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सियासत

 |  3-मिनट में पढ़ें  |   18-09-2017
अमित अरोड़ा
अमित अरोड़ा
  @amit.arora.986
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एक साल पहले चार जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के उड़ी में भारतीय सेना के शिविर पर हमला किया था. इस हमले में भारत के 18 जवान शहीद हो गए थे. 10 दिन बाद भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक कर इस हमले का बदला सूद समेत ले लिया. सर्जिकल स्ट्राइक के बाद कई विश्लेषकों को यह उम्मीद थी की अब पाकिस्तान आतंकी हमले करने से डरेगा. कई लोगों ने कश्मीर में शांति का माहौल बनने की आशा की थी. लेकिन पाकिस्तान से शांति की उम्मीद करने का कोई अर्थ नहीं है.

पिछले एक साल में कश्मीर में पुलिस और सुरक्षा बलों पर अनेक आतंकी हमले हुए. पाकिस्तान ने कई बार अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी करके संघर्ष-विराम का उल्लंघन किया. हालांकि भारतीय सुरक्षा बलों ने संघर्ष-विराम उल्लंघन और सभी आतंकी हमलों का मुंह तोड़ जवाब दिया. कई ख़ूंखार आतंकवादियों का सफाया भी किया. हुर्रियत के नेता, जिन पर पाकिस्तान से गैर क़ानूनी तौर से पैसे लेने का आरोप लगे है उन पर एनआइए कर्रवाही भी कर रहा है. इन सब के बावजूद पाकिस्तान की नीति और हरकतों में कोई बदलाव नहीं है.

Uri Attack, pakistanपाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आने वाला

इस परिस्थिति में भारत को पाकिस्तान के विरुद्ध क्या नीति अपनानी चाहिए?

पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद तब तक ख़त्म नहीं होगा, जब तक पाकिस्तान ख़त्म नहीं होगा. न केवल कश्मीर, बल्कि भारत में शांति के लिए पाकिस्तान नामक देश का अंत आवश्यक है. जैसे पुराने पूर्व पाकिस्तान (आज के बांग्लादेश) में पश्चिमी पाकिस्तान के हुक्मरान अत्याचार करते थे, वैसे ही कृत्य आज पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान में कर रही है. बलूचिस्तान के नागरिकों पर बेतहाशा अत्याचार हो रहे हैं. बलूचिस्तान के लोग, पाकिस्तानी सेना और वहां की सरकार से त्रस्त हो चुके हैं.

इतिहास के अनुसार भी बलूचिस्तान कभी पाकिस्तान का हिस्सा नहीं था. बलूचिस्तान पर पाकिस्तान ने धोखे से क़ब्ज़ा किया था, जो अब तक कायम है. इसी तरह सिंध में भी पाकिस्तान से आज़ादी की आवाज़ें उठ रही है. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लोग अपने आप को पाकिस्तान का असली मालिक समझते हैं. बलूचिस्तान, सिंध, नॉर्थ-वेस्ट फ्रंटियर प्रॉविन्स के लोगों को पाकिस्तान का पंजाब प्रांत, निम्न श्रेणी का समझता है.

Uri Attack, pakistanपाकिस्तान को सबक सिखाने का वक्त आ गया है

भारत को बलूचिस्तान, सिंध, नॉर्थ-वेस्ट फ्रंटियर प्रॉविन्स में हो रहे मानवाधिकार के हनन को ज़ोर-शोर से विश्व पटल पर उठना चाहिए. यदि दुनिया फ़िलिस्तीन में इजराइल द्वारा हो रहे कथित अत्याचार को मुद्दा बना सकती है, तो भारत-बलूचिस्तान, सिंध के लोगों की समस्या को दुनिया के सामने क्यों नहीं रख सकता है? मानवाधिकार की बात करना और पाकिस्तान के पाप को उजागर करना कहीं से ग़लत नहीं है.

बलूचिस्तान, सिंध के लोगों को भारत की आर्थिक या सैनिक मदद नहीं चाहिए. उन्हे सिर्फ़ नैतिक सहयोग की ज़रूरत है. यदि उन्हें भारत का नैतिक सहयोग मिल जाए, तो बाकी का काम पाकिस्तान की चरमराती अर्थव्यवस्था और अंदरूनी कलह अपने आप कर देगी. भारत के लिए यह रणनीति ही सबसे सटीक है, उसके अलावा सारे प्रयास विफल ही होंगे.

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लेखक

अमित अरोड़ा अमित अरोड़ा @amit.arora.986

लेखक पत्रकार हैं और राजनीति की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं.

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