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Updated: 19 अगस्त, 2016 04:49 PM
विमल सिंह
विमल सिंह
  @vimal.singh.589
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वर्ल्ड नंबर वन, विश्व चैंपियनशिप चैंपियन, ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियन, मलेशियाई ओपन चैंपियन, ऑस्ट्रेलियाई ओपन चैंपियन... जी हां ये बैडमिंटन के वो बड़े खिताब हैं जिन्हें जीतने वाला खिलाड़ी बैडमिंटन सिरमौर कहलाता है. साल 2015 में ये सारे खिताब जिस महिला खिलाड़ी की झोली में गिरे उसका नाम है कैरोलीना मारिन. स्पेन की वह कैरोलीना ओलंपिक गोल्ड से बस एक कदम दूर है. उन्हें इस गोल्ड को हासिल करने के लिए हैदराबाद की पीवी सिंधू नाम की उस चुनौती को पार करना है जिसके साथ जंग में 125 करोड़ लोगों की दुआएं है, उनका आशीर्वाद है.

बात बैडमिंटन कोर्ट की हो तो कैरोलीना का फॉर्म, इतिहास, खिताब सब सिंधू के मुकाबले का है. दोनों के बीच अबतक हुए 7 मुकाबलों में कैरोलिया ने 4 में जीत दर्ज की है तो संधू ने 3 बार बाजी मारी है. लेकिन पीवी सिंधू के पिछले पांच मैचों को जिस किसी ने देखा है वो उनके खेल का दीवाना हो गया है. लंबी, छरहरी, शेरनी जैसी फुर्ती और प्रतिद्वंधी पर पलटवार की ऐसी क्षमता देश ने बैडमिटंन में इससे पहले नहीं देखी.

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पी वी संधू

खेल की बारीकियों को यदि समझे तो सिंधू ने ओलंपिक में अभी तक जिन खिलाड़ियों को परास्त किया है वो सभी दाएं हाथ की खिलाड़ी रहीं और मारिन बांए हाथी से खेलती हैं. कोर्ट में उनका मूवमेंट अविश्वसनीय है. नेट हो या बैक लाइन या फिर साइड मूवमेंट, ऊंचे टॉस, स्मैश और डिसेप्शन में तो कोई सानी नहीं. ऐसे में कैरोलीना के खिलाफ सिंधू क्या स्ट्रेटजी अपनाएंगी इस पर पूरे देश की नज़र है.

सिधूं के पास पुलेला गोपीचंद जैसा कोच है जिसने खेल की बारीकियों को, दुश्मन की रणनीति को भलीभांति समझा होगा और अपनी शिष्या को बखूबी समझाया भी होगा. लेकिन, यक्ष प्रश्न यही है क्या सिंधू मानसिक तौर पर इस मुकाबले को तैयार है? सवा सौ करोड़ देशवासियों के सोने की उम्मीद उन पर कहीं हावी तो नहीं है? तो इसका जवाब यही है कि सिंधू को आज कोर्ट में बैडमिंटन के साथ एक और खेल को ध्यान में रखकर उतरना होगा और वो खेल है शतरंज.

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उनकी हर सर्विस एक चाल होगी, हर रिटर्न एक प्यादा होगा, हर स्मैश एक वजीर होगा और हर ड्रॉप शॉट एक बादशाह होगा. कोर्ट की सीमाओं को इंच नहीं मिलीमीटर तक नापना होगा. वो अनचाही गलतियां जो सेमीफाइनल में की हैं उनसे कोसों दूर रहा होगा क्योंकि कैरोलीना अगर एक बार लीड ले लेती हैं तो उन्हें पकड़ना मुश्किल ही नामुमकिन होता है. कैरालीना की कमियों को दिमाग से पकड़ना होगा और मोर्चे पर उन्हें सेकेंड्स के अंदर कोर्ट में अवतरित करना होगा. ये लड़ाई शक्ति, फुर्ती, साहस के साथ दिमागी भी है और इसीलिए भारत की इस शेरनी को आज बैडमिंटन के साथ शतरंज को भी दिमाग में रखना होगा और देश के लिए रियो 2016 का पहला गोल्ड लेना होगा.

लेखक

विमल सिंह विमल सिंह @vimal.singh.589

लेखक आजतक में पत्रकार हैं.

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