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Updated: 09 जून, 2015 04:15 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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क्या दिल्ली सरकार 100 करोड़ रुपये के सीएनजी किट घोटाले में डबल फायदा देख रही है? क्या केजरीवाल एक तीर से दो निशाने साध रहे हैं. या फिर, दिल्ली की जंग पर फतह का ऐसा रास्ता तलाश रहे हैं, जिसमें शिकार भी हो जाए और हथियार भी बचा रहे.

क्या है सीएनजी घोटाला?

साल 2002 में दो कंपनियों को सीएनजी किट लगाने ठेका दिया गया था. कंपनियों को बगैर टेंडर ठेका दिए जाने का आरोप है. आरोप यहां तक है कि फर्जी फिटनेस टेस्ट देकर पैसा वसूला जा रहा था जिसमें खर्च सरकार कर रही थी - और आमदनी ठेके लेनेवाली कंपनियां. इस तरह सरकार को करीब 100 करोड़ का घाटा होने का अनुमान है.

एलजी को घेरने की तैयारी

वर्चस्व की लड़ाई में शिकस्त देने के लिए केजरीवाल सरकार ने एलजी नजीब जंग को घेरने की कोशिश में जुट गई है. अब सरकार का रुख मुख्य सचिव की राय पर निर्भर है. दिल्ली सरकार जानना चाहती है कि क्या एलजी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है? क्या आईपीसी की आईपीसी की धारा 217 और 218 के तहत मामला चल सकता है, या नहीं? इसके तहत अगर कोई पब्लिक सर्वेंट अपने पद का दुरूपयोग करके किसी की सजा कम करवाता है या उसे सजा से बचाता है तो उसे दो साल की कैद और जुमार्ना हो सकता है. आरोप है कि सीएनजी घोटाले में तब के तीन अफसरों के खिलाफ केस चलाने की अनुमति को एलजी ने कथित तौर पर नामंजूर कर दिया था.

शीला पर भी निशाना

सीएनजी घोटाले का मामला साल 2002 का है जब दिल्ली में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का शासन रहा. 2013 के विधानसभा चुनाव में केजरीवाल ने लोगों से वादा किया था कि वो शीला दीक्षित के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कराएंगे. उस वक्त न केजरीवाल की सरकार 49 से आगे बढ़ पाई न ये मामला. अब जबकि फिर से ये केस खुल रहा है शीला की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. असल में, तब के तीन अफसरों की भूमिका की जांच होनी है.

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मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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