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Updated: 16 अप्रिल, 2019 04:02 PM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujmaurya87
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लोकसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान हो चुका है और 18 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग होनी है. चुनावी मैदान में बहुत से ऐसे उम्मीदवार हैं, जो करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं. वहीं कुछ ऐसे भी हैं जिनके खाने के लाले पड़े हुए हैं, लेकिन चुनाव लड़ रहे हैं. तेलंगाना की चेवेल्ला लोकसभा सीट तो पहले चरण में मतदान में इसी वजह से चर्चा में भी आई, क्योंकि वहां सबसे अमीर उम्मीदवार कांग्रेस के कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी को टक्कर देने के लिए सबसे गरीब उम्मीदवार जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर नल्ला प्रेम कुमार चुनाव लड़ रहे थे. अब जीत का सेहरा किसके सिर सजेगा, ये तो 23 मई को आने वाले नतीजे ही बताएंगे.

ये तो सिर्फ एक वाकया है अमीर-गरीब उम्मीदवार का. इस चुनाव में जहां एक ओर बहुत से करोड़पति मैदान में हैं, तो बेहद गरीब लोगों ने भी कमर कसी हुई है. पैसों की कमी पूरी करने के लिए कोई लोगों से पैसे मांग रहा है, किसी को लोग खुद ही चंदा दे रहे हैं तो कोई अपनी किडनी तक बेचने को तैयार है, ताकि चुनाव प्रचार का खर्च उठा सके. एक ओर ये उम्मीदवार हैं जो चुनाव के लिए अपना सब कुछ दाव पर लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे भी उम्मीदवार मैदान में हैं, जो चुनावों को एक खेल समझते हैं और हर बार खेलते हैं, लेकिन जीत नसीब नहीं होती और जमानत जब्त हो जाती है.

गरीब, अमीर, लोकसभा चुनाव 2019एक ओर कन्हैया कुमार क्राउड फंडिंग से पैसे जमा कर रहे हैं, तो दूसरी ओर चुनाव प्रचार का खर्च उठाने के लिए एक उम्मीदवार किडनी तक बेचने को तैयार है.

कैसे-कैसे गरीब उम्मीदवार हैं मैदान में?

लोकसभा चुनाव के पहले चरण में कुल 23 ऐसे उम्मीदवार मैदान में थे, जिनका बैंक बैलेंस जीरो था. जीरो बैलेंस वाले ही एक नेता हैं मंगे राम कश्यप, जिन्होंने पहले चरण में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़ा है. मुजफ्फरनगर में आपको ये बात बताने वाले बहुत से लोग मिल जाएंगे कि वह 2000 से ही लोकसभा के चुनाव लड़ रहे हैं. उनका बैंक बैंलेस जीरो है, लेकिन फिर भी वह चुनावी मैदान में हैं. संपत्ति के नाम पर 5 लाख का एक जमीन का टुकड़ा, 36 हजार की बाइक और 15 लाख का घर है, जो उन्हें ससुराल वालों ने तोहफे में दिया है. बाइक होने के बावजूद मंगे राम पैदल ही लोगों के घर जाकर उनसे वोट मांगते हैं, क्योंकि वह पेट्रोल का खर्च नहीं उठा सकते.

नल्ला प्रेम कुमार के पास सिर्फ 500 रुपए की संपत्ति

पहले चरण के मतदान में ही तेलंगाना की चेवल्ला लोकसभा सीट से जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर नल्ला प्रेम कुमार चुनावी मैदान में थे. उनके पास सिर्फ 500 रुपए की संपत्ति है. आपको बता दें कि इसी सीट से सबसे अमीर प्रत्याशी कांग्रेस के कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी भी चुनाव लड़ रहे हैं, जिनके पास 900 करोड़ की संपत्ति है. इनके अलावा ओडिशा की कोरापुट लोकसभा सीट से सीपीआई (एमएल) के उम्मीदवार राजेंद्र केंडुरका के पास सिर्फ 565 रुपए हैं. वहीं अलांकुटा राजन्ना के पास सिर्फ 1000 रुपए हैं, जो तेलंगाना की निजामाबाद लोकसभा सीट से मैदान में हैं.

