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सिनेमा

 |  3-मिनट में पढ़ें  |   19-12-2016
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पाकिस्तान में बॉलीवुड फिल्म पर बैन ख़त्म हो गया है. भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में बढ़ते तनाव के बीच सितंबर के अंत में भारतीय फ़िल्मों के प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई थी. ये फ़ैसला कश्मीर में जारी हिंसा और नियंत्रण रेखा पर तनाव की स्थिति बनने के बाद लिया गया था. बदले में भारत में पाकिस्तान के फ़िल्म कलाकारों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.

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उरी हमले के ठीक बाद महाराष्ट्र के MNS पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तानी क्लालकारों को भारत में काम नहीं करने देने और वापस पाकिस्तान चले जाने का एलान कर दिया था. पाकिस्तान की तरफ से आतंकवाद को बढ़ावा देने के खिलाफ देश भर में बढ़ रहे आक्रोश के मद्देनजर ये फैसला किया गया. कारण जोहर की फिल्म ऐ दिल है मुश्किल, पहली फिल्म बनी जिसे खासी विरोध का सामना करना पड़ा. जिसके कारन करण जौहर ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस और राज ठाकरे से मुलाक़ात की थी तो उनकी फ़िल्म रिलाज़ हो सकी.

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 दंगल और रईस दोनों ही फिल्मों के लिए ये अच्छी बात हो सकती है.

जहाँ तक पाकिस्तानी सिनेमा की बात है, तो भारत में कुल मिला कर चार पांच फिल्म जिनमे खुद के लिए और बोल मुख्य फिल्म हैं जो रिलीज़ हुईं. पर कुछ खास सफल नहीं हुईं. हालांकि, बॉलीवुड फिल्मों का कारोबार पाकिस्तान में बहुत बड़ा है.

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पिछले कुछ सालों में कुछ बड़ी फिल्मों को पाकिस्तान में बैन किया गया था. जैसे, एक था टाइगर – 2012 में आई सलमान खान और कटरीना कैफ की फिल्म भारत में ब्लॉकबस्टर रही वहीं पाकिस्तान में उसे बैन कर दिया गया. सोनम कपूर अभिनीत फिल्म ‘नीरजा’ को भी पाकिस्तान में बैन कर दिया गया. साल 2015 में आई फिल्म 'फैंटम' को भी पाकिस्तान में प्रतिबंधित कर दिया गया. रितेश देशमुख और पुलकित सम्राट स्टारर फिल्म ‘बंगिस्तान’ को भी पाकिस्तान में बैन कर दिया गया था. फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह पर आधारित फिल्म बैन कर दी गई. ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ को भी पाकिस्तान में बैन झेलना पड़ा. ये लिस्ट काफी बड़ी है..

अगर हम पाकिस्तान भारतीय फिल्म का अर्थशास्त्र को देखें तो कुल मिलकर भारतीय फिल्मों का ओवरसीज कलेक्शन के साथ पाकिस्तान के सिनेमाघरों को भी काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा था.

शाहरुख़ की बड़े बजट की फिल्म रईस अगले साल 25 जनवरी को रिलीज़ होने के लिए तैयार है. चूंकी शाहरुख़ का बड़ा फैन फॉलोविंग पाकिस्तान में है, तो निश्चय ही इस फिल्म से बड़े कलेक्शन की उम्मीद की जा सकती है. वैसे भी फिल्म मनोरंजन का एक सशक्त माध्यम है, जो दोनों देशों के रिश्ते को सुधरने में काफी मददगार साबित होगा. ये फैसला की आज से पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों का दरवाजा फिर से खोल रहा है. इस मुहीम को कोई बुरी नज़र ना लगे.

लेखक

जगत सिंह जगत सिंह @jagat.singh.9210

लेखक आज तक में पत्रकार हैं.

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