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Updated: 24 फरवरी, 2017 07:23 PM
सरवत फातिमा
सरवत फातिमा
  @ashi.fatima.75
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संस्कृति ब्रिगेड का सबसे ज्यादा शिकार अगर कोई बनता है तो वो बॉलीवुड अभिनेत्रियां हैं. उनके पहनने, कुछ बोलने या सांस लेने के तरीके पर भी लोग माइक्रोस्कोप लगाकर नजर रखे हुए होते हैं. अभिनेत्रियां कुछ करें ना करें लोगों की बदतमीजी का निशाना वो बनती ही हैं.

इस लिस्ट में लेटेस्ट नाम अभिनेत्री दिशा पटानी का है. हाल ही में हुए जियो फिल्मफेयर अवार्ड शो में दिशा पटानी ने ब्लैक कलर की ड्रेस पहनी थी. इसकी फोटो उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपने फैंस के साथ भी शेयर की. ड्रेस थोड़ी रिवीलिंग थी सो इसने आग भी लगा दी. फैंस के दिलों में आग लगी तो संस्कार के ठेकेदारों के दिमाग में आग लग गई. बस फोटो पोस्ट करने की देर थी. कमेंट की बहार आने में देर नहीं लगी, ना ही संस्कृति का ज्ञान देने में.

disha-insta_022417062451.jpgदिशा पटानी ने दे दी पटखनीसंस्कृति के एक ठेकेदार ने दिशा की इस फोटो पर लिखा- 'तुम एक वेश्या की तरह लग रही हो. हम समझ गए कि तुमने स्तनों का ऑपरेशन कराया है, इसे सरेआम दिखाने की जरुरत नहीं है.' दिशा पटानी के ड्रेस पर ये बवाल यहीं खत्म नहीं हुआ. उन्हें संस्कार की शिक्षा देने वाले कमेंट्स आने का सिलसिला अभी तक बरकरार है.

खैर दिशा ने भी इन लोगों को ऐसा करारा जवाब दिया जिसकी इन्होंने सपने में भी उम्मीद नहीं की होगी. इंस्टाग्राम पर ही दिशा ने अपने 'शुभचिंतकों' को जोर का थप्पड़ जोर से ही मारा. उन्होंने हर उस इंसान को धो डाला जो महिलाओं के अपनी मर्जी के कपड़े पहनने, अपनी मर्जी से रहने या फिर खाने-पीने पर भी भौंहे तरेरने लगते हैं.

दिशा ने लिखा- 'कोई भी औरत कितना अपने बदन को ढंक के रखती है इस स्केल पर उसे जज करना बहुत आसान है. लेकिन खुद की गिरेबां में झांकना उतना ही मुश्किल है. आप महिलाओं के कपड़ों के भीतर तक घुसकर उन्हें चीरते रहें तो ठीक. औरतों के जिन हिस्सों को ढंककर रखने की लोग सलाह देते हैं, अपनी नज़रें उसपर से हटा पाने में वो खुद को असमर्थ पाते हैं.'

दिशा यहीं नहीं रुकीं. आगे लिखती हैं- 'अब समय आ गया है जब आप लोग जाग जाएं. साथ ही इस बात को स्वीकार कर लें कि हम अब किसी और के 'भारतीय लड़की' के इमेज को ढोने वाले नहीं हैं. आप अपने कुंठाओं के कारण किसी और की ज़िंदगी को बर्बाद ना करें तो ही अच्छा होगा. ये दोगलापन बंद करें और अपने दिमाग की खिड़कियां खोलें.'

ये बात हमें तो समझ आ गई. आशा करते हैं कि औरों को भी समझ आ गई होगी. अब समय आ गया है जब लोगों को अपने 'इंडियन गर्ल' 'भारतीय औरत' के अपने ख्यालों को अपने तक ही रखना चाहिए. किसी को भी औरतों के अपने लिए किए गए निर्णयों पर सवाल उठाने का कोई हक नहीं है. औरतें इंडिपेंडेंट हैं और खुद के निर्णय लेने में समर्थ हैं.

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लेखक

सरवत फातिमा सरवत फातिमा @ashi.fatima.75

लेखक इंडिया टुडे में पत्रकार हैं

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