charcha me| 

होम -> सियासत

 |  5-मिनट में पढ़ें  |  
Updated: 12 फरवरी, 2019 03:56 PM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujmaurya87
  • Total Shares

जिस अंधविश्वास को कांग्रेस ने खत्म करने की कोशिश की है वह है लखनऊ में यूपी कांग्रेस मुख्यालय की पुताई. दरअसल, सालों से एक अंधविश्वास चला आ रहा है कि जिस कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के दौरान कांग्रेस मुख्यालय की पुताई कराई जाती है, उसकी कुर्सी चली जाती है. इसी डर के चलते 20 साल से कांग्रेस मुख्‍यालय बिना रंग-रोगन के पड़ा रहा. लेकिन प्रियंका गांधी की राजनीतिक एंट्री को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान ने लखनऊ के कांग्रेस मुख्‍यालय की रंगाई-पुताई का आदेश दिया. और ये काम हो गया. तो क्या अब राज बब्बर की कुर्सी खतरे में हैं?

लोकसभा चुनाव सिर पर हैं और कांग्रेस सत्ता में वापसी की हर मुमकिन कोशिश कर रही है. काफी इंतजार के बाद आखिरकार प्रियंका गांधी भी राजनीति के मैदान में उतर चुकी हैं. सोमवार को ही उन्होंने राहुल गांधी के साथ अपना पहला रोड शो भी कर लिया. अब जब कांग्रेस अपनी जीत के लिए छटपटा रही है, तो उसके लिए वही अंधविश्‍वास मायने रखता है जो पार्टी के लिए जो पार्टी के हित में हो. भले कोई खास व्‍यक्ति के हित में हो या न हो.

लखनऊ में सोमवार को कांग्रेस के कार्यक्रमों की खबरों के बीच कुछ अंधविश्‍वासों से जुड़ी खबर भी बाहर आई. बुरी नजर से बचने के लिए प्रियंका के माथे पर लगा काला टीका, पंजाब से आई लकी बस और लखनऊ कांग्रेस कार्यालय की रंगाई-पुताई.

मुख्यालय की पुताई राज बब्बर को ना ले डूबे!

कांग्रेस मुख्याल की पुताई करीब 20 सालों के बाद की गई है. माना जाता है कि जिस प्रदेश अध्यक्ष के कार्यकाल के दौरान कांग्रेस मुख्याल की पुताई होती है, उसकी अध्यक्षता चली जाती है. अब अगर गौर किया जाए तो राज बब्बर की अध्यक्षता चले जाने से भी कांग्रेस को कोई खास फर्क नहीं पड़ता दिख रहा है. पुताई न कराने से भले ही उनकी कुर्सी बची रह गई हो, लेकिन यूपी में कांग्रेस धराशायी हो चुकी है.

हकीकत में साइड लाइन हो गए राज बब्बर

यूपी में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी बहन प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के कंधों पर सारी जिम्मेदारियां डाली हैं. राज बब्बर भले ही प्रदेश अध्यक्ष हों, लेकिन प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नेताओं के सामने उनका कद छोटा ही दिखता है. और रोड शो के बाद कांग्रेस मुख्यालय में इसकी एक झलक देखने को भी मिली.

सिंधिया ने राज बब्बर की 'कुर्सी' लेकर उन्हें किनारे कर दिया!

रोड शो खत्म होने के बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया और राज बब्बर कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे. वहां पर चार कुर्सियां तो थीं, लेकिन ये नहीं तय था कि कौन किस कुर्सी पर बैठेगा. अगर बाएं से दाएं देखा जाए तो सबसे पहले एक तरफ से दूसरे नंबर की कुर्सी पर राहुल गांधी बैठे और अपने बाएं ओर उन्होंने राज बब्बर को बिठाया. राहुल गांधी के दाईं ओर प्रियंका गांधी बैठीं और राज बब्बर के बगल में बैठे ज्योतिरादित्य सिंधिया. जब राज बब्बर संबोधन के लिए उठकर गए तो उनकी कुर्सी पर राहुल गांधी के बगल में ज्योतिरादित्य सिंधिया आकर बैठ गए और राज बब्बर को कोने वाली कुर्सी पकड़ा दी. अगर कुर्सियों के इस खेल को देखा जाए तो साफ जाहिर होता है कि राज बब्बर का कद बेहद छोटा है.

जिम्मेदारियां तो प्रियंका और ज्योतिरादित्य सिंधिया को मिली हैं, ऐसे में अगर राज बब्बर की अध्यक्षता चली भी जाए तो कांग्रेस को कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा. अगर अंधविश्वास के हिसाब से ही चलें तो भले ही राज बब्बर की कुर्सी चली जाए, लेकिन कम से कम कांग्रेस मुख्यालय की 20 साल बाद पुताई तो हो गई. ऐसे में कांग्रेस को रिस्क नहीं उठाना पड़ेगा. राज बब्बर की कुर्सी नहीं गई तो कांग्रेस ये कह सकती है कि वह अंधविश्वासों को नहीं मानती, इसलिए पुताई करने से बिल्कुल नहीं डरी. और अगर राज बब्बर की अध्यक्षता चली जाती है तो भी उन पर कोई जिम्मेदारी ना होने के चलते कांग्रेस का कोई नुकसान नहीं होगा.

प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, राज बब्बरजिस कुर्सी पर पहले राज बब्बर बैठे थे, उनके उठते ही उसे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हथिया लिया और राज बब्बर को किनारे कर दिया.

काला टीका और लकी बस

सोमवार को हुए रोड शो में प्रियंका गांधी काला टीका लगाकर आईं. माना जाता है कि काला टीका लगाने से किसी की नजर नहीं लगती है. अक्सर माएं अपने छोटे बच्चों को काला टीका लगाती हैं. प्रियंका भी कांग्रेस में एकदम नई हैं और हो सकता है कि लोगों की बुरी नजर से बचने के लिए उन्होंने भी काला टीका लगाया हो. वैसे भी 12 किलोमीटर लंबे रोड शो में उन्हें न जाने कितने लोगों ने देखा होगा, नजर से बचाना तो जरूरी था.

रोड शो में दूसरा अंधविश्वास रही वो बस, जिस पर ये रोड शो किया गया था. ये वही बस थी, जिस पर कांग्रेस ने पंजाब में रोड शो किया था और आज पंजाब में कांग्रेस की सरकार है. कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मानें तो ये बस कांग्रेस के लिए बेहद लकी है. इसी वजह से लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस प्रियंका गांधी को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है. काले टीके से लेकर लकी बस तक सब कुछ कर दिया.

ये भी पढ़ें-

...तो कांग्रेस से ज्‍यादा रॉबर्ट वाड्रा को बचाने के लिए राजनीति में उतरीं प्रियंका गांधी!

क्‍या वाकई एनटीआर की पीठ में छुरा घोंपा था चंद्रबाबू नायडू ने? पूरी कहानी...

बीजेपी मंदिर मुद्दे पर सिर्फ चार दलों से ही सफाई क्यों मांग रही है?

लेखक

iChowk का खास कंटेंट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक करें.

आपकी राय