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Updated: 20 नवम्बर, 2022 04:22 PM
ज्योति गुप्ता
ज्योति गुप्ता
  @jyoti.gupta.01
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रीना और राहुल कॉलेज में साथ पढ़ते थे. दोनों के बीच दोस्ती हुई जो आगे चलकर प्यार में बदल गई. कॉलेज खत्म हुआ दोनों करियर बनाने में जुट गए. कुछ सालों तक वे लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में रहे. इसके बाद संयोग से दोनों की जॉब एक ही शहर में लग गई. दोनों ने सोचा कि अलग-अलग रहने से अच्छा क्यों ना साथ में रहा जाए. दोनों दो सालों तक साथ रहे. इस दौरान उन्हें एक-दूसरे को समझने का मौका मिला. वे समझ गए कि वे पूरी जिंदगी साथ में बिता सकते हैं फिर उन्होंने शादी कर ली. अब वे एक खुशहाल कपल हैं. रीना और राहुल ने भी घरवालों को बताकर लिव इन नहीं ही चुना होगा. लेकिन दो साल, दो महीने, दो हफ्ते या महज दो दिन भी किसी को समझने के लिए पर्याप्त होते हैं. यह समझने के लिए कि आप साथ में जीवन गुजार सकते हैं या नहीं. 

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दूसरी ओर श्रद्धावॉकर (Shraddha Walker) मां-बाप से लड़कर आफताब अमीन पूनावाला (Aftab Amin Poonawalla) के साथ जाकर लिवइन में रहने लगी. उसने पहले ही माता पिता को बता दिया. उसका अंजाम क्या हुआ वह हम सभी को पता है. कई लोग श्रद्धा की मौत का कारण अपने माता-पिता की बात न मानना और लिवइन में रहना बता रहे हैं. जबकि आफताब उससे शादी भी कर लेता तो क्या गारंटी दी जा सकती है कि श्रद्धा की हत्या नहीं होती? आखिर कोई पार्टनर आगे चलकर हमारे साथ कैसा व्यवहार करेगा, इसकी गारंटी किसके पास है? जिसका जैसा नेचर है वैसा ही रहेगा. ऐसा भी नहीं है कि शादीशुदा महिलाएं पति के हाथों प्रताड़ित नहीं होतीं या फिर लिवइन में रहने वाली खुश नहीं हैं. फिर किसी रिश्ते की कंडीशन को किस तरह से सही या गलत बताया जा सकता है?

लेकिन, सालों साथ रहने के बाद चीजों को भुगतते हुए भी कोई श्रद्धा उससे निकलने की कोशिश नहीं करती तो क्या ही कहा जाए. पिता से बगावत करने वाली श्रद्धा सक्षम थी चीजों से लड़ने के लिए. उससे अपने समाज और परिवार में भी लौटना नहीं पड़ता.

श्रद्दा भी शादी की आस लिए ही आफताब के पास गई होगी, सपने देखें होंगे मगर...चाहें शादी हो, लिवइन हो या रिलेशनशिप, सामने वाले पर हम सिर्फ आंख मूंदकर भरोसा ही करते हैं. हम उसकी गांरटी तो नहीं दे सकते. ये रिश्ते ऐसे होते हैं जहां कोई काजगी कार्रवाई काम नहीं आती. कसमें वादे काम नहीं आते हैं. सिर्फ हमें सामने वाले की उम्मीद पर उसके साथ चलना होता है. मगर श्रद्धा आफताब के साथ नहीं उसके पीछे-पीछे चल रही थी. वह खुद को आज के जमाने की लड़की कहती थी मगर आफताब के मामले में वह अपना कदम पीछे कर लेती थी. उसे लगता था कि आफताब एक दिन सुधर जाएगा. हमारे यहां बिगड़े लड़कों को सुधारने के लिए उनकी शादी कराने का चलन भी तो है. श्रद्धा को समझना चाहिए था कि शादी के बाद ऐसा क्या बदल जाएगा जो लिव में नहीं है. उसे आफताब पर शक होने लगा था इसलिए वह उसपर शादी करने का दबाव बना रही थी, मगर उसे नहीं पता था कि उसके लिवइन कहानी का अंत इतना खौफनाक भी होगा. उसने कल्पना की होती, साहस जुटाया होता तो आज वह जिंदा होती.

कानून के अनुसार, लड़के-लड़कियां अपनी मर्जी से लिवइन में रह सकते हैं. लिव इन में रहने वाली महिलाओं को शादीशुदा महिलाओं की तरह कई अधिकार भी मिलते हैं. जिसमें घरेलू हिंसा और सपंत्ति का अधिकार तक शामिल है. इतना तो हम सभी को पता है कि शादी हो जाने भर से महिलाओं की परेशानी खत्म नहीं हो जाती.

