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सियासत

 |  5-मिनट में पढ़ें  |   08-08-2018
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप केस में बिहार की समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा को आखिरकार इस्तीफा देना ही पड़ा. मंजू वर्मा को अपने पति चंद्रेश्वर वर्मा के चलते ये कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा है.

मंजू वर्मा विपक्ष के निशाने पर तो थीं ही बीजेपी के एक नेता भी उनके इस्तीफे की मांग कर चुके थे. मंजू वर्मा बहाना जरूर थीं, लेकिन हमले के केंद्र बिंदु नीतीश कुमार ही लग रहे थे. एक तरफ डिप्टी सीएम सुशील मोदी मंजू वर्मा के सपोर्ट में खड़े थे, तो दूसरी तरफ बीजेपी नेता सीपी ठाकुर मंजू वर्मा को इस्तीफे की सलाह दे रहे थे.

मंजू वर्मा का इस्तीफा

मंजू वर्मा विवादों में तब आईं जब एक अफसर की पत्नी ने मंत्री के पति पर उंगली उठायी. अफसर की पत्नी का आरोप रहा कि मंजू वर्मा के पति चंद्रेश्वर वर्मा जब भी मुजफ्फरपुर बालिका गृह जाते बाकियों को नीचे छोड़ कर खुद लड़कियों के पास चले जाते थे. अफसर की पत्नी ने सवाल उठाया कि मंजू वर्मा के पति पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

manju vermaमंत्री मंजू वर्मा पर भारी पड़ीं पति की हरकतें!

मंजू वर्मा के पति पर इल्जाम लगने के बाद विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग करने लगा. पहले तो मंजू वर्मा ने पति का बचाव किया और इस्तीफा देने से इंकार कर दिया. खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने मंजू वर्मा का बचाव किया और इस्तीफे की मांग को खारिज कर दिया. नीतीश कुमार पर तो मंजू वर्मा के स्वजातीय होने के चलते भी इस्तीफा न लेने का आरोप लगा था. वैसे इसमें नीतीश का राजनीतिक फायदा भी देखा गया. नीतीश कुमार इस्तीफे का अपयश लेकर बिरादरी में गलत संदेश नहीं देना चाहते थे. वो जानते थे कि जांच जब सीबीआई कर रही है फिर तो पति के घेरे में आने पर मंत्री पर भी सवाल उठेंगे ही - और मंजू वर्मा को इस्तीफा देने की मजबूरी हो जाएगी. तभी सीबीआई ने जांच शुरू कर दिया - और कॉल डीटेल के चलते मंजू वर्मा के पति पर शिकंजा कसने लगा. लिहाजा नीतीश कुमार के पास भी मंजू वर्मा से बुलाकर इस्तीफा लेने के अलावा कोई चारा बचा भी नहीं था.

बीजेपी का डबल गेम

मुमकिन है सुशील मोदी मंजू वर्मा का सपोर्ट कर ये संदेश देने की कोशिश कर रहे हों कि गठबंधन में सब ठीक ठाक है - और सीपी ठाकुर बीजेपी के लिए रास्ता बना रहे हों. एक तरफ बीजेपी सुशील मोदी के जरिये नीतीश कुमार को ये बताने की कोशिश कर रही होगी कि वो उनके साथ खड़ी है. दूसरी तरफ मार्केट में ये ग्राउंड तैयार कर रही होगी कि वो हमेशा गलत चीजों के खिलाफ खड़ी रहती है.

sushil modi, nitish kumarनीतीश के खिलाफ बीजेपी का डबल गेम?

बस इतना ही होता तो नीतीश कुमार और उनकी पार्टी के नेताओं को बीजेपी पर किसी बात का शक नहीं होता. हुआ ये भी कि बिहार के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने मुजफ्फरपुर की घटना को हृदय विदारक बताते हुए कई चिट्ठियां लिख डालीं. हालांकि, इन चिट्ठियों में नीतीश कुमार की तीरीफ भी थी, मसलन - उनकी सरकार ने फौरन एक्शन लिया. साथ ही, सरकार के लिए कई सलाहियत भी रही.

मामला सिर्फ इतना ही होता तो मुश्किल वाली कोई बात नहीं होती. राज्यपाल मलिक ने नीतीश कुमार के साथ ही केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को भी खत लिखे. जो बड़ी बात निकल कर सामने आयी वो रही, राजभवन के अफसरों ने इस बात पर पूरा जोर दिया कि मलिक की चिट्ठियों को मीडिया में पूरा कवरेज मिले. मतलब साफ था - नीतीश कुमार कठघरे में खड़े नजर आयें.

नीतीश की मुश्किल

मुजफ्फरपुर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश सरकार को खूब फटकार लगायी है. कोर्ट की टिप्पणी रही कि ऐसा लग रहा है जैसे ये सब राज्य द्वारा ही प्रायोजित हो - क्योंकि शेल्टर होम चलाने वाले एनजीओ को फंड तो सरकार से ही मिल रहे थे.

मंजू वर्मा पर भी दबाव तब ज्यादा बन गया जब जांच पड़ताल में मालूम हुआ कि उनके पति चंद्रेश्वर वर्मा ने हाल फिलहाल आरोपी ब्रजेश ठाकुर से 17 बार बात की थी. मालूम ये भी हुआ कि कुछ ही दिनों के भीतर चंद्रेश्वर वर्मा नौ बार मुजफ्फरपुर गये थे. ये बात उनके मोबाइल की लोकेशन से कंफर्म हुई.

शक इसलिए भी गहराया कि मुजफ्फरपुर वर्मा का इलाका भी नहीं है. वर्मा सुपौल की रहने वाली हैं, फिर उनके पति को किस काम के सिलसिले में मुजफ्फरपुर इतनी बार जाना पड़ा और ब्रजेश ठाकुर से बात करनी पड़ी.

वैसे ब्रजेश ठाकुर का कहना है कि चंद्रेश्वर वर्मा से उसकी बातचीत सिर्फ राजनीतिक मुद्दों पर हुआ करती थी. साथ ही ब्रजेश ठाकुर का दावा है कि वो कांग्रेस से टिकट लेकर चुनाव लड़ने वाला था - और इस कोशिश में लगा हुआ था.

ये तो साफ है कि नीतीश कुमार मुजफ्फपुर के मामले में चौतरफा घिरे हुए हैं. नीतीश के खिलाफ ऐसी किसी भी स्थिति का बीजेपी पूरा फायदा उठाना चाहेगी. ये बात जेडीयू नेता भी समझ रहे हैं. मीडिया से बातचीत में जेडीयू नेता मान रहे हैं कि बीजेपी जो खेल खेल रही है उससे वे बाखूबी वाकिफ हैं. ऐसे ही एक नेता का कहना है कि बीजेपी चाहती है कि नीतीश कुमार को घेर कर इतना दबाव बनाया जाये कि सीटों के बंटवारे में वो समझौता करने को मजबूर हो जायें. मीडिया से बातचीत में जेडीयू नेता कह रहे हैं कि बीजेपी सीधे ये खेल दिल्ली से खेल रही है. दलील ये है कि पटना में जब सब ठीक ठाक बताया जा रहा है फिर तो इस खेल की स्क्रिप्ट दिल्ली में ही लिखी हुई लगती है.

नीतीश भी जानते हैं कि किस खेल को कैसे लेना है. कब चुप रहना है और कब जबान खोलना है. आखिर तमाम बवाल के बीच राज्य सभा के उपसभापति का पद भी तो नीतीश की पार्टी के ही हिस्से में आया है - आगे जब मौका आएगा तो देखेंगे.

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लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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