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सियासत

 |  5-मिनट में पढ़ें  |   17-02-2017

अमेठी में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच चल रहे फ्रेंडली मैच ने सस्पेंस बना रखा था. कांग्रेस ने ये संकेत जरूर दे रखा था कि प्रियंका गांधी और कहीं नहीं तो अमेठी और रायबरेली में हमेशा की तरह चुनाव प्रचार करेंगी. मगर जिस तरह से अमेठी की कई सीटों पर दो दलों के उम्मीदवार डटे हुए थे, उससे ये आशंका बढ़ गयी थी कि प्रियंका कहीं चुनाव प्रचार से दूरी न बना लें.

सारा सस्पेंस उस वक्त खत्म हो गया जब प्रियंका गांधी वाड्रा अपने भाई राहुल गांधी के साथ रायबरेली पहुंचीं. ऑफ द रिकॉर्ड ही सही बीजेपी के नेता चाहें तो दावा कर सकते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रियंका गांधी को चुनाव प्रचार के लिए मैदान में उतरने के लिए मजबूर कर दिया.

पहले लालू ने लपका

लगता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकल कनेक्शन स्ट्रैटेजी का वही हाल हुआ जिसे क्रिकेट में हिट विकेट या फुटबॉल में सेल्फ गोल कहते हैं. यूपी विधानसभा चुनाव में भी मोदी ने लोगों से कनेक्ट होने के लिए वही तरीका अपनाया जो लोक सभा चुनाव में कामयाब रहा था. कांग्रेस तो पहले से ही ताक में थी. कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बहुत पहले ही सारी तैयारियां कर ली थीं. हरदोई की रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने जब ये मौका दे दिया तो कांग्रेस नेता रन आउट करने के लिए दौड़ पड़े.

priyanka-rahul_650_021717064424.jpgरायबरेली की रस्म निभाने पहुंची प्रियंका गांधी

रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था - "यूपी ने मुझे गोद लिया है. यूपी मेरा माईबाप है. मैं माईबाप को नहीं छोडूंगा. मैं भले ही गोद लिया हूं, लेकिन यूपी की चिंता है मुझे... यहां की स्थिति बदलना मेरा कर्तव्य है. इस कर्तव्य को निभाने के लिए मुझे लोगों का आशीर्वाद चाहिए."

प्रधानमंत्री की इस बात मजाक उड़ाने वालों में लालू प्रसाद सबसे आगे रहे. लालू ने ट्वीट कर कहा - "गजब है रे भाई... इतना मत हंसाओ!"

चुनाव प्रचार के सिलसिले में रायबरेली पहुंचे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल ने भी प्रधानमंत्री मोदी को उनके बयान के लिए टारगेट किया. मोदी ये नसीहत देते हुए कि रिश्ते बोलने से नहीं निभाने से बनते हैं, राहुल गांधी ने कहा, "प्रधानमंत्री ने मां गंगा से किए वादे पूरे नहीं किए, वह वादे करते हैं लेकिन निभाते नहीं हैं."

असल में लोक सभा चुनाव के वक्त मोदी ने कहा था कि उन्हें न तो किसी ने भेजा है न वो खुद आये हैं बल्कि उन्हें तो मां गंगा ने बुलाया है. इसी बात को आगे बढ़ाते हुए मोदी ने खुद को यूपी का गोद लिया हुआ बेटा बताया था. मोदी का ये बयान तो जैसे कांग्रेस के लिए मुंह मांगी मुराद ही बन गया.

'यूपी के लड़के बनाम बाहरी मोदी'

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन में भी प्रियंका गांधी का अहम रोल रहा. बल्कि, बताया ऐसे गया कि प्रियंका गांधी ने ही इसे अमली जामा पहनाया.

गठबंधन के बाद चुनावी मुहिम के लिए प्रशांत किशोर की टीम ने कई स्लोगन बनाये थे जिनमें सबसे ज्यादा उछला - यूपी को ये साथ पसंद है. इसके साथ ही लोगों को यूपी की जंग को स्थानीय बनाम बाहरी की लड़ाई समझाने की भी तैयारी की गयी. प्रशांत किशोर ने बिहार में भी ऐसा ही प्रयोग किया था. उस वक्त भी जैसे ही मोदी ने नीतीश के डीएनए में खोट बताई, नीतीश पक्ष पूरे लाव लश्कर के साथ मोदी पर टूट पड़ा. यहां तक की पटना के गांधी मैदान में स्वाभिमान रैली भी बुलाई गयी.

यूपी में ऐसा प्रयोग करने से कांग्रेस नेता हिचक रहे थे. मोदी की लोकप्रियता और वाराणसी से उनके सांसद होने के चलते उन्हें डर था कि कहीं दांव उल्टा न पड़ जाये. बहरहाल, वो घड़ी आ ही गयी जिसकी प्रशांत किशोर और उनकी टीम को बेसब्री से प्रतिक्षा रही.

रायबरेली में प्रियंका ने जिक्र तो नोटबंदी का भी किया और उसे महिलाओं पर अत्याचार से जोड़ दिया. प्रियंका ने पूछा - जब रात को बैंकों की लाइन में खड़ा किया गया वो अत्याचार नहीं था महिलाओं के लिए?

लेकिन प्रियंका का पूरा जोर यूपी चुनाव को नया रंग देने की रही - 'यूपी के लड़के बनाम बाहरी मोदी'.

modi-rally_650_021717065828.jpg"गोद लिया ही सही..."

प्रियंका बोलीं, "क्या उत्तर प्रदेश को बाहर से किसी को गोद लेने की जरूरत है. क्या यहां कोई नौजवान नहीं है जो अपने प्रदेश को आगे बढ़ा सके, विकास ला सके. आपके दो नौजवान हैं राहुल जी और अखिलेश जी जो आज आपके सामने आए हैं. वो इसी मिट्टी के पले-बढ़े हैं. उन्होंने आपका प्रतिनिधित्व किया है. उनके दिल में उत्तर प्रदेश है, उनकी जान में उत्तर प्रदेश है.

बात को आगे बढ़ाते हुए इसी बिना पर प्रियंका ने गठबंधन को जिताने की अपील की - "यूपी को किसी बाहरी नेता की जरूरत नहीं है. यहां का एक-एक नौजवान नेता बन सकता है. यहां का एक-एक नौजवान इस प्रदेश का नया निर्माण करेगा, नया विकास करेगा, नया उत्थान करेगा ये मेरी आशा है, यही राहुल जी की आशा है. आप सब इकट्ठा काम करें गठबंधन को आगे बढ़ाएं, जिताएं."

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लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkiesindia

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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