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Updated: 20 जनवरी, 2021 11:00 PM
देवेश त्रिपाठी
देवेश त्रिपाठी
  @devesh.r.tripathi
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भारत सरकार ने अपने 'पड़ोसी धर्म' को निभाते हुए आज से भूटान, मालदीव, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार और सेशेल्स को अनुदान सहायता के रूप में (गिफ्ट के तौर पर) कोरोना वैक्सीन की आपूर्ति शुरू कर दी है. सबसे पहले भूटान को कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड की 1.5 लाख डोज भेजी गईं. बांग्लादेश को भी कोविशील्ड की 20 लाख डोज भेजी जानी हैं. इनके सबके बीच पाकिस्तान की नजरें भी भारत में बनी कोरोना वैक्सीन पर है. दरअसल, पाकिस्तान औषधि नियामक प्राधिकरण (डीआरएपी) ने देशभर में कोरोना के मामलों पर काबू पाने के लिए ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोविड-19 वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है. साथ में चीनी वैक्सीन सिनोफार्म कोविड-19 को भी पाकिस्तान ने मंजूरी दे दी है. भारत के साथ अपने रिश्तों पर जमी बर्फ के चलते पाकिस्तान ने फिलहाल आधिकारिक तौर पर कोरोना वैक्सीन को लेकर कोई संपर्क नहीं किया है. ऐसे सवाल ये खड़ा हो रहा है कि क्या भारत में बनी कोरोना वैक्सीन पाकिस्तान को मिल पाएगी.

भारत में बनी वैक्सीन क्यों चाह रहा है पाकिस्तान? 

हालिया सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान में चीन की वैक्सीन की तुलना में भारत में बनी वैक्सीन लोगों को ज्यादा भरोसेमंद लग रही है. पाकिस्तान की अथॉरिटीज को भी चीनी वैक्सीन पर भरोसा नहीं है. चीनी वैक्सीन को लेकर भरोसे की कमी का कारण यह है कि इसके सिर्फ दो क्लीनिकल ट्रायल किए जा रहे हैं. वहीं, इन ट्रायल में सरकारी अधिकारियों को ही शामिल किया जा रहा है. ऐसे में सरकारी अधिकारियों में चीन की वैक्सीन की गुणवत्ता को लेकर भरोसा नहीं बन पा रहा है और लोग कोरोना की चीनी वैक्सीन को लगवाने में डर रहे हैं. इसकी वजह से पाकिस्तान के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है. मामला यह है कि भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार पर लंबे समय से रोक लगी हुई है. इस प्रतिबंध से केवल जीवनरक्षक दवाईयों को ही छूट मिली हुई है. ऐसे में पाकिस्तान के सामने दो ही विकल्प बचे हैं. पहला यह कि पाकिस्तान वैश्विक संगठनों के जरिये भारत की वैक्सीन आने का इंतजार करे या फिर द्विपक्षीय रास्ते से वैक्सीन मंगाए. ऐसे में भारत की वैक्सीन डिप्लोमेसी सफल होती नजर आ रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने पिछले महीने वैक्सीन की खरीद के लिए 15 करोड़ डॉलर की राशि आवंटित की थी. लेकिन, अभी तक वैक्सीन की खरीद का कोई आदेश नहीं दिया है.

पाकिस्तान को भरोसा है कि 2021 की दूसरी तिमाही की शुरूआत में ही उसे कोवैक्स से वैक्सीन की पहली खेप मिल जाएगी.पाकिस्तान को भरोसा है कि 2021 की दूसरी तिमाही की शुरूआत में ही उसे कोवैक्स से वैक्सीन की पहली खेप मिल जाएगी.

वैक्सीन के लिए पाकिस्तान के पास केवल 'दो' ही विकल्प

पाकिस्तान मान रहा है कि उसे डब्ल्यूएचओ और अन्य संगठनों द्वारा बनाए गए वैश्विक संगठन 'कोवैक्स' से भारत में बनी कोवि़ड-19 की वैक्सीन मिल जाएगी. दरअसल, इस संगठन ने पाकिस्तान समेत 190 देशों की 20 फीसदी आबादी को मुफ्त में कोरोना वैक्सीन देने का वादा किया है. पाकिस्तान को भरोसा है कि 2021 की दूसरी तिमाही की शुरूआत में ही उसे कोवैक्स से वैक्सीन की पहली खेप मिल जाएगी. लेकिन, बची हुई 80 फीसदी जनसंख्या के लिए पाकिस्तान को द्विपक्षीय व्यवस्थाएं बनानी होंगी. विकल्प के तौर पर पाकिस्तान किसी तीसरे देश से भारत में बनी वैक्सीन की खरीद कर सकता है. लेकिन, इससे वैक्सीन की कीमत काफी बढ़ जाएगी. व्यापारिक संबंधों में तनाव को देखते हुए भारत की वैक्सीन डिप्लोमेसी दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने में काफी महत्वपूर्ण हो सकती है. पाकिस्तानी अधिकारियों ने हाल में ही बयान दिया था कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका कोरोना वायरस वैक्सीन 90 फीसदी से ज्यादा प्रभावी है. गौरतलब है कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का उत्पादन भारत में हो रहा है. 

