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सियासत

 |  4-मिनट में पढ़ें  |   17-05-2017
आलोक रंजन
आलोक रंजन
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उत्तर प्रदेश में भारी बहुमत से विजयी होने के बाद बीजेपी द्वारा योगी आदित्यनाथ को देश के सबसे बड़े सूबे की कमान थमाई गयी थी. उन्हें शपथ लिए हुए तकरीबन 2 महीने हो गए पर अपराध रुकने का नाम ही नहीं ले रहे हैं. बीजेपी ने योगी आदित्यनाथ को कमान देने के साथ ये सन्देश भी दिया था कि कानून व्यवस्था बनाये रखना उनकी प्रमुखता रहेगी साथ ही साथ ये दावा भी किया गया कि लॉ एंड आर्डर बिगाड़ने वालों से सख्ती से निपटा जायेगा और किसी भी तरह से कानून अपने हाथ में लेने की इजाज़त नहीं दी जाएगी.

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही उत्तर प्रदेश पुलिस में कई अहम बदलाव किये गए. नए डीजीपी की नियुक्ति की गयी. पुलिस को चुस्ती से काम करने का निर्देश दिया गया. योगी आदित्यनाथ ने कई बार ये कहा कि अपराधियों से कड़ाई से निपटा जायेगा, लेकिन लगता है कि उनकी बात पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है.

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उन्होंने विधानसभा में भी स्पष्ट तौर पर कहा कि राज्य में राजनीतिक संरक्षण में अपराध करने की किसी को अनुमति नहीं होगी और अपराध करने वालों को अपराधी ही माना जाएगा और किसी भी तरह का कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा. विपक्ष द्वारा इस मुद्दे पर सवाल उठाने पर और पिछले दो माह में हत्या, बलात्कार, डकैती और लूट की घटनाओं का ब्यौरा पूछने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, हमें एक वर्ष दीजिए.

समाजवादी पार्टी जब सरकार में थी तो बीजेपी ने आये दिन कानून-व्यवस्था में गिरावट और क्राइम की बढ़ती घटनाओं पर अखिलेश यादव पर करारा प्रहार किया था. पिछले कई दिनों से उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर विधानसभा से लेकर सड़क तक हंगामा मचा हुआ है. विपक्ष इस मसले में सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है. कानून व्यवस्था की स्थिति पिछले दो महीने से लगातार बिगड़ती हुई दिख रही है. आए दिन लूट-पाट, डकैती और मर्डर की खबरें आ रही हैं.

बीजेपी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच लगातार हो रही झड़पें भी सरकार के लिए समस्या पैदा कर रही हैं और दो पुलिसकर्मियों की हत्या भी हो चुकी है. प्रदेश में पुलिस के पिटने की घटना तो जैसे आम बात हो गई है. मेरठ में बीजेपी नेताओं द्वारा पुलिस को पीटने का मामला हो, फतेहपुर सीकरी में थाने पर हमला बोलना और पुलिस अधिकारियों पर हाथ उठाना या फिर कथित लव जिहाद के नाम पर हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं का कानून हाथ में लेना, ये सभी घटनाएं उत्तर प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं.

कुछ ताजातरीन घटनाओं पर नजर डालते हैं-

15  मई 2017 - मथुरा में सर्राफ़ा व्यापारी के यहां डकैती और दो लोगों की मौत.

14 मई 2017 - वजीरगंज के उरैनी गांव, बरेली में को प्रेमी जोड़े की हत्या कर दी गई.

13 मई 2017 - कौशांबी जनपद के सिंघवल थाना क्षेत्र के पूरा गांव में देर रात बदमाशों ने घर में सो रही एक नवविवाहिता से दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी और हाथ-पैर बांधकर शव को जला डाला.

12 मई 2017 - अलीगढ़ में गोरक्षकों की गुंडागर्दी, भैंस काटने के आरोप में 6 लोगों को पीटा.

11 मई 2017 - संभल में सांप्रदायिक तनाव.

9 मई 2017 - लखनऊ में पत्नी को लेकर अस्पताल गए रिटायर्ड सूबेदार के दो बेटिेयों की बेरहमी से हत्या कर दी गई.

ये तो इसी महीने हुए कुछ अपराधों का विवरण है. जानकारों और समीक्षकों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से कानून और व्यवस्था में गिरावट हुई है और क्राइम आउट ऑफ कण्ट्रोल होता जा रहा है. योगी आदित्यनाथ सरकार पर प्रश्न उठने लगे हैं. उत्तर प्रदेश में पिछले कई सालों से बसपा और सपा की सरकार रही है और उनके राज में कानून व्यवस्था बहुत ही खराब रही है. योगी आदित्यनाथ को कड़े कदम उठाने होंगे ताकि अपराधियों पर काबू पाया जा सके और उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश में तब्दील करने में सफलता हासिल की जा सके.

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लेखक

आलोक रंजन आलोक रंजन @alok.ranjan.92754

लेखक आज तक में एसोसिएट सीनियर प्रोड्यूसर हैं.

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