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Updated: 26 सितम्बर, 2017 01:18 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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प्यारी हनीप्रीत,

सबसे पहले तुमको बता दूँ वहां जेल में बेचारे बाबा तुम्हारी बिरह में सूख के छुआरा और हम पुलिसवाले ऐंठ के अंगूर से किशमिश हो गए हैं. बाकी बात बस इतनी है कि, तुमको गायब हुए अब पूरा एक महीना होने को है. और हां अब क्या बताएं मगर तुम तो ऐसे गायब हो गयी हो जैसे गधे के सिर से सींग. अब जब तुम गायब हो, तो तुम्हारे गायब होने से न सिर्फ बाबा और सवा सौ करोड़ भारतीय प्रभावित हुए हैं बल्कि हमारे ऊपर भी संकट के बादल गहराने लगे हैं.

बाबा को तुम्हें याद करने के अपने अलग कारण हैं. तुम्हारे गायब होने से हम लोग चिंता में बस इसलिए हैं कि, तुम्हारे इस तरह चले जाने के बाद अब लोग हमारी कुशलता पर सवालिया निशान लगाने लग गए हैं.

हनीप्रीत, गुरमीत राम रहीम, डेरा सच्चा सौदा   जिस तरह हनीप्रीत गायब हुई हैं उससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक साथ कई सवालिया निशान लग गए हैंअभी कल की ही बात है. मैं एक आदमी से मिलने गया था. उस आदमी को कनाडा जाना था और उसके पासपोर्ट में कुछ गड़बड़ थी. काम निपटा के मैं वापस आ रहा था. वापस आते हुए मैं बहुत थक गया. तो सोचा थाने के बगल वाली चाय की दुकान पर बैठ ब्रेड-बटर के साथ चाय पी लूं और कुछ देर सुस्ता भी लूं. मैंने अपनी मोटर साइकिल रोकी और उसे साइड स्टैंड पर लगाया और दुकान पर पहुंच गया.

बारिश हो रही थी तो दुकान पर भीड़ का होना लाजमी था. अभी मैं दुकान पर पहुंच के स्टूल पर बैठा ही था कि पीछे से कोई कहने लगा 'देखो इन्हें, एक हनीप्रीत तो इनसे पकड़ी नहीं जा रही और कैसे बेशर्मी से ये यहां चाय पी रहे हैं'. अब तुम ही बताओ अब जब तुम मिलने का नाम नहीं ले रही हो तो क्या हम लोग खाना पीना और बच्चों के साथ घूमना फिरना छोड़ दें.

नहीं, ये बिल्कुल भी अच्छी बात नहीं है. ये कुछ वैसा ही है कि 'करे कोई और भरे कोई' करा तुमने हैं और भर हम लोग रहे हैं. ऐसा इसलिए कि अब घर से लेकर दफ्तर और बाहर सब जगह हम लोगों की थू-थू हो रही है. जो भी हमें देखता है नाकारा, निकम्मा, रिश्वतखोर, आलसी न जाने कैसे-कैसे विशेषण दे देता है. संविधान ने हमें मजबूर कर रखा है वरना सच में हम लोग लाठी मार-मार के सभी को सुजा देते और इस तरह उनका मुंह बंद हो जाता.

हनीप्रीत, गुरमीत राम रहीम, डेरा सच्चा सौदा   आज हर कोई यही कह रहा है कि जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी हनीप्रीत को वापस लाया जाएबहरहाल, एक तरीके से देखा जाए तो मैं सदैव तुम्हारा आभारी रहूंगा. न न, मेरे तुम्हारे प्रति आभारी रहने का कारण ईश्वर द्वारा तुम्हें मुझसे या मुझे तुमसे परिचित कराना नहीं है बल्कि तुमने मेरी वो इच्छा पूरी कर दी और अब नौकरी में आने के बाद मेरे दिल में कहीं दब सी गयी थी. जानती हो मुझे बचपन से ही घूमने का बड़ा शौक था मगर घर की जिम्मेदारियों और पैसे की कमी के चलते मैंने अब अपने इस शौक को मारना सा शुरू कर दिया था. पता है अभी कुछ दिनों पहले ही तुमको खोजने मैं बड़े साहब के साथ नेपाल गया था. नेपाल बड़ा प्यारा देश है वहां की आबो हवा वहां का मौसम सब अपने आप में खास है सही बताऊँ तो ये केवल तुम्हारे कारण हुआ है जो मुझे नेपाल से इश्क हो गया है.

मैं कल रात खाना खाने के बाद टीवी देख रहा था तो न्यूज वालों ने बताया कि, तुम नेपाल के रास्ते चीन जा चुकी हो. मैं तुमसे अनुरोध करता हूं कि तुम अपने रब से मेरे चीन आने की दुआ करो. हालांकि मुझे कहते हुए शर्म आ रही है मगर अब तुमसे न  कहूंगा तो किस्से कहूंगा ये सुनकर कि तुम चीन में हो और हम तुम्हें खोजने चीन जा सकते हैं घर से लेकर सुसराल तक सबके अपनी-अपनी डिमांड का पुलिंदा मेरे इन्हीं हाथों में, जिससे मैं तुम्हें खत लिख रहा हूं पकड़ा दिया है. साले को बड़े से लेंस वाला कैमरा चाहिए तो साली को अच्छी सेल्फी लेने वाला मोबाइल.

हनीप्रीत, गुरमीत राम रहीम, डेरा सच्चा सौदा  माना जाता है कि हनीप्रीत का शुमार उन लोगों में है जो बाबा के सबसे करीब थेपत्नी ने कह दिया है कि चीन से जब घर आना तो सैंडविच मेकर और अंडा उबालने वाली इलेक्ट्रिक कैटल लेकर ही आना यूं भी जाड़ा आ रहा है और जाड़े में अंडा छीलने की अपनी अलग उलझनें हैं. बच्चों ने कैप्टन अमेरिका और पोकेमॉन वाले स्पिनर की मांग अलग से रख दी है. सच कहूं तो तुम्हें खोजने के चक्कर में मेरा बड़ा खर्चा हो गया है. अभी जब तुम्हें खोजने नेपाल गया था तो अम्बाला वाली मौसी और रोहतक वाली बुआ के लिए गर्म कम्बल ले लिए थे. उस बात से बीवी अभी तक नाराज है और कहती रहती है कि 'तुम्हें तो कभी मेरी मां और उसकी खुशियों का ख्याल रहा ही नहीं.

खैर अब पत्र लंबा हो रहा है और दशहरा और दिवाली जैसे खर्चे वाले त्योहार भी सिर पर हैं बेहतर है तुम खुद-ब-खुद वापस आ जाओ और अपने आपको हमारे हवाले कर, हमारे ऊपर लग रहे कलंक को धो दो. विश्वास रखो तुम्हें कोई कुछ भी नहीं कहेगा और साथ ही तुम्हें सरकारी गवाह बना के तुम्हारा पूरा ख्याल रखा जाएगा.

रही बात चीन जाने की तो तुम्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है. मेरी ईश्वर पर अटूट आस्था है ये मुझे फिर विदेश भेजेगा ठीक वैसे जैसे अभी कुछ दिनों पूर्व उसने मुझे नेपाल भेजा था. वाकई में बड़ा अच्छा लगता है जब कोई यार दोस्त या सहकर्मी मुझसे पूछता है कि कभी विदेश गए हो और मैं जवाब में ये कहता हूं कि हां अभी कुछ दिन पूर्व ही मैं हनीप्रीत को खोजने के सिलसिले में नेपाल में था.

तुम्हारा,

हरियाणा पुलिस का एक हेड कांस्टेबल

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लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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