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Updated: 23 मार्च, 2021 09:48 AM
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) को उत्तर प्रदेश की सत्ता संभाले चार साल (4 Years of Yogi Sarkar) हो चुके हैं. इन चार वर्षों में सीएम योगी ने अपने बलबूते पर प्रदेश की राजनीति में भाजपा की जड़ें काफी गहरी कर दी हैं. योगी सरकार के चार साल पूरे होने पर मुख्यमंत्री ने अपने कार्यों का लेखा-जोखा लोगों के सामने पेश किया. 'दशकों में जो न हो सका, चार वर्ष में कर दिखाया' नाम की विकास पुस्तिका विमोचन के दौरान योगी आदित्यनाथ ने 'सांस्कृतिक राष्ट्रवाद' के सहारे कई सियासी समीकरण साधे हैं. योगी आदित्यनाथ को भाजपा ने जिस मकसद से सूबे का मुखिया बनाया था, वह उसमें कामयाब होते दिख रहे हैं. यूपी में हिंदुत्व के फायरब्रांड नेता योगी अब भाजपा के स्टार प्रचारकों की लिस्ट में स्थायी जगह बना चुके हैं. योगी के चार साल का रिपोर्ट कार्ड भाजपा के एजेंडा का पूरक है. ऐसा इसलिए कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री के तौर पर योगी आदित्यनाथ ने सिर्फ 'सबका साथ, सबका विकास' ही नहीं, हिंदुत्व को भी बराबर धार दी है.

हिंदू और हिंदुत्व से समझौता नहीं

अपने ताबड़तोड़ फैसलों के साथ भ्रष्टाचार और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति रखने वाले योगी आदित्यनाथ ने यूपी विधानसभा में कहा था कि मैं हिंदू हूं और मैं ईद नहीं मनाता हूं. हिंदू होने पर गर्व की अनुभूति होना बुरी बात नहीं है. भाजपा जो अंदर है, वही बाहर है. घर में जनेऊ धारण करें और बाहर निकलकर टोपी पहन लें, ये पाखंड भाजपा नहीं करती. सीएम योगी के इस बयान पर खूब हो-हल्ला मचा, लेकिन उन्होंने कोई सफाई जारी नहीं की. लोगों को उनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'अक्स' नजर आने लगा.

योगी आदित्यनाथ का ये बयान राजनीतिक दलों के लिए नहीं था, बल्कि उत्तर प्रदेश की हिंदू आबादी को एक सीधा संदेश था कि 'आपका नेता' वोटों की खातिर सियासी 'टोपी' नहीं पहनेगा. उत्तर प्रदेश में जाति और धर्म की राजनीति का हमेशा से ही बोलबाला रहा है. सूबे में अब तक बनी तमाम सरकारें इन्ही समीकरणों को साध कर सत्ता की कुर्सी तक पहुंची हैं. लेकिन, योगी आदित्यनाथ ने जाति की राजनीति को बगल में रखते हुए हिंदुत्व को ही आगे बढ़ाया.

योगी आदित्यनाथ ने जाति की राजनीति को बगल में रखते हुए हिंदुत्व को ही आगे बढ़ाया.योगी आदित्यनाथ ने जाति की राजनीति को बगल में रखते हुए हिंदुत्व को ही आगे बढ़ाया.

नाम बदलने से लेकर लव जिहाद विरोधी कानून तक

योगी सरकार ने गोहत्या निरोधक कानून और धर्मांतरण विरोधी कानून के सहारे प्रदेश की हिंदू जनता में भाजपा की लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. योगी आदित्यनाथ ने 'डंके की चोट' पर इलाहाबाद का नाम प्रयागराज और फैजाबाद का नाम अयोध्या किया. नाम बदलने की इस लिस्ट में और भी कई नाम हैं. योगी के इन फैसलों का प्रभाव इतना गहरा था कि भाजपा शासित अन्य प्रदेशों में भी ये कानून बनाए गए. सीएम योगी की इस आक्रामक छवि को देखते हुए पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी कई मौकों पर उन्हें कॉपी करते नजर आए हैं. योगी आदित्यनाथ अपने विकास कार्यों और आक्रामक राजनीति के साथ अन्य भाजपा शासित प्रदेश के नेताओं के लिए रोल मॉडल बन गए हैं.

हिंदुओं की आस्था से जुड़े स्थानों का कायाकल्प

बतौर मुख्यमंत्री अयोध्या की दो दर्जन से ज्यादा बार यात्राएं कर चुके योगी आदित्यनाथ ने सरकार के चार साल पूरा होने पर एक पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने बीते चार सालों में यूपी में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ज्योति प्रज्जवलित होने की बात कही है. भाजपा के चुनावी एजेंडा में हमेशा से ही राम मंदिर का मुद्दा शामिल रहा है. 'सुप्रीम फैसला' आने से पहले ही अयोध्या का कायाकल्प किया जा चुका था. अयोध्या दीपोत्सव के जरिये प्रदेश के हिंदू मतदाताओं में योगी ने अपनी एक अलग ही छवि बना ली है.

काशी की देव दीपावली और ब्रज रंगोत्सव को भी उन्होंने जनता के बीच भुनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है. हिंदुओं की आस्था से जुड़े स्थानों को योगी ने धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विकास की बात करते हुए भव्यता देने की लगातार कोशिश की है, जिसमें वह सफल भी रहे हैं. विश्वनाथ कॉरीडोर और विंध्याचल धाम मे चल रहा विकास कार्य इसका उदाहरण हैं. कुंभ को योगी सरकार ने एक अलग ही भव्यता और दिव्यता दे दी है.

रामराज्य की समावेशी नीति

'रामराज्य' की समावेशी नीति में समाज के पिछड़े तबकों के साथ ही मुसलमानों को भी जोड़ने के प्रयास योगी आदित्यनाथ ने किए हैं. मुसहर, वनटंगिया और प्रदेश की गरीब जनता तक सरकार की योजनाओं को बड़े स्तर पर पहुंचाया है. रामराज्य की कल्पना को साकार करने और मुसलमानों को भी इसमें जोड़ने के लिए उन्होंने धार्मिक पर्यटन का सहारा लिया. योगी सरकार ने सूफी सर्किट के निर्माण के साथ ही बौद्ध सर्किट, जैन सर्किट लिए काफी बजट जारी किया है. कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने विकास तो किया ही है, लेकिन उन्होंने इसके लिए हिंदुत्व को हाशिए पर जाने नहीं दिया है. प्रदेश की राजनीति में वोटबैंक को साधे रखने के लिए सीएम योगी ने वो सबकुछ किया है, जो भाजपा उनसे करवाना चाहती थी.

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