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Updated: 15 जुलाई, 2015 07:27 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
  @msTalkiesHindi
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बिहार विधानसभा चुनाव में मुकाबला इस बार दो नारों के बीच होने जा रहा है. एक है, 'फिर एक बार नीतीश सरकार' और दूसरा, 'अबकी बार भाजपा सरकार'. दिलचस्प बात ये है कि दोनों ही स्लोगन 'अबकी बार मोदी सरकार' से प्रेरित नजर आते हैं, जिसके नाम 2014 के चुनाव में कामयाबी की कहानी लिखी जा चुकी है. जहां तक चेहरों की बात है तो अभी तक नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार ही आमने-सामने नजर आ रहे हैं.

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बीजेपी, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बिहार विधानसभा चुनाव पिछले साल के लोक सभा चुनाव की तरह अहम हो गए हैं. यही वजह है बीजेपी कोई कसर बाकी नहीं रखना चाहती.

10 लाख को न्योता

प्रधानमंत्री मोदी 25 जुलाई को मुजफ्फरपुर में रैली करने जा रहे हैं. विधान परिषद चुनाव में एनडीए को मिली कामयाबी के बाद हो रही मोदी की इस रैली से बीजेपी को काफी उम्मीदें हैं. खास बात ये है कि रैली में शामिल होने के लिए बीजेपी 10 लाख लोगों को व्यक्तिगत तौर पर न्योता भेज रही है, ताकि लोगों के साथ भावनात्मक रिश्ता कायम किया जा सके.

रथयात्रा तो ब्रह्मास्त्र है

रथयात्रा तो बीजेपी का ब्रह्मास्त्र रहा है. अक्टूबर 1990 में लालकृष्ण आडवाणी का रथ तब के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने समस्तीपुर में रोक दिया था. यही रथयात्रा आगे चलकर बीजेपी के दिल्ली पहुंचने का आधार बनी. बाद में बीजेपी नीतीश कुमार के साथ रथ पर सवार होकर पटना भी पहुंची, लेकिन मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित होते ही दोनों अलग अलग रथ पर सवार हो गए.

बीजेपी इस बार नीतीश के खिलाफ रथ पर सवार होकर सत्ता तक पहुंचना चाहती है. इसके लिए 160 हाई-टेक रथ तैयार किए जा रहे हैं. जीपीएस से लैस ये 'परिवर्तन रथ' रोजाना 1000-1200 मीटिंग कर सकें, ऐसा लक्ष्य रखा गया है.

सौ दिन में एक लाख रैली

बीजेपी ने 100 दिनों में एक लाख रैलियों का टारगेट रखा है. इन रैलियों का नेतृत्व बीजेपी के स्टार प्रचारक और दूसरे बड़े नेताओं के अलावा स्थानीय नेता भी करेंगे.

25 हजार बैग

खुद बीजेपी के अलावा उसके समर्थक भी अपने तरीके से तैयारी कर रहे हैं. खबर है कि एक साड़ी कारोबारी ने 25 हजार बैग का ऑर्डर दिया है जिन पर केसरिया रंग में बिहार के नक्शे के अलावा बीजेपी का चुनाव निशान कमल भी छपा होगा. इन बैगों पर एक स्लोगन भी होगा - 'सबका साथ सबका विकास'. बताया जाता है कि सूरत से बिहार जाने वाली ट्रेनों के यात्रियों को इन बैग में पानी की बोतल भर कर दी जाएंगी.

मोदी, मोदी और मोदी

सूरत के साड़ी व्यवसायी भी बैग और डिब्बों पर मोदी का चेहरा या बीजेपी का सिंबल 'कमल' प्रिंट करा रहे हैं. इस तरह पैकिंग टेप से लेकर कार्टन पर हर जगह मोदी या बीजेपी का निशान नजर आए, ये सुनिश्चित करने की कोशिश हो रही है.

गांव कनेक्शन

बीजेपी का दावा है कि बिहार के 800 गांवों में पार्टी कार्यकर्ताओं और उनके जरिए मतदाताओं तक पहुंच बन चुकी है. 6.5 करोड़ वोटरों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है.

दिल्ली चुनाव के नतीजे आने के ठीक बाद आरएसएस ने प्रचारकों को बिहार में मोर्चे पर भेज दिया था. 14 अप्रैल को अमित शाह ने पटना में रैली की और कार्यकर्ताओं को भी गांवों की ओर कूच करा दिया था. अब मोदी की रैली से पहले 16 जुलाई को पटना से चुनाव प्रचार का आगाज करने जा रहे हैं - आखिर दिल्ली के दाग-धब्बे धोने जो हैं, आने वाले अच्छे दिनों की खातिर.

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मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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