New

होम -> सिनेमा

 |  5-मिनट में पढ़ें  |  
Updated: 22 जनवरी, 2021 08:28 PM
मुकेश कुमार गजेंद्र
मुकेश कुमार गजेंद्र
  @mukesh.k.gajendra
  • Total Shares

किसी फिल्म या वेब सीरीज के जरिए विवाद और फिर विवाद के जरिए प्रचार पाने का सस्ता तरीका आम होता जाता रहा है. धर्म और जाति जैसे संवेनशील मुद्दों को छेड़कर पहले आक्रोश पैदा करना और फिर खुद को घिरता देख माफी मांग लेने का चलन भी बहुत पुराना हो चुका है. ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम पर दिखाई जा रही वेब सीरीज 'तांडव' इसका ज्वलंत उदाहरण है. इस वक्त 'तांडव' का हर जगह विरोध हो रहा है. इसे बैन करने की मांग हो रही है. उत्तर प्रदेश में तो एफआईआर दर्ज करके पुलिस की एक टीम जांच के लिए मुंबई तक रवाना कर दी गई है. पुलिस टीम अमेजन प्राइम इंडिया की ओरिजिनल कंटेंट हेड अरुणा पुरोहित, सीरीज के डायरेक्टर अली अब्बास जफर, प्रोड्यूसर हिमांशु कृष्ण मिश्रा और राइटर गौरव सोलंकी के खिलाफ जांच और पूछताछ करेगी.

untitled-1-650_012121053017.jpg'तांडव' के निर्देशक अली अब्बास जफर ने माफी मांगी है.

सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक लोगों में गुस्सा दिख रहा है. ऐसे में इस मामले में खुद को फंसता हुआ देख 'तांडव' के निर्देशक अली अब्बास जफर ने माफी मांगी है. इतना ही नहीं अब वेब सीरीज में जरूरी बदलाव की बात भी कह रहे हैं. लेकिन क्या केवल माफी मांग लेने भर से ऐसे विवाद हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे? क्या भविष्य में फिर कोई निर्माता-निर्देशक ऐसी हिमाकत नहीं करेगा? क्या विवाद के जरिए चरम प्रचार पाने और उससे पैसा कमाने का हथकंडा भविष्य में बंद हो जाएगा? इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यही है. क्योंकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है.

'तांडव' से पहले भी कई वेब सीरीज और फिल्मों पर धार्मिक और जातिगत भावनाओं से खिलवाड़ करने के आरोप लग चुके हैं. इस फेरहिस्त में कई नाम शामिल हैं. पिछले साल रिलीज हुई फिल्म 'सड़क 2' और वेब सीरीज 'आश्रम', 2018 में रिलीज हुई फिल्म 'पद्मावत', साल 2014 'पीके', 2015 में 'धर्म-संकट में' और 'वॉटर', 2012 में 'ओह माय गॉड' और 'सन ऑफ सरदार', 2008 में 'सिंह इस किंग', 2009 में रिलीज हुई 'लव आज कल' और 'कमीने' आदि फिल्मों को लेकर काफी हंगामा हुआ था. विरोध हुआ था. लेकिन हर बार की तरह माफी मांग ली गई और प्रचार पाने के इस सस्ते तरीके को बार-बार दोहराया जाता रहा है.

साल 2020 में डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज हुई फिल्म सड़क 2 काफी विवादों में रही थी. इस फिल्म का पोस्टर सामने आते ही आलिया भट्ट, मुकेश भट्ट और महेश भट्ट के खिलाफ गुरुग्राम के सिकंदरपुर में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में शिकायत कराई गई थी. शिकायतकर्ता आचार्य चंद्र किशोर ने मेकर्स पर आरोप लगाया था कि पोस्टर में कैलाश मानसरोवर का गलत तरह से इस्तेमाल किया गया है. ओटीटी प्लेफॉर्म एमएक्स प्लेयर पर रिलीज हुई प्रकाश झा की वेब सीरीज 'आश्रम' भी विवादों से बच नहीं सकी थी. 'आश्रम' सीरीज के दोनों भागों को लेकर विवाद हुआ था. इस पर साधु-संतों कि गलत छवि दिखाकर हिंदू धर्म को बदनाम करने का आरोप लगा और बैन करने की मांग उठने लगी थी.

