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 |  3-मिनट में पढ़ें  |   20-04-2017
सरवत फातिमा
सरवत फातिमा
  @ashi.fatima.75

अपनी बीवियों को मारने-पीटने, उनको प्रताड़ित करने वाले पुरुष किसी दूसरी दुनिया में नहीं बसते बल्कि वो हमारे और आपके बीच ही रहते हैं. कभी-कभी तो सभ्य, अच्छे पढ़े-लिखे और सफल व्यक्ति का चोला पहने हुए भी होते हैं.

ऐसे ही एक हाई-प्रोफाइल सीईओ की घिनौनी सूरत सामने आई है. सिलिकॉन वैली के एक स्टार्ट-अप क्यूबरोन के सीईओ अभिषेक गट्टानी को दस साल तक अपनी पत्नी को यातना देने और उसे प्रताड़ित करने का दोषी पाया गया. जी हां सही पढ़ा आपने. दस सालों से वो अपनी पत्नी के साथ मार-पीट कर रहा था और उसे प्रताड़ित कर रहा था. थोड़ा उनकी पत्नी के बारे में भी जान लीजिए. अभिषेक की पत्नी नेहा रस्तोगी कोई आम महिला नहीं बल्कि दुनिया में अपने फोन से तहलका मचाने वाली एप्पल कंपनी में इंजीनियर रह चुकीं हैं. इतने सालों तक अपने पति का अत्याचार सहने के बाद अंततः नेहा ने अधिकारियों के सामने अपना दुख बयान किया.

महिला, घरेलु हिंसा, शोषणव्हाइट कॉलर वाले का गंदा काम

वेबसाइट हफिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता नेहा रस्तोगी ने पिछले हफ्ते अदालत में अपनी शादी को एक भयावह सपना बताया. नेहा ने कहा- 'उसने मुझे मारा. हर घटना के दौरान उसने मुझे हर जगह मारा. चेहरे, बांहों, सिर, पेट पर हर जगह मारा. यही नहीं उसने मेरे बाल खींचे और मुझे गालियां दी. मुझे कुतिया, वेश्या, कुलटा, हरामज़ादी और भी बहुत कुछ कहा. यहां तक की उसने मुझे तब भी मारा जब मैं गर्भवती थी और सजा के रूप में लंबे समय तक खड़े होने के लिए मजबूर भी किया.'

लेकिन नेहा रस्तोगी के इस डरावने सच से ज्यादा परेशान करने वाली जो बात है वो ये कि अपने साथ हुए अत्याचार का वीडियो कोर्ट को सबूत के तौर पर देने के बावजूद अभिषेक गट्टानी को बहुत ही हल्की सजा दी गई. असल में अदालत ने नेहा रस्तोगी के साथ हुए घरेलु हिंसा की घटनाओं को सिर्फ 'दुर्व्यवहार' करार दिया. सोने पर सुहागा ये कि खुद गट्टानी ने भी अपनी पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन भी नहीं किया था.

और अगर आपका और हमारा खून खौलने के लिए ये काफी नहीं था तो कैलिफ़ोर्निया के सैंटा क्लारा सुपीरियर कोर्ट के जज ने सबूत को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए नेहा के साथ हुए घरेलु हिंसा को 'गुस्से में छूने' का लेबल लगा दिया. ये बात मेरी समझ से परे है कि कैसे धरती पर कहीं भी और किसी भी कोने में किसी को मारना सिर्फ गुस्से में छूना कहलाता है और कैसे? यही नहीं अगर ऐसा है तो इस तर्क के हिसाब से दुनिया में कहीं भी, कभी भी घरेलू हिंसा का कोई भी मामला कोर्ट तक नहीं पहुंचेगा. न्याय की बात तो भूल ही जाइए.

जज को उसके बयान के लिए अभिषेक गट्टानी अपने रोम-रोम से थैंक्स