दूसरे चरण में सबसे कम संपत्ति घोषित करने वाले उम्मीदवार हैं आंबेडकरी हसनुराम, जो आगरा से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने अपनी कुल संपत्ति 1200 रुपए घोषित की है. वहीं दूसरे नंबर पर हैं फक्कड़ बाबा, जिन्होंने 12,000 रुपए की संपत्ति घोषित की है. आपको बता दें कि फक्कड़ बाबा 16 बार चुनाव हार चुके हैं और अब 17वीं बार वह चुनावी मैदान में हैं. उन्हें उम्मीद है कि वह 20वें चुनाव में जीतेंगे, जैसा कि उनके गुरुजी ने उनसे कहा था. दूसरे चरण में तीसरा सबसे गरीब उम्मीदवार 20 हजार रुपए का मालिक है, जिनका नाम शादाब नूर है. वह फतेहपुर से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार हैं.

चुनाव प्रचार के लिए किडनी बेचने को तैयार

इस लिस्ट में एक नाम किशोर समरीते का भी है, जो मध्य प्रदेश के बालाघाट से निर्दलीय लड़ रहे हैं. वह समाजवादी पार्टी के विधायक रह चुके हैं. इस चुनाव में चुनाव प्रचार के लिए किशोर के पास पैसे नहीं हैं इसलिए उन्होंने चुनाव आयोग से अपनी किडनी बेचने की अनुमति मांगी है, ताकि चुनाव प्रचार के खर्च के लिए पैसे का इंतजाम कर सकें. या वह चाहते हैं कि खुद चुनाव आयोग उन्हें 75 लाख रुपए दे.

कन्हैया कुमार कर रहे क्राउड फंडिंग

जहां एक ओर किशोर समरीते जैसे गरीब उम्मीदवार चुनाव प्रचार के लिए अपनी किडनी तक बेचने को तैयार हैं, वहीं जेएनयू के स्टूडेंट यूनियन के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने स्मार्ट तरीका अपनाया है. बिहार के बेगुसराय से चुनाव लड़ रहे कन्हैया कुमार ने क्राउड फंडिंग के जरिए पैसा जमा करना शुरू किया है, जिसमें इंटरनेट के जरिए लोग चंदा देते हैं. आपको बता दें कि यूरोप में चुनावों में ये बहुत ही लोकप्रिय है, लेकिन भारत में पहली बार 2017 के मणिपुर विधानसभा चुनाव में इरोम शर्मिला ने इसकी शुरुआत की थी और 4.5 लाख रुपए जुटाए थे. इस बार लोकसभा चुनाव में तो कन्हैया कुमार को 5,500 से भी अधिक लोगों ने चंदा दिया है और अब तक वह 70 लाख रुपए से भी अधिक जमा कर चुके हैं.

ये उम्मीदवार भी क्राउड फंडिग के भरोसे

वैसे कन्हैया अकेले नहीं हैं, जो क्राउड फंडिंग से पैसे जमा कर रहे हैं. उनके अलावा नागपुर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे नाना पटोले, दिल्ली में आम आदमी पार्टी से चुनावी मैदान में उतरे राघव चड्ढा और पश्चिम बंगाल की रायगंज सीट से सीपीआईएम के टिकट पर चुनाव लड़ रहे मोहम्मद सलीम (करीब डेढ़ लाख रुपए) भी क्राउड फंडिंग के जरिए ही पैसे जमा कर रहे हैं. इनके अलावा पूर्वी दिल्ली से आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रही आतिशी मारलेना (करीब 50 लाख रुपए) और आंध्र प्रदेश की परचुर सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे पेडापुडी विजय कुमार (करीब 2 लाख रुपए) भी क्राउड फंडिग के सहारे की पैसे जमा कर रहे हैं.

अमीर उम्मीदवारों की भी कमी नहीं

- चुनावी मैदान में उतरे करोड़पति उम्मीदवारों की भी कमी नहीं है. इनमें पहले नंबर हैं कांग्रेस के कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी, जिन्होंने पहले चरण में तेलंगाना की चेवल्ला लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा. उनके पास करीब 900 करोड़ रुपए की संपत्ति है.

- इस लिस्ट में आंध्र प्रदेश की विजयवाड़ा सीट से वाईएसआर कांग्रेस के प्रत्याशी प्रसाद वीरा पोटलुरी भी हैं, जिनकी कुल संपत्ति 347 करोड़ रुपए है.

- आंध्र प्रदेश के नरसापुरम लोकसभा सीट से वाईएसआर कांग्रेस के उम्मीदवार केआर रामा कृष्ण राजू के पास भी 325 करोड़ रुपए की संपत्ति है.

- चुनाव के दूसरे चरण में सबसे अमीर प्रत्याशी हैं मथुरा से भाजपा की सांसद हेमा मालिनी, जिनके पास करीब 250 करोड़ रुपए की संपत्ति है.

- दूसरे चरण में चुनाव लड़ रहे अमीरों में दूसरे नंबर पर हैं अमरोहा से भाजपा के तंवर सिंह और तीसरे नंबर पर हैं मथुरा से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे महेश पाठक.

75 फीसदी उम्मीदवारों के लिए चुनाव बस एक खेल है !

देश के सबसे बड़े लोकतंत्र में बहुत से ऐसे उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में उतरते हैं, जो अपनी जमानत तक नहीं बचा पाते. आपको बता दें कि अगर उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिलते हैं तो उसकी जमानत राशि जब्त हो जाती है. तो फिर ये चुनाव लड़ते क्यो हैं? इनमें कुछ ऐसे होते हैं, जिन्हें पार्टी ने किनारे लगा दिया होता है तो वो बागी होकर वोट काटने के लिए लड़ते हैं. कुछ ऐसे होते हैं जिनके नाम किसी बड़ी पार्टी के प्रत्याशी से मिलते जुलते हैं तो विरोधी पार्टी उन्हें चुनावी मैदान में उतरने का कहते हैं ताकि दूसरी पार्टी के कुछ वोट लोगों के कंफ्यूजन में ही कट जाएं. ऐसे भी बहुत से उदाहरण हैं, जो सिर्फ हारने का रिकॉर्ड बनाने के लिए चुनाव लड़ते हैं. हर बार चुनाव में हारने के लिए खड़े होने वाले डॉ. पद्मराजन इस बार भी मैदान में हैं. लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में उनका नाम भी दर्ज है. पिछले लोकसभा चुनाव में वह पीएम मोदी के खिलाफ लड़े थे और इस बार वह उन्होंने वायनाड से पर्चा भरा है और राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं.

गरीब, अमीर, लोकसभा चुनाव 20192014 के लोकसभा चुनावों में करीब 85 फीसदी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी

1996 तक चुनाव लड़ने के लिए जमानत राशि सिर्फ 500 रुपए होती थी. सिर्फ गंभीर लोग ही चुनाव लड़ें, इसलिए जमानत राशि को 1996 के बाद बढ़ा दिया गया. अब विधानसभा चुनाव के लिए 10,000 और लोकसभा चुनाव के लिए 25,000 रुपए की जमानत राशि देनी होती है, लेकिन बावजूद इसके हजारों उम्मीदवारों की जमानत जब्त होती है. सिर्फ 2014 के लोकसभा चुनाव में ही 85 फीसदी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई थी. इनमें आधे तो निर्दलीय थे और बाकी के आधे राष्ट्रीय पार्टियों के टिकट पर चुनावी मैदान में थे. हर बार लोकसभा चुनाव में औसतन 75 फीसदी उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा पाते, लेकिन चुनाव जरूर लड़ते हैं.

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