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 |  3-मिनट में पढ़ें  |   12-09-2017
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आईफोन 8 में सिक्योरिटी को लेकर कई नए फीचर्स आने वाले हैं. अगर देखा जाए तो इस बार का आईफोन सबसे महंगा होने के साथ-साथ सबसे सिक्योर भी कहा जाएगा. फेशियल रिकॉग्निशन, फिंगरप्रिंट स्कैनर जैसे फीचर्स जहां यूजर की सिक्योरिटी और प्राइवेसी के लिए बेहतर होते हैं वहीं ऐसे फीचर्स कुछ लोगों के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं.

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दरअसल, अब आईफोन X के साथ-साथ iOS 11 भी रोलआउट होगा. सिक्योरिटी फीचर्स की बात करें तो इसके साथ ही दो ऐसे फीचर्स आएंगे जिसके कारण शायद पुलिस वालों और सुरक्षा एजेंसियों को कोई भी केस सुलझाने में और दिक्कत हो सकती है. ऐसे दो फीचर्स iOS 11 के साथ अपडेट हो जाएंगे जो सुरक्षा एजेंसियों का काम मुश्किल कर सकते हैं.

पहला फीचर:

आईओएस 11 के साथ फिंगरप्रिंट सेंसर को और सुरक्षित बना दिया गया है. आईफोन के पुराने मॉडल्स जिसमें आईओएस 11 अपडेट होगा और फिंगरप्रिंट सेंसर है उनमें एक नया फीचर जुड़ जाएगा. होगा ये कि 5 बार फिंगरप्रिंट सेंसर पर लगातार उंगली लगते ही फोन लॉक हो जाएगा और उसमें पासकोड डालना होगा और पासकोड डाले बिना वो ओपन नहीं होगा.

ये तब काम का साबित हो सकता है (मुजरिमों के लिए) जब उन्हें पता हो कि उनका फोन फॉरेंसिक जांच के लिए जा सकता है. पुलिस वाले उंगली रखवा कर फोन तो खुलवा सकते हैं, लेकिन अगर पासवर्ड डलवाना हो तब कैसे करेंगे.

दूसरा फीचर:

इसके पहले अगर आईफोन को किसी कंप्यूटर से कनेक्ट किया जाता है तो पहले सिर्फ एक पॉपअप मैसेज आता था जिसमें लिखा होता था कि क्या आप इस सिस्टम पर भरोसा करते हैं. यूजर हां वाला ऑप्शन सिलेक्ट करता था और काम हो जाता था, लेकिन टेक साइट मैशाबल की रिपोर्ट के अनुसार अब आईओएस 11 की अपडेट के बाद आईफोन को सिस्टम से कनेक्ट करना और सुरक्षित हो जाएगा.

अब सिर्फ पॉप अप मेनु पर क्लिक करने से काम नहीं चलेगा. अब यूजर्स को पासकोड भी डालना पड़ेगा. यानि डबल वेरिफिकेशन. डिजिटल टूल मैनुफेक्चरर कंपनी ElcomSoft ने अपने ब्लॉग पोस्ट में लिखा है कि अब सिर्फ आईफोन को किसी अन्य सिस्टम से कनेक्ट करने में ही दो स्टेप का प्रोसेस पूरा करना होगा.

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खास बात ये है कि इस वेरिफिकेशन के लिए सिर्फ पासकोड ही लगेगा और फिंगरप्रिंट ऑथेंटिकेशन काम नहीं करेगा.

अब खुद सोचिए अगर पुलिस के पास किसी अपराधी का फोन आया, उसे फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया तो उसकी जांच करना कितना मुश्किल होने वाला है.

वो एफबीआई और एपल का केस तो याद ही होगा आपको. एक मुजरिम सैयद फारुक जिसपर 14 लोगों को मारने का इल्जाम था उसका फोन अनलॉक करवाने के लिए एफबीआई को कोर्ट तक जाना पड़ा था. एपल ने फोन अनलॉक करने से मना इस तर्क पर किया कि इसके लिए उन्हें एक सॉफ्टवेयर कोड लिखना होगा और ये किसी मास्टर की (Key) की तरह काम करेगा. यानि वो हजारों लाखों आईफोन्स को अनलॉक कर सकेगा और एफबीआई आगे भी किसी भी यूजर का डेटा देख सकेगी. इससे यूजर्स की प्राइवेसी को खतरा है.

एफबीआई ने उस समय भी ये तर्क दिया था कि आईफोन के सिक्योरिटी फीचर्स के कारण अपराधियों के फोन को टेस्ट करना बहुत मुश्किल होता है. इसी पर एपल का कहना था कि अगर वो ऐसे फीचर्स नहीं रखेगा तो हैकर्स से आम लोगों का डेटा बचाना मुश्किल हो जाएगा.

यही कारण है कि आईफोन के नए सिक्योरिटी फीचर्स पुलिस वालों को थोड़ा परेशान कर सकते हैं.

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