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Updated: 05 जनवरी, 2019 02:16 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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अक्सर ही कुछ न कुछ तूफानी करके चर्चा में रहने वाली यूपी पुलिस, अपने एक सब इंस्पेक्टर के कारण एक बार फिर सुर्ख़ियों में है. बदमाशों से हुई मुठभेड़ में सब इंस्पेक्टर घायल हुआ है. हो सकता है कि इसे पढ़कर व्यक्ति ये सोचे कि इसमें ऐसा क्या खास है? तो बताया जरूरी है कि, जो सब इंस्पेक्टर बदमाशों के निशाने पर आया है वो और कोई नहीं बल्कि वही एसआई मनोज हैं जो अभी कुछ दिन पहले तब सुर्ख़ियों में आया था जब उसने मुंह से ठांय-ठांय की आवाज निकाली थी.

यूपी पुलिस, एनकाउंटर, घायल, उत्तर प्रदेश, बदमाश      एएसआई मनोज तब चर्चा में आए थे जब इन्होंने बदमाशों को डराने के लिए मुंह से ठांय-ठांय की आवाज निकाली थी

तब अपने मुहं को थ्री नॉट थ्री बनाकर बनाकर बदमाशों से लोहा लेने वाले इस एसआई ने न सिर्फ सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरी थीं. बल्कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी घटना का संज्ञान लेकर एसआई की सूझबूझ की तारीफ की थी और पुलिस महकमे ने इसे प्रमोशन दिया था.

खबर है कि यूपी के अलियानेकपुर गांव में हुए एक एनकाउंटर में सद्दाम नाम के क्रिमिनल को पकड़ने के दौरान सब-इंस्पेक्टर मनोज घायल हुए हैं. उनके हाथ में गोली लगी है. बताया जा रहा है कि खूंखार अपराधी सद्दाम लूट, चोरी और हत्या के प्रयास जैसे 15 मामलों में वॉन्टेड था. गोली लगने के चलते घायल मनोज अस्पताल में हैं जहां उनका इलाज चल रहा है. इन सारी बातों के बाद सवाल ये उठ रहा है कि जो आदमी सिर्फ  ठांय-ठांय की बदौलत खतरनाक अपराधियों से लोहा लेकर रातों रात स्टार बन जाए वो आखिर घायल हुआ कैसे?

यूपी पुलिस, एनकाउंटर, घायल, उत्तर प्रदेश, बदमाश   अस्पताल में इलाज करवाते दरोगा जी

पुराने मामले को ध्यान में रखकर हमने इस मामले की पड़ताल की. नतीजा ये निकला कि, चूंकि जनवरी का महिना है और ठंड बहुत है, इसलिए दरोगा जी इस हादसे का शिकार हुए हैं. जी हां सही सुन रहे हैं आप. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अगर मार्च, अप्रैल, मई, जून होता तो बात अलग होती. ये जनवरी की ठंड है जो इंसान की आवाज तक जमा देती है. शायद इस बार सही से मुंह से आवाज निकल नहीं पाई जिस कारण ठांय-ठांय भी संभव न हुई और बदमाशों को मौका मिल गया और नौबत दरोगा जी के अस्पताल पहुंचने तक आ गई. या हो ये भी सकता हो कि पुलिस वालों के विपरीत बदमाशों को अपने मुखबिर से दरोगा जी के आने की सूचना मिल गई हो और उन्होंने चालाकी दिखाते हुए कान में रुई डाल ली हो.

बहरहाल हुआ जो भी इसे या तो दरोगा जी बेहतर जानते हैं या फिर बदमाश. बात बस इतनी है कि दरोगा जी को अपने को यूपी पुलिस का दरोगा समझना चाहिए. कई बार ऐसा होता है कि हम फैंटम बनना तो चाहते हैं मगर हमें सर्दी लग जाती है और फिर अस्पताल में भर्ती होने के बाद, दवाइयां खाकर और इंजेक्शन लगवाकर हमारा इलाज चलता है. 

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या तो हम पुलिस वालों का मज़ाक़ उड़ाते हैं या फिर उन्हें गालियां देते हैं!

यूपी पुलिस अब अपना चेहरा बचाने और चमकाने में लग गई है

               

लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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