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कितना कारगर साबित होगा हरीश रावत का ये मुस्लिम दांव

    • राकेश चंद्र
    • Updated: 20 दिसम्बर, 2016 02:58 PM
  • 20 दिसम्बर, 2016 02:58 PM
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उत्तराखंड में मुस्लिम सरकारी कर्मचारियों को नमाज के लिए 90 मिनट की छुट्टी का ऐलान किया गया है. ऐसा है तो अब सोमवार को शिव जी, मंगलवार को हनुमानजी, और इसी तरह बाकी के दिनों में भी हिन्दू समाज को पूजा के लिए समय मिलना चाहिए.

विधानसभा चुनाव की घोषणा होने से ठीक पहले उत्तराखंड सरकार के मुखिया हरीश रावत ने ‌मुस्लिम वोट बैंक को पटाने के लिए नया दांव खेला. कैबिनेट फैसले के अनुसार सरकारी विभागों में काम कर रहे मुस्लिम समुदाय के कर्मचारियों को जुम्मे की नमाज पढ़ने के लिए शुक्रवार को 90 मिनट का अल्पकालीन अवकाश देने का ऐलान किया गया है. चुनावी माहौल में इस पर प्रतिक्रिया न हो ऐसा हो ही नहीं सकता, होना भी चाहिए, आखिर देश की सबसे पुरानी पार्टी कब तक इस प्रकार की मानसिकता से बहार निकलेगी. विपक्ष इसे आगामी विधानसभा चुनाव में भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी. दरअसल हरीश रावत ने यह फैसला सोच समझकर लिया है.

 जुम्मे की नमाज के लिए 90 मिनट का अल्पकालीन अवकाश देने का ऐलान किया गया है

क्या मुख्यमंत्री का ये अहम् फैसला अपने केंद्रीय नेतृत्व या राहुल गांधी की सलाह पर लिया गया है? अगर हां तो मुख्यमंत्री जी को अब हिंदुओं की भी सुध लेनी होगी. चुनाव सिर पर हैं, अब सोमवार को शिव, मंगलवार को हनुमानजी, और कुछ कुछ इसी तरह बाकी के दिनों में भी हिन्दू समाज को पूजा के लिए समय मिलना चाहिए.

ये भी पढ़ें- ...जब नमाज के लिए थम गया हावड़ा ब्रिज का ट्रैफिक

उत्तराखंड में अगर पिछले दस सालों की बात करें तो यहां मुस्लिमों की जनसंख्या में लगभग 14% वृद्धि हुई है. खासकर देहरादून, उधमसिंहनगर, हरिद्वार, रामनगर, काशीपुर, कोटद्वार में. उत्तराखंड की एक करोड़ से ज्यादा...

विधानसभा चुनाव की घोषणा होने से ठीक पहले उत्तराखंड सरकार के मुखिया हरीश रावत ने ‌मुस्लिम वोट बैंक को पटाने के लिए नया दांव खेला. कैबिनेट फैसले के अनुसार सरकारी विभागों में काम कर रहे मुस्लिम समुदाय के कर्मचारियों को जुम्मे की नमाज पढ़ने के लिए शुक्रवार को 90 मिनट का अल्पकालीन अवकाश देने का ऐलान किया गया है. चुनावी माहौल में इस पर प्रतिक्रिया न हो ऐसा हो ही नहीं सकता, होना भी चाहिए, आखिर देश की सबसे पुरानी पार्टी कब तक इस प्रकार की मानसिकता से बहार निकलेगी. विपक्ष इसे आगामी विधानसभा चुनाव में भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी. दरअसल हरीश रावत ने यह फैसला सोच समझकर लिया है.

 जुम्मे की नमाज के लिए 90 मिनट का अल्पकालीन अवकाश देने का ऐलान किया गया है

क्या मुख्यमंत्री का ये अहम् फैसला अपने केंद्रीय नेतृत्व या राहुल गांधी की सलाह पर लिया गया है? अगर हां तो मुख्यमंत्री जी को अब हिंदुओं की भी सुध लेनी होगी. चुनाव सिर पर हैं, अब सोमवार को शिव, मंगलवार को हनुमानजी, और कुछ कुछ इसी तरह बाकी के दिनों में भी हिन्दू समाज को पूजा के लिए समय मिलना चाहिए.

ये भी पढ़ें- ...जब नमाज के लिए थम गया हावड़ा ब्रिज का ट्रैफिक

उत्तराखंड में अगर पिछले दस सालों की बात करें तो यहां मुस्लिमों की जनसंख्या में लगभग 14% वृद्धि हुई है. खासकर देहरादून, उधमसिंहनगर, हरिद्वार, रामनगर, काशीपुर, कोटद्वार में. उत्तराखंड की एक करोड़ से ज्यादा आबादी में 83 लाख से ज्यादा आबादी हिंदू और 14 लाख से ज्यादा मुस्लिम हैं. दरअसल देहरादून, उधमसिंहनगर हरिद्वार ही ऐसे तीन जिले हैं जहां 29 विधान सभा सीटें हैं और यहीं सबसे ज्यादा मुस्लिम हैं. फिलहाल की अगर बात करें तो कांग्रेस के लिए तो ठीक दिखता है, लेकिन चुनाव के समय शायद यही फैसला कांग्रेस के लिए उल्टा न पड़ जाए.

इस घोषणा के बाद अगर पहाड़ के लोग अपने त्योहारों को लेकर आवाज उठाते हैं तो यह गलत नहीं होगा और बीजेपी भी इसका समर्थन करती हुई दिखाई देगी तो किसी को इस पर अचरज नहीं होना चाहिए. दरअसल अब पहाड़ के लोग भी अपने त्योहारों, खासकर उत्तरायणी, घृत संक्रांति(घी संक्रांति) फूल दॆहि के लिए इस प्रकार की छुट्टी की मांग रख सकते हैं.

अब बात करते हैं भारत में मुस्लिमों को इस प्रकार की सुविधाओं की तो बिहार में नीतीश सरकार भी जुलाई 2012 में इस प्रकार का सर्कुलर जारी कर चुकी हैं, जिसमें कहा गया है कि मुस्लिम शुक्रवार को इस प्रकार की सुविधा को ब्रिटिश काल (1934) से ही प्राप्त कर रहे हैं. लिहाजा समय तय किया गया 12:30 से 2:30 तक.

ये भी पढ़ें- नमाज इतनी जरूरी कि क्लास छोड़कर अदा की जाए?

भारत सरकार के विभाग (डीओपीटी) ने भी एक आरटीआई के जवाब में यह स्वीकार किया है कि भारत सरकार में कार्यरत मुस्लिम कर्मचारियों को शुक्रवार को जुम्मा नमाज अदा करने के लिए एक घंटे की छुट्टी ले सकते हैं.

ठीक चुनाव पूर्व की गयी इस घोषणा से कांग्रेस की मंशा साफ जाहिर होती है. तुष्टिकरण की इस राजनीति पर जब मैंने अपने कुछ कांग्रेसी मित्रों से बात की तो उन्होंने साफ-साफ ये कहा कि चुनाव से पहले हर राजनितिक दल इस तरह के हथकंडे अपनाते हैं. अगर बीजेपी या प्रधान मंत्री मोदी जी अगर नोटबंदी को राष्ट्रहित में लिया गया फैसला मानते हैं, तो मुख्यमंत्री हरीश रावत जी का ये फैसला कहां से राष्ट्रहित से अलग है.

इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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