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मगर पाकिस्तान है कि मानता नहीं

    • अभिनव राजवंश
    • Updated: 24 सितम्बर, 2017 05:45 PM
  • 24 सितम्बर, 2017 05:45 PM
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आज पाकिस्तान ने अपनी स्थिति ऐसी बना ली है कि कोई भी देश पाकिस्तान में क्रिकेट खेलने नहीं जाता. प्रतिबंधित आतंकवादी समूह के नेता खुलेआम पाकिस्तान में रैलियां करते हैं, मगर पाकिस्तान है कि मानता नहीं.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान को जम कर लताड़ लगाई. यूएन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 'हमने आईआईटी, एम्स और आईआईएम खोले. लेकिन पाकिस्तान ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन को खड़ा किया'. सुषमा ने पाकिस्तान के आरोपों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि- 'जब पाकिस्तान मानवाधिकार और आतंकवाद के मुद्दे पर बोलता है तो पूरी दुनिया कहती है कि 'देखो कौन बोल रहा है'. अंतरर्राष्ट्रीय मंच पर हुई इस धुलाई के बाद तिलमिलाए पाकिस्तान ने राइट टू रिप्लाई के तहत जवाब में कहा कि भारतीय सरकार और वहां के हुक्मरान पाकिस्तान से दुश्मनी के भाव रखते हैं. साथ ही यह भी आरोप लगाया कि भारतीय सेना कश्मीर में जुल्म ढा रही है और मासूमों पर पैलेट गन से गोलियां बरसा रही है.

बेबुनियाद आरोप लगाकर पाकिस्तान ने अपनी ही किरकिरी करा ली

वैसे यह पहला मौका नहीं है जब अंतरर्राष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर किरकिरी झेलनी पड़ी हो. मगर पाकिस्तान हर बार खुद को पाक साफ़ साबित करने कि जुगत में ही रहता है. भारत ने कई अंतरर्राष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की क्लास लगायी है. मसलन इसी साल जर्मनी में G20 सम्मेलन में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इशारों-इशारों में कहा था कि दक्षिण एशिया में एक ही देश है जो हमारे क्षेत्र के देशों में आतंक फैला रहा है. उसके बाद हाल ही में संपन्न हुए ब्रिक्स सम्मेलन में जारी संयुक्त घोषणापत्र में पाकिस्तान से ऑपरेट होने वाले लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान से चलने वाले आतंकी समूहों का जिक्र किया गया. इससे पहले 2016 के संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगायी थी.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान को जम कर लताड़ लगाई. यूएन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 'हमने आईआईटी, एम्स और आईआईएम खोले. लेकिन पाकिस्तान ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन को खड़ा किया'. सुषमा ने पाकिस्तान के आरोपों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि- 'जब पाकिस्तान मानवाधिकार और आतंकवाद के मुद्दे पर बोलता है तो पूरी दुनिया कहती है कि 'देखो कौन बोल रहा है'. अंतरर्राष्ट्रीय मंच पर हुई इस धुलाई के बाद तिलमिलाए पाकिस्तान ने राइट टू रिप्लाई के तहत जवाब में कहा कि भारतीय सरकार और वहां के हुक्मरान पाकिस्तान से दुश्मनी के भाव रखते हैं. साथ ही यह भी आरोप लगाया कि भारतीय सेना कश्मीर में जुल्म ढा रही है और मासूमों पर पैलेट गन से गोलियां बरसा रही है.

बेबुनियाद आरोप लगाकर पाकिस्तान ने अपनी ही किरकिरी करा ली

वैसे यह पहला मौका नहीं है जब अंतरर्राष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर किरकिरी झेलनी पड़ी हो. मगर पाकिस्तान हर बार खुद को पाक साफ़ साबित करने कि जुगत में ही रहता है. भारत ने कई अंतरर्राष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की क्लास लगायी है. मसलन इसी साल जर्मनी में G20 सम्मेलन में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इशारों-इशारों में कहा था कि दक्षिण एशिया में एक ही देश है जो हमारे क्षेत्र के देशों में आतंक फैला रहा है. उसके बाद हाल ही में संपन्न हुए ब्रिक्स सम्मेलन में जारी संयुक्त घोषणापत्र में पाकिस्तान से ऑपरेट होने वाले लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान से चलने वाले आतंकी समूहों का जिक्र किया गया. इससे पहले 2016 के संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगायी थी.

सुषमा स्वराज का जवाब पाकिस्तान के पास तो नहीं है

हालांकि भारत अकेला नहीं है जो पाकिस्तान पर आतंकवादी समूहों को पालने की बात करता हो. 2016 में उरी हमलों के बाद विश्व के कई देशों ने खुल कर पाकिस्तान की निन्दा की थी. पाकिस्तान में प्रस्तावित सार्क सम्मलेन से भारत के हटने के बाद अफ़गानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका ने भी आतंकवाद के मुद्दे पर ही इस सम्मलेन का बहिष्कार कर दिया था. वहीं कुछ साल पहले तक पाकिस्तान के आतंकवादी गतिविधियों पर आंख मूंदे रहने वाले अमेरिका ने भी डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद खुलकर पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है. अमेरिका ने पाकिस्तान को देने वाली भारी भरकम सहायता राशि में भी कटौती कर दी है. और हाल ही में घोषित अपनी अफ़गान नीति में भारत की बड़ी भूमिका की बात की है. जबकि आतंकवादी समूहों को समर्थन जारी रखने के लिए पाकिस्तान की कड़ी निंदा की. इससे पहले मई 2017 में रियाध में हुए एक कार्यक्रम में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को बोलने तक का मौका नहीं दिया गया. यहां तक की कार्यक्रम में उपस्थित डोनाल्ड ट्रम्प ने आतंकवाद प्रभावित देशों में पाकिस्तान का नाम तक नहीं लिया. पाकिस्तानी मीडिया में इस बात को लेकर काफी बातें भी लिखी गयी और पाकिस्तान की बड़ी बेइज्जती बताया.

आज पाकिस्तान ने अपनी स्थिति ऐसी बना ली है कि कोई भी देश पाकिस्तान में क्रिकेट खेलने नहीं जाता. प्रतिबंधित आतंकवादी समूह के नेता खुलेआम पाकिस्तान में रैलियां करते हैं, मगर पाकिस्तान है कि मानता नहीं. हालांकि पाकिस्तान शायद यह भी भूल गया है कि साल 2011 में अमेरिकी सैनिकों ने उसके घर में घुस कर दुनिया के सबसे कुख्यात आतंकवादी माने जाने वाले ओसामा बिन लादेन का खात्मा किया था. पाकिस्तान उस समय भी ओसामा के वहां छिपे होने से इंकार करता रहा था. बहरहाल अगर पाकिस्तानी सरकार चाहे तो कल के सुषमा स्वराज के भाषण से काफी कुछ सीख सकती है. और अगर कुछ का पालन भी कर ले तो शायद पाकिस्तानी आवाम की जिंदगी में भी कुछ बेहतर बदलाव आ सकते हैं.

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इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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