज इटरनेट पर मजाक का विषय बनी हुई है. खासकर, अपने लुक, लाल स्कर्ट में सामने आई उनकी एक तस्वीर के कारण जिसमें वह हाई बूट पहने हुई हैं.

इस पुरुष प्रधान समाज में हम अध्यात्मिक नेतृत्व के रूप में आम तौर पर बाबाओं की ही कल्पना करते रहे हैं जो खड़ाऊं पहनते हैं और भगवा वस्त्र ओढ़ते हैं. जो राधे मां करती हैं या करती रही हैं उसे हम पहले केवल इन्हीं बाबाओं से जोड़ कर देखते रहे हैं. राधे मां देश के सभी राष्ट्रीय चैनलों पर बता रही हैं, 'मैं अश्लीलता नहीं फैला रही हूं. मैं एक मां हूं. अगर एक मां अपने घर में अपने बच्चे को प्यार करती है, तो उसे आप अश्लीलता कैसे बता सकते हैं. मैं पवित्र और धार्मिक विचारों वाली हूं.'

क्या सेक्स उत्तेजना बढ़ाने वाला राधे मां जैसा किरदार किसी भी रूप में आसाराम बापू की करतूतों से अलग है? आज भी, यूट्यूब पर किसके सेक्स ज्ञान भरे पड़े हैं? किसकी किताब यह दावा करती है कि हस्तमैथुन और समलैंगिकता से उर्जा बर्बाद होती है और यह पुरुषों को मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर बना सकता है.

आसाराम के क्या उपदेश होते थे. यहीं न, 'अमावस्या, पूर्णिमा, शिवरात्री या होली के दौरान सेक्स मत करो. इससे पैदा होने वाले बच्चे विकलांग होंगे. अगर बच्चे पैदा नहीं भी होते हैं तो इस दिन संभोग करने से पुरुषों में नपुंसकता बढ़ेगी. उन्हें और भी बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.' यही उपदेश देने वाला आज खुद सेक्स स्कैंडल में फंस गया है और आश्रम में 15 साल की बच्ची के साथ रेप के आरोप में जोधपुर पुलिस की हिरासत में है. आसाराम पर गुजरात के मोटेरा के उनके आश्रम में 2008 में दो लड़कों की हुई मौत का आरोप भी है. यह और बात है कि आसाराम के मीडिया मैनेजर सुनील वानखेड़े बापू पर लगे आरापों से इंकार करते रहे हैं. सुनील के अनुसार आसाराम सेक्स के प्रति आकर्षित नहीं होते क्योंकि वह 'आम इंसान' नहीं हैं.

रॉकस्टार बाबा

अब जरा बाबा गुरमीत राम रहीम की बात कर लें जिन्होंने अपने 400 शिष्यों को नसबंदी करा लेने का निर्देश दिया था. मत ये कि इससे वे शिष्य भगवान के और करीब आएंगे. फिलहाल, वे CBI जांच का सामना कर रहे हैं. हरियाणा में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम भी वर्ष- 2002 में एक पत्रकार की हत्या कराने के आरोपों से घिरे हैं और उन पर केस चल रहा है. राम रहीम पर महिला अनुयायियों का यौन उत्पीड़न करने का भी आरोप है.

क्यों पवित्रता की बात करते हुए सेक्स से परेहज किए जाने की बात होने लगती है? क्या होता अगर कर्म और काम के बीच करीबी संबंध होता? क्या होता अगर राधे मां एक पुरुष होतीं?

शर्म की बात

सदियों से भारत में कथित आध्यात्मिकता का प्रचार करने वाले कथित लोग महिलाओं को कामुक और सेक्स स्लेव्स के रूप में देखते रहे हैं. यहां कथाओं के अनुसार अचानक सूर्य देवता के आने से महिला गर्भवती हो जाती है. या फिर महाभारत की कथा के मुताबिक वेदव्यास जैसे विद्वान साधु एक महिला के बांझपन को खत्म कर देते हैं. द्रौपदी के चीरहरण के प्रसंग द्वारा भगवान कृष्ण की उदार छवि को दिखाने की कोशिश होती है कि कैसे वह सही समय पर आकर उनकी लाज बचाते हैं.

दक्षिण भारत में देवदासियों पर उत्पीड़न सदियों से हो रहा हैं हालांकि 1988 में देवदासी परंपरा को गैरकानूनी घोषित किया जा चुका है. राष्ट्रीय महिला आयोग के हाल के एक आंकड़े के अनुसार करीब 48,358 महिलाओं को जबरन वेश्यावृत्ति की ओर जाना पड़ा है. ऐसा इसलिए क्योंकि मंदिरों ने देवदासियों की समस्याओं से मुंह मोड़ लिया. कैसे कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान देवी मां की मूर्ति के लिए मूर्ति बनाने वाले एशिया के सबसे बड़े रेड लाइट एरिया सोनागाछी से मिट्टी इकट्ठा करते हैं?

अगर हमारे धर्म में ही ऐसे उदारण हैं तो फिर हम यह मानने से क्यों इंकार करते रहते हैं कि धर्म ही महिलाओं के उत्पीड़न का बड़ा पथ प्रदर्शक है? कैसे आधे कपड़े पहना एक आदमी हमारी महिलाओं की सोच को इतनी आसानी से बदल देता है और संबंधों के दायरे को बढ़ाते हुए वैवाहिक रिश्तों पर सलाह देने लगता है. कैसे हमारा विश्वास हमें अंधा बना देता है और हम एक विपरीत सेक्स वाले इंसान की बातें मानते चले जाते हैं? भगवा या फिर सफेद कपड़े पहना एक पुजारी कैसे हमारी सोच को बदलने की कोशिश करने लगता है? कैसे वे सब हमारे झूठे मां-बाप की भूमिका निभाने लगते हैं? कैसे हमारी एक ऐसी संस्कृति जिसे देखने दुनिया भर से लोग आते हैं और उसके बदले हमें ढेरों विदेशी पूंजी मिलती है, वह असल में मोक्ष और मर्दानगी का उलझा हुआ मिश्रण है? त्याग और तंत्र का मिश्रण है, विपाषणा और वासना का मिश्रण है? जहां राधे मां जैसी महिला और आसाराम जैसे पुरुष करीब-करीब एक जैसे ही हैं...

इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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