अब मान लीजिए, मोदी भी हैं इस्लाम के प्रशंसक
'कुरान में 800 बार इल्म शब्द का प्रयोग किया गया है. अल्लाह के बाद सबसे ज्यादा दोहराया गया शब्द यही है.यह धर्म में शिक्षा के महत्व को दोहराता है.' जी हां ये मोदी के शब्द हैं.
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विरोधी बातें करते रह गए, खुद-ब-खुद घटते चले गए. इसके उलट वो शख्स दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का वजीर बन बैठा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. इनका अपना एक अलग ही जादू है. भीड़ में बोलते हैं तो उसका हिस्सा बनकर. मंच से बोलते हैं तो नेता बनकर. किसी सभागार में बोलते हैं तो वहां बैठे प्रबुद्ध लोगों की नब्ज पकड़ कर.
सार्क देशों के उच्चायुक्तों और मुस्लिम देशों के राजदूतों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने इस्लाम की जमकर तारीफ की. मोदी ने कहा, 'कुरान में 800 बार इल्म शब्द का प्रयोग किया गया है. अल्लाह के बाद सबसे ज्यादा दोहराया गया शब्द यही है. यह धर्म में शिक्षा के महत्व को दोहराता है.'
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| पीएम मोदी ने की इस्लाम की तारीफ |
दरअसल इतिहासकार जे.एस. राजपूत की किताब 'मुसलमानों की शिक्षा' (Education of Muslims) की लॉन्चिंग के मौके पर मोदी बोल रहे थे. जिस पीएम ने इफ्तार पार्टी देने की परंपरा को तोड़ डाला, उसी ने अपने आधिकारिक आवास पर बुक की लॉन्चिंग करवाई. एक साथ इतने सारे मुस्लिम देशों के राजदूतों को संबोधित किया. आखिर क्यों? क्या यह हृदय परिवर्तन है? अगर नहीं तो इतने दिनों तक मोदी ने विरोधियों को हमले का मौका क्यों दिया?
मोदी के पिछले 12-15 वर्षों को गौर से देखें. उत्तर मिल जाएगा. वह 'हां सर, हो जाएगा सर, कर रहे हैं सर' की कैटिगरी वाले इंसान नहीं है. वह अपने मन की सुनते हैं, अपने मन की करते हैं. अगर मन ने कह दिया नहीं, तो फिर जरूरी होने के बावजूद भी वो काम नहीं करते हैं. मोदी को जानने के लिए रॉकेट साइंस की जरूरत नहीं. ऐसे लोग हमारे-आपके पास भी रहते हैं. अपनी शर्तों पर जीने वाला या तो फिर गुमनाम रहकर जिंदगी काट लेने वाला. अव्वल दर्जे का जिद्दी, हठी. मोदी ऐसे ही है.
मोदी छद्म की दुनिया में नहीं जीते हैं. वह सिर्फ लोगों को दिखाने के लिए न तो इफ्तार पार्टी देंगे और न ही स्कल कैप पहनेंगे. लेकिन इतना तय है कि बात जब विकास की होगी तो वो हिंदू-मुस्लिम के चश्मे से उसे देखेंगे भी नहीं. याददाश्त पर जोर डालिए या थोड़ा गूगल कीजिए. 2008 में गुजरात के गांधीनगर के एक इलाके में सड़क चौड़ी करनी थी. एक महीने के भीतर 80 मंदिर तोड़ डाले गए थे. शायद ही किसी कांग्रेसी या कम्युनिस्ट या समाजवादी सीएम ने इतने बड़े स्तर पर धर्म से 'पंगा' लिया होगा.
मोदी के प्रशंसक अगर यह सोच रहे हैं कि अब विरोधी क्या कहेंगे... विरोधियों को चुप करा दिया... वगैरह-वगैरह... तो आप गलत हैं. उनके लिए यहां भी मौका है. शायद कल के अखबार में यह आ जाए कि मोदी तो सिर्फ विदेशियों से ही मिलते हैं, देश के लोगों की उन्हें चिंता कहां...


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