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ऐसे हुआ सबसे खौफनाक सैन्य ऑपरेशन का फैसला

    • आईचौक
    • Updated: 06 जून, 2018 12:58 PM
  • 05 जून, 2015 10:54 AM
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आख‍िरी समय पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी शांति की अपील कर रही थीं. लेकिन जिस तरह से हालात बदल रहे थे, समझा जा सकता था कि वे आतंकवाद खत्म करने के लिए कोई बड़ा फैसला ले चुकी हैं.

पंजाब जैसे खुशहाल राज्य में तीन साल के खूनी संघर्ष से इंदिरा गांधी परेशान हो उठी थीं. जरनैल सिंह भिंडरावाले के हत्यारे स्क्वॉड बेखौफ हत्याएं कर रहे थे. इंदिरा आखिर उस निष्कर्ष पर पहुंचीं, जहां उन जैसा कोई दिलेर ही पहुंच सकता था. उन्होंने ऑपरेशन ब्लू स्टार के लिए हरी झंडी दे दी. देश ही नहीं, उस समय दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे अहम आतंकवाद विरोधी अभियान. वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता ने अपनी रिपोर्टिंग में इस फैसले तक पहुंचने के हर बिंदु को कवर किया, जो कि एक प्रशासनिक सीक्रेट की तरह है.

चंद दिनों में ही हो गई थी ऑपरेशन ब्लू स्टार की तैयारी:

- मई के आखिरी दिनों में देहरादून के नजदीक चकराता में सेना के कमांडो ने स्वर्ण मंदिर की ही तरह एक नकली ढांचा बनाकर एक्शन का रिहर्सल किया. अब तक उन्हें किसी तरह का आदेश नहीं था कि उन्हें कहां और किस मिशन पर जाना है.

- पंजाब में उग्रवादियों ने खूनखराबा तेज किया तो इधर दिल्ली में सैन्य अफसरों के साथ इंदिरा गांधी की बैठकें बढ़ गईं.

- राष्ट्रपति जैल सिंह ने उत्तर-पूर्व राज्यों का अपना दौरा निरस्त कर दिया. आर्मी चीफ जनरल एएस वैद्य को श्रीनगर से बुलवा लिया गया.

- और वो दिन आ गया. 30 मई को मेरठ से सेना के दस्ते गोपनीय ढंग से अमृतसर और पंजाब के अन्य प्रमुख शहरों की रवाना हुए.

- पहले से तैनात अर्धसैनिक बलों ने स्वर्ण मंदिर के आसपास घेरा बना लिया था. उग्रवादियों ने उन पर फायरिंग शुरू की. जो कई घंटों चली. इस फायरिंग से उग्रवादियों के असले, उनकी पोजिशन और संख्या की अहम जानकारी सेना को हासिल हुई.

- 1 जून की रात 9 बजे कर्फ्यू लगा दिया गया. चौबीस घंटे के भीतर करीब 70 हजार सैन्य अफसर और जवान पंजाब में सभी संवेदनशील स्थानों पर मौजूद थे. जो राज्य के गांवों से जुड़ी सड़कों पर भी नजर रख रहे थे.

- घटनाक्रम तेजी से बदल रहे थे. 2 जून...

पंजाब जैसे खुशहाल राज्य में तीन साल के खूनी संघर्ष से इंदिरा गांधी परेशान हो उठी थीं. जरनैल सिंह भिंडरावाले के हत्यारे स्क्वॉड बेखौफ हत्याएं कर रहे थे. इंदिरा आखिर उस निष्कर्ष पर पहुंचीं, जहां उन जैसा कोई दिलेर ही पहुंच सकता था. उन्होंने ऑपरेशन ब्लू स्टार के लिए हरी झंडी दे दी. देश ही नहीं, उस समय दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे अहम आतंकवाद विरोधी अभियान. वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता ने अपनी रिपोर्टिंग में इस फैसले तक पहुंचने के हर बिंदु को कवर किया, जो कि एक प्रशासनिक सीक्रेट की तरह है.

