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यूपी में राम मंदिर से पहले राम राज्य की जरूरत

    • बिलाल एम जाफ़री
    • Updated: 29 मई, 2017 08:13 PM
  • 29 मई, 2017 08:13 PM
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विहिप द्वारा आने वाले 22 देशों के अप्रवासी भारतियों को अयोध्या का दौरा कराया गया था और कहा गया था कि वो केंद्र सरकार पर ये दबाव बनाए कि अयोध्या में जल्द से जल्द भगवान श्री राम के एक भव्य मंदिर का निर्माण हो.

2017 में 14 साल का वनवास पूरा कर उत्तर प्रदेश में वापसी करती भाजपा और बतौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देखकर. देश के लोगों को पूरा यकीन हो गया था कि अब अयोध्या में राम लला का मंदिर बन जायगा. राम मंदिर का मामला न्यायपालिका में है और चुनाव बाद ये मामला हमेशा की तरह ठंडे बसते में रख दिया गया है. कहा जा सकता है कि हालिया सूरत में न प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस पर गंभीर दिख रहे हैं न ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ.

केंद्र से लेके राज्य तक सबके नर्म रवैये को देखते हुए राममंदिर निर्माण की महत्वपूर्व जिम्मेदारी विश्व हिन्दू परिषद ने सदैव की तरह अपने कन्धों पर उठा ली है.

ज्ञात हो कि अभी कुछ दिनों पूर्व 22 देशों में रह रहे अप्रवासी भारतियों के एक दल से विहिप ने मुलाकात की थी. विहिप द्वारा आने वाले 22 देशों के अप्रवासी भारतियों को अयोध्या का दौरा कराया गया था और कहा गया था कि वो केंद्र सरकार पर ये दबाव बनाए कि अयोध्या में जल्द से जल्द भगवान श्री राम के एक भव्य मंदिर का निर्माण हो.

भगवान श्री राम और उनका भव्य मंदिर लोगों की आस्था का अहम बिंदु है जिसका निर्माण तमाम कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अपने निश्चित समय पर अवश्य होना चाहिए. मगर प्रश्न ये उठता है कि क्या वाकई एक ऐसे राज्य को राममंदिर की आवश्यकता है जहाँ राम राज्य की कल्पना ही नहीं की जा सकती.

वर्तमान में उत्तर प्रदेश के जो हालात हैं उनके मद्देनज़र यही कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा है. 1950 में गोविन्द बल्लभ पंत के मुख्यमंत्री बनने से लेकर 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने तक उत्तर प्रदेश में ज्यादा कुछ नहीं बदला है.

प्रदेश आज भी शिक्षा, सुरक्षा, बेहतर चिकित्सा सेवाओं के आभाव में जीवन यापन कर रहा है. रोजगार के लिए प्रदेश के युवा...

2017 में 14 साल का वनवास पूरा कर उत्तर प्रदेश में वापसी करती भाजपा और बतौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देखकर. देश के लोगों को पूरा यकीन हो गया था कि अब अयोध्या में राम लला का मंदिर बन जायगा. राम मंदिर का मामला न्यायपालिका में है और चुनाव बाद ये मामला हमेशा की तरह ठंडे बसते में रख दिया गया है. कहा जा सकता है कि हालिया सूरत में न प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस पर गंभीर दिख रहे हैं न ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ.

केंद्र से लेके राज्य तक सबके नर्म रवैये को देखते हुए राममंदिर निर्माण की महत्वपूर्व जिम्मेदारी विश्व हिन्दू परिषद ने सदैव की तरह अपने कन्धों पर उठा ली है.

ज्ञात हो कि अभी कुछ दिनों पूर्व 22 देशों में रह रहे अप्रवासी भारतियों के एक दल से विहिप ने मुलाकात की थी. विहिप द्वारा आने वाले 22 देशों के अप्रवासी भारतियों को अयोध्या का दौरा कराया गया था और कहा गया था कि वो केंद्र सरकार पर ये दबाव बनाए कि अयोध्या में जल्द से जल्द भगवान श्री राम के एक भव्य मंदिर का निर्माण हो.

भगवान श्री राम और उनका भव्य मंदिर लोगों की आस्था का अहम बिंदु है जिसका निर्माण तमाम कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अपने निश्चित समय पर अवश्य होना चाहिए. मगर प्रश्न ये उठता है कि क्या वाकई एक ऐसे राज्य को राममंदिर की आवश्यकता है जहाँ राम राज्य की कल्पना ही नहीं की जा सकती.

वर्तमान में उत्तर प्रदेश के जो हालात हैं उनके मद्देनज़र यही कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा है. 1950 में गोविन्द बल्लभ पंत के मुख्यमंत्री बनने से लेकर 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने तक उत्तर प्रदेश में ज्यादा कुछ नहीं बदला है.

प्रदेश आज भी शिक्षा, सुरक्षा, बेहतर चिकित्सा सेवाओं के आभाव में जीवन यापन कर रहा है. रोजगार के लिए प्रदेश के युवा दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं. योगी आदित्यनाथ जैसे कर्मठ और लोकप्रिय नेता के राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बावजूद प्रदेश में अपराध पिछली सरकार के मुकाबले अपने चरम पर है. न तो आज प्रदेश में महिलाएं ही सुरक्षित हैं न स्वयं पुलिस. ऐसे में राममंदिर या बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण की बात इस ओर साफ इशारा कर रही है कि विकास की अपेक्षा धर्म आज भी लोगों के बीच प्रमुख मुद्दा है और यूपी जैसे राज्य में हमेशा इसे ही प्राथमिकता दी जायगी.

प्रदेश में भगवान श्री राम के भव्य मंदिर का निर्माण अवश्य होना चाहिए मगर उससे पहले राज्य के अलावा केंद्र को इस बात पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए कि प्रदेश में लोग सुरक्षित रह सकें और उन्हें हर वो बुनियादी सुविधा मिल सके जिसका वादा सरकारों द्वारा उनके मेनिफेस्टो में किया जाता है.  

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इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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