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण रिपोर्ट-5 (NFHS) के अनुसार भारत में करीब 32 प्रतिशतल विवाहित महिलाएं शारीरिक, यौन या भावनात्मक हिंसा का समाना करती हैं. वहीं 30 प्रतिशत महिलाएं शारीरिक हिंसा झेलती हैं.

लिव इन और शादी में अंतर-

लिव इन में पार्टनर आपके साथ कबतक रहेगा उसकी कोई गारंटी नहीं है. ऐसे में अगर रिश्ते में तनाव हो जाए तो सुलह होना थोड़ा मुश्किल होता है. ऊपर से लिवइन के लिए शायद ही किसी परिवार की रजामंदी मिलती है. इसलिए इनसिक्योरिटी बनी रहती है. टेंशन बढ़ती है. कई तरह का कानूनी अधिकार नहीं मिलता.

जबकि शादी के बाद एक-दूसरे पर अधिकार रहता है. एक-दूसरे के लिए जिम्मेदारिया बढ़ जाती है. समाज परिवार के लोगों का हस्तक्षेप रहता है. नोंक-झोक की सुलह आसानी से हो जाती है. शादी तोड़नी है तो तलाक लेना पड़ता है. हालांकि आज की युवा पीढ़ी को लिव इन में रहने से कोई परेशानी नहीं है. वे इसे अपनी आजादी से जोड़कर देखते हैं. महिला को हर तरह के कानूनी अधिकार मिलते हैं.

अब घर के बच्चे बाहर पढ़ने कॉलेज जाएंगे, नौकरी करने जाएंगे. ऐसे में हम उन्हें प्यार करने से नहीं रोक सकते, किसी के साथ रहने से रोक नहीं सकते. मगर गार्जियन होने के नाते मन में हमेशा यह डर तो बना ही रहता है कि वे कहीं कोई गलत कदम न उठा लें. तो जो कपल लिवइन में रहने जा रहे हैं पहले ही सारी बातों को साफ कर लें. लिवइन पार्टनर के बारे में घरवालों को बताएं और उनसे संपर्क में रहें. पहले पार्टनर को अच्छी तरह समझ लें, उसके बारे में जानकारी जुटा लें...जल्दीबाजी ना करें. आज के युवाओं के पहली नजर में प्यार हो जाती है और दूसरी नजर में ब्रेकअप. एक पल में जिस पर वे जान लुटाने की बात करते हैं दूसरे पल में वह उनका दुश्मन बन जाते हैं.

कनिष्का सोनी, Shraddha murder case, Shraddha Walker, Shraddha Walker murder case, Aftab Amin Poonawalla, Delhi murder, Live In Relationship is good or bad people debate  after Shraddha murder caseकनिष्का ने कहा है कि, मैं श्रद्दा की कहानी से खुद को रिलेट कर पा रही हूं

असल में 'दीया और बाती हम' शो की अभिनेत्री कनिष्का सोनी को श्रद्धा का हाल जानकर अपनी बीती कहानी याद आ गई है कि कैसे वह भी एक ऐसे इंसान के चुंगल में फंस चुकी थीं. उन्होंने आजतक से बताया है कि कैसे वह अफताब की तरह सोच रखने वाले इंसान से भागकर बच निकली थीं.

कनिष्का ने कहा है कि, "मैं श्रद्धा की कहानी से खुद को रिलेट कर पा रही हूं. उसने मुझे प्रजोज करके शादी की बात कही थी. मैं उसके साथ रिलेशनशिप में रही. मेरा अधिकतर समय उसके घर पर बीतता था. वह बात-बात पर गुस्सा होकर भड़क जाता था. वह शराब पीने का आदि था. मुझे लगा शादी के बाद सुधर जाएगा. वह मुझसे लिवइन में रहने को कहता था मगर ऐसा नहीं हुआ क्योंकि मेरे यहां इसकी परमिशन नहीं है. मैं खुद भी लिवइन के फेवर में नहीं हूं. मुझे लगता था वो मुझसे शादी करेगा मगर...एक दिन मैंने पूछा कि हम कब शादी करेंगे. उसे मेरे सवाल पर गुस्सा आ गया. उसने उस रात मुझे बहुत मारा. मुझे लगता था कि वह मुझे कभी भी मार सकता है. मैंने अपना कुछ सामान पैक किया और उसके घर से भाग निकली."

अब आप बताइए कि लिवइन में रहना सही है या गलत? और चौकन्ना कहां रहना है. एक बात समाज और परिवारों के लिए भी बहुत जरूरी है. अगर कोई लड़की प्रताड़ित है आपको पता चलता है तो उसे वापसी का मौका और भरोसा दीजिए. उसे अपना लीजिए...उन्हें एससास कराइए कि कोई बात नहीं बेटा जिंदगी खत्म नहीं हुई, एक नई शुरुआत तेरा इंतजार कर रही है.

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लेखक

ज्योति गुप्ता ज्योति गुप्ता @jyoti.gupta.01

लेखक इंडिया टुडे डि़जिटल में पत्रकार हैं. जिन्हें महिला और सामाजिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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