इसी तरह आमिर खान की फिल्म पीके और परेश रावल की फिल्म ओह माय गॉड पर भी हिन्दू धर्म के अपमान का आरोप लगा था. पीके में आमिर खान जहां हिन्दू धर्म का माखौल उड़ाते नजर आए थे, तो वहीं ओह माय गॉड में परेश रावल भी धर्म पर सवाल खड़े करते नजर आए. फिल्म में अपना निजी नुकसान होने से नाराज होकर कांजी यानी परेश रावल भगवान के खिलाफ केस दर्ज कर देते हैं. कोर्ट केस के दौरान उनके द्वारा कई नाजुक मुद्दे उठाए गए, जिससे फिल्म काफी विवादों में आ गई थी. देश के कई शहरों में भगवान और धर्म का अपमान करने के आरोप में मेकर्स के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई थी. इसी तरह संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत पर भी राजपूतों के जातीय मान हानि का आरोप लगा था.

किसी का अपमान, उसकी मान हानि या उसकी भावनाओं पर प्रहार करके, उसे आक्रोशित करना फिल्म इंडस्ट्री के लिए प्रचार का नया हथियार बन गया है. ऐसा हथियार जो बिना फूटी कौड़ी खर्च किए करोड़ों का फायदा पहुंचाता है. इनको पता है कि मामला ज्यादा गंभीर हुआ तो 'माफी' मांग लेंगे. बहुत हुआ तो नाम या दृश्य में थोड़ा बदलाव कर देंगे. इसके बाद तो लोगों का गुस्सा वैसे ही शांत हो जाएगा, हां वो अलग बात है कि तबतक इनको इनका फायदा मिल चुका होगा. लेकिन, आखिर ये सब कबतक चलेगा?

वेब सीरीज तांडव का ट्रेलर...

क्या माफी मांग लेने या विवादित अंश में बदलाव कर देने भर से बात खत्म हो जाती है? शायद नहीं! सही मायने में होना तो ये चाहिए कि केवल विवादित अंश ही नहीं, संबंधित फिल्म या वेब सीरीज को ही पूरी तरह से बैन कर देना चाहिए. ताकि लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत होने से बचाया जा सके. धर्म प्रतीक देवी-देवताओं को इस तरह के अपमान से बचाया जा सके. यदि ऐसा हुआ तो यकीन कीजिए भविष्य में कोई भी निर्माता-निर्देशक ऐसा विवाद खड़ा करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा. इसलिए वेब सीरीज 'तांडव' को बैन करके सरकार को एक नजीर पेश करनी चाहिए. ऐसी नजीर जो फिल्म इंडस्ट्री के इतिहास में दर्ज हो जाए.

बताते चलें कि 14 जनवरी को अमेजन प्राइम पर रिलीज हुई वेब सीरीज 'तांडव' में बॉलीवुड एक्टर सैफ अली खान, जीशान अयूब, गौहर खान मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि डायरेक्शन अली अब्बास जफर ने किया है। फिल्म में एक प्ले के दौरान जीशान अय्युब ने भगवान शिव की भूमिका निभाई है. इस दौरान एक दृश्य में वह मजाक करते और गाली देते हुए नजर आ रहे हैं. ये सीन देखने के बाद सोशल मीडिया पर लोग अपना आक्रोश जाहिर कर रहे है. देश भर में कई जगह मेकर्स के खिलाफ शिकायत दर्ज की जा चुकी हैं. लोगों का आरोप है कि वेब सीरीज में जातियों को छोटा बड़ा दिखाकर उनमें विभाजन करने की कोशिश की गई है. यही नहीं महिलाओं को अपमानित करने वाले दृश्य भी हैं. प्रधानमंत्री जैसे गरिमामय पद को ग्रहण करने वाले व्यक्ति का चित्रण भी बेहद अशोभनीय ढंग से किया गया है. वेब सीरीज शासकीय व्यवस्था को भी क्षति पहुंचा रहा है.

#तांडव, #सैफ अली खान, #अमेजन प्राइम, Tandav Web Series, Tandav Controversial Scene, Zeeshan Ayyub

लेखक

मुकेश कुमार गजेंद्र मुकेश कुमार गजेंद्र @mukesh.k.gajendra

लेखक इंडिया टुडे ग्रुप में सीनियर असिस्टेंट एडिटर हैं.

iChowk का खास कंटेंट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक करें.

आपकी राय