संध्या द्विवेदी
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लेखक इंडिया टुडे पत्रिका की विशेष संवाददाता हैं
सियासत | 5-मिनट में पढ़ें
कांशीराम के ख्वाब पर माया का मोह हावी!
ज्योतिराव फूले, बाबा भीमराव आंबेडकर, छत्रपति शाहू की तरह दलितों को मुख्यधारा में शामिल करने के ख्वाब को कांशीराम ने आगे बढ़ाया और मायवती इसे आगे बढ़ाएंगी इस उम्मीद के साथ उन्हें अपना उत्तराधिकारी बनाया. लेकिन तीन दशक से पहले ही मायावती ने उनके ख्वाबों को श्रृद्धांजलि दे दी.सियासत | 3-मिनट में पढ़ें
सियासत | 5-मिनट में पढ़ें
महिला-मत हथियाने के लिए 'जाल' बिछाते सियासी दल
देश के दो राष्ट्रीय दलों के चुनावी घोषणा पत्रों को देखें तो अंदाजा हो जाएगा कि महिला मतदाता कितनी महत्वपूर्ण हो गई हैं. तो क्या सियासी दल औरतों की सियासत में ताकत को पहचान गए हैं? तो क्या अब संसद में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का विधेयक पास होने का वक्त आ गया है?सियासत | 5-मिनट में पढ़ें
सियासत | 5-मिनट में पढ़ें
ह्यूमर | 6-मिनट में पढ़ें
सियासत | 5-मिनट में पढ़ें
समाज | 3-मिनट में पढ़ें
समाज | 5-मिनट में पढ़ें
मेरा मां बनने से जी घबराता है, लेकिन सबसे बड़ा डर तो कुछ और है...
माफ करना मैं औरत हूं, मगर मां बनने का एहसास मुझे गुदगुदाता नहीं, मेरे भीतर संशय पैदा करता है. संशय कि सालों की मेहनत पर कहीं पानी न फिर जाए, मां के नाम के डिब्बे में कहीं मेरी पहचान न कैद होकर रह जाए, कहीं अपने पुरुष मित्रों से पीछे न छूट जाऊं. सबसे बड़ा संशय तो यह है कि यह सब खुलेआम कहने पर मॉन्सटर न करार दे दी जाऊं.सियासत | 5-मिनट में पढ़ें
समाज | 4-मिनट में पढ़ें
समाज | 5-मिनट में पढ़ें










