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Updated: 24 अगस्त, 2015 02:43 PM
दमयंती दत्ता
दमयंती दत्ता
 
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1. प्रवचन- कौन नहीं जानता कि ममतामई श्री राधे गुरु मां शायद ही कभी सार्वजनिक रूप से अपना मुंह खोलती हैं- ये उनका सिग्नेचर स्टाइल है, जिसकी वजह से लोग बाते बनाते हैं कि उनके पास बोलने के लिए कुछ होती ही नहीं है. लेकिन ये सच नहीं है, उनके भक्त कहते हैं कि उनका पसंदीदा आध्यात्मिक प्रवचन है- 'भक्ति करो'.

2. पदचिन्ह- मुंबई में वल्केश्वर रोड पर स्थित आलीशान महल में, जहां आजकल वो रह रही हैं, वहां न कोई रंगोली है, न कोई अल्पना और न ही कोई स्वास्तिक के निशान. जो चीज उस जगह पर राधे मां की अलौकिकता की व्यक्तिगत मुहर लगाती है, वो है मार्बल के फर्श पर छपे खूनी लाल पदचिन्ह, जिन्हें बड़ा सहेज कर, कांच के अंदर फूलों से सजाकर रखा गया है.

3. मिनी त्रिशूल- वो करीब एक फुट लम्बे धातु के बने एक मिनी त्रिशूल का इस्तेमाल करती हैं, हां वही जिसने तब हंगामा मचा दिया था जब उसे लेकर वो हाल ही में एक विमान में सवार हुई थीं- आशीर्वाद देने या फिर श्राप देने के लिए. उनके विरोधी तो यहां तक कहते हैं कि सार्वजनिक आयोजनों में वो इस त्रिशूल का इस्तेमाल कई बार अपने लहराते हुए बालों को कंघी करने के लिए भी करती रही हैं.

4. हर मंगलवार- भक्तों का कहना है कि मां दुर्गा को समर्पित दिन उनका भी प्रिय दिन है. कुछ लोगों का कहना है कि वो इस दिन खास तरह की पूजा करती हैं और 'महाशक्तिशाली' बन जाती हैं. उस दिन 'मां के आदेश' को अनदेखा करने की ज़िम्मेदारी आपकी अपनी. 

5. काली जैगुआर- उनका वाहन एक काली जैगुआर है जिसके चमकीले लाल रंग के पहिए हैं. नहीं, वो उनके नाम पर रजिस्टर्ड नहीं है, वो तो कथित तौर पर उनके एक भक्त की तरफ से उपहार है. बदकिस्मती से, वो एक फर्जी पते पर रजिस्टर्ड होने की वजह से सुर्खियों में है.

6. सिर्फ लाल- बाइबल के अनुसार लाल रंग पाप का होता है. उपनिषद कहते हैं कि लाल रंग रजस यानी दुनियादारी, जुनून, लालसा, महत्वाकांक्षा और लड़ाई का होता है. नये जमाने के आध्यात्मिक गुरुओं के हिसाब से लाल रंग भौतिकवाद का प्रतीक है. हम नहीं जानते कि आखिर माताजी लाल रंग के बारे में क्या कहती हैं, लेकिन ये उनका पसंदीदा रंग है, उनकी दीवारें हों, या उनके निजी कमरे की रौशनी, उनके हीरे जड़े बिस्तर में इस्तेमाल किया गया कपड़ा हो या फिर उनका लहंगा, गहने और उनका मेकअप, सब लाल ही लाल हैं.

7. देवी का प्रसाद- कुछ भी हो सकता है, वो किसी को भी पैसे, कपड़े यहां तक कि सोना भी आशीर्वाद में दे देती हैं. लेकिन अकसर कहा जाता है कि एक पेड़ा होता है, जिसे वो अपने मुंह में डालती हैं और फिर फैली हुई हथेलियों पर थूक देती हैं. यही उनके भक्तों के लिए सबसे ज्याहदा फलदायी आशीर्वाद होता है.

8. गुड़िया मां- भारत क्यों माता जी के लिए पागल है? प्रत्यक्ष रूप से इस 'देवी अवतार' में एक बच्ची जैसे भाव हैं, उन्हें गलत समझा जा रहा है. उनके अनुयायी उन्हें एक बेबी डॉल की तरह मानते हैं, बच्ची की तरह उन्हें गोद में उठाते हैं, बाहों में बाहें डालते हैं. बड़ी उम्र के भक्त उन्हें 'गुडिया देवी मां' कहकर बुलाते हैं.

9. सितारों की चमक- ममतामई के पास सितारों की शक्ति है. उनके सारे आयोजनों के लिए नियमित तौर पर टीवी हस्तियों को बुलाया जाता है. और वो उस आयोजन के प्रचार का हिस्सा बन जाते हैं. विरोधियों का कहना हे कि लोग राधे मां से ज़्यादा सितारों को देखने वहां आते हैं. कोई आश्चर्य की बात नहीं है- मुंबई, वो शहर जहां थोक के भाव सेलि‍ब्रि‍टी मिलते हैं, उसे इस दिव्य 'लीला' के लिए चुना गया है.

10. सेवादार- मां से मिलना चाहते हैं? 'छोटी मां' या 'टल्ली बाबा' से संपर्क करिए, ये दो मुख्य सहयोगी हैं, ऐसा उनकी ऑफीशियल वेबसाइट पर लिखा हुआ है. टल्ली बाबा मां से मिलने के इच्छुक लोगों की स्क्रीनिंग करने वाले पहले व्यक्ति हैं, जबकि छोटी मां अखिरी अधिकारी हैं. कथित तौर पर इनके पास दिव्य शक्तियां हैं जबकि टल्ली बाबा सभी काम देखते हैं- आयोजन से जुड़ा हो या फिर आध्यात्मिक.

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लेखक

दमयंती दत्ता दमयंती दत्ता

लेखिका इंडिया टुडे मैगजीन की कार्यकारी संपादक हैं.

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