चंद दिनों में ही हो गई थी ऑपरेशन ब्लू स्टार की तैयारी:

- मई के आखिरी दिनों में देहरादून के नजदीक चकराता में सेना के कमांडो ने स्वर्ण मंदिर की ही तरह एक नकली ढांचा बनाकर एक्शन का रिहर्सल किया. अब तक उन्हें किसी तरह का आदेश नहीं था कि उन्हें कहां और किस मिशन पर जाना है.

- पंजाब में उग्रवादियों ने खूनखराबा तेज किया तो इधर दिल्ली में सैन्य अफसरों के साथ इंदिरा गांधी की बैठकें बढ़ गईं.

- राष्ट्रपति जैल सिंह ने उत्तर-पूर्व राज्यों का अपना दौरा निरस्त कर दिया. आर्मी चीफ जनरल एएस वैद्य को श्रीनगर से बुलवा लिया गया.

- और वो दिन आ गया. 30 मई को मेरठ से सेना के दस्ते गोपनीय ढंग से अमृतसर और पंजाब के अन्य प्रमुख शहरों की रवाना हुए.

- पहले से तैनात अर्धसैनिक बलों ने स्वर्ण मंदिर के आसपास घेरा बना लिया था. उग्रवादियों ने उन पर फायरिंग शुरू की. जो कई घंटों चली. इस फायरिंग से उग्रवादियों के असले, उनकी पोजिशन और संख्या की अहम जानकारी सेना को हासिल हुई.

- 1 जून की रात 9 बजे कर्फ्यू लगा दिया गया. चौबीस घंटे के भीतर करीब 70 हजार सैन्य अफसर और जवान पंजाब में सभी संवेदनशील स्थानों पर मौजूद थे. जो राज्य के गांवों से जुड़ी सड़कों पर भी नजर रख रहे थे.

- घटनाक्रम तेजी से बदल रहे थे. 2 जून की शाम इंदिरा गांधी ने रेडियो पर राष्ट्र के नाम संदेश जारी किया. श्रीमती गांधी ने कहा-"सरकार राज्य में आतंकवाद और हिंसा को खत्म करके ही रहेगी. मैं अकाली नेताओं से अपील करती हूं वे अनाज की आवाजाही को रोकने वाला अपना आंदोलन को निरस्त कर दें." उन्होंने पंजाब समस्या के हल का फ्रेमवर्क भी पेश किया और अकाली नेताओं से कहा कि वे उसे स्वीकार कर लें.

- लेकिन, लगता था कि फैसला कर लिया गया था. सरकार के कदमों से इशारा मिलने लगा था. विदेशियों का पंजाब में प्रवेश रोक दिया गया. राज्यपाल ने केंद्र से आर्मी को भेजने की औपचारिक मांग की. मीडिया पर पाबंदी लगा दी गई. राज्य की रेल, रोड और हवाई सेवाएं रद्द कर दी गईं. सभी संचार सेवाएं ठप कर दी गईं.

- लेफ्टिनेंट रंजीत सिंह दयाल, एक सिख, वेस्टर्न कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ को पंजाब के राज्यपाल का सिक्योरिटी एडवाइजर बनाकर भेजा गया.

- उधर, बिहार रेजिमेंट की 12वीं बटालियन ने स्वर्ण मंदिर के आसपास के हालात का जायजा लिया. ऑटोमैटिक राइफल और लाइट मशीन गन से लैस जवानों ने CRPF और BSF के जवानों द्वारा बनाए गए बंकरों में पोजिशन ले ली. कुछ ही समय में सेना अमृतसर की गलियों और स्वर्ण मंदिर के आसपास घरों की छत पर मौजूद थी. उसके बाद जो हुआ, वह इतिहास का हिस्सा है.

इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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