सरकार के नेताओं ने भी की छुपे शब्दों में वैक्सीन की तारीफ

प्रधानमंत्री इमरान खान के विशेष सहायक डॉ. फैसल सुल्तान ने कहा कि डीआरएपी ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे दी है. यह वैक्सीन 90 फीसदी से ज्यादा प्रभावी है और हम इसे वैकल्पिक व्यवस्थाओं के जरिये पाने की कोशिश करेंगे. फैसल ने यह भी कहा कि प्राइवेट कंपनियां भी वैक्सीन का आयात कर बिक्री कर सकती हैं. वहीं, इमरान खान सरकार के योजना मंत्री असद उमर ने कहा कि मार्च तक कोरोना वैक्सीन बाजार में उतार दी जाएगी. पाकिस्तान सरकार ने लोगों के मुफ्त में वैक्सीन उपलब्ध कराने की घोषणा की है. ऐसे में पाकिस्तान की संस्थाएं भारत और चीन की वैक्सीन को वरीयता दे रही हैं. उसमें भी भारत में बनी वैक्सीन को उसके प्रभाव और कम मूल्य की वजह से ज्यादा पसंद किया जा रहा है.

भारत सरकार ने अनुदान सहायता के रूप में (गिफ्ट के तौर पर) सबसे पहले भूटान को कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड की 1.5 लाख डोज भेजी हैं.भारत सरकार ने अनुदान सहायता के रूप में (गिफ्ट के तौर पर) सबसे पहले भूटान को कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड की 1.5 लाख डोज भेजी हैं.

भारत निभा रहा है सहयोगी देशों के साथ 'पड़ोसी धर्म' 

भारत ने भी पाकिस्तान को कोरोना वैक्सीन देने की बात नहीं उठाई है. आतंकवाद की वजह से भारत और पाकिस्तान के बीच बिगड़ चुके रिश्ते भी इसके पीछे एक बड़ा कारण हैं. इसके उलट भारत अपने अन्य पड़ोसी देशों की मदद करने में लग गया है. विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, भारत सरकार को पड़ोसी और प्रमुख सहयोगी देशों से भारत निर्मित टीकों की आपूर्ति के लिए कई अनुरोध प्राप्त हुए हैं. इन्हीं को ध्यान में रखते हुए आज कुछ पड़ोसी देशों को वैक्सीन भेजी गई है. विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत की घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से सहयोगी देशों को कोविड-19 टीकों की आपूर्ति की जाएगी. वहीं, श्रीलंका, अफगानिस्तान और मॉरिशस को टीके की आपूर्ति के लिए जरूरी नियामक मंजूरी की इंतजार किया जा रहा है.

पाकिस्तान के कंगाली वाले हालात जगजाहिर

दुनियाभर के संगठनों और देशों के कर्ज में दबे पाकिस्तान के हालात सभी को पता हैं. चीन से लिया कर्ज वापस ना दे पाने की वजह से पाकिस्तान में उसके अप्रत्यक्ष रूप से किए जा रहे अतिक्रमण से इमरान सरकार की स्थिति का पता लगाया जा सकता है. वहीं, पाकिस्तान अपने देश की जनता के लिए क्या कुछ कर गुजरेगा, इसका अंदाजा इस उदाहरण से लगाया जा सकता है. जब चीन के वुहान शहर में कोरोना काल में पाकिस्तानी छात्र फंसे हुए थे. तब पाकिस्तान ने उन्हें उनके ही हाल पर छोड़ दिया था. वहीं, भारत सरकार ने मानवता का परिचय देते हुए इन पाकिस्तानी छात्रों को एयरलिफ्ट करने की बात कही थी. भारत ने इसी दौरान केवल दो दिनों में 640 भारतीय और सात मालदीव के नागरिकों को एयरलिफ्ट किया था. वैसे आतंकिस्तान के नाम से विश्वभर में प्रसिद्ध पाकिस्तान शायद ही सुधरे. लेकिन, पाकिस्तान अपने निजी हितों से ऊपर उठकर मानवता को तरजीह देता है, तो शायद बात आगे बढ़ सकती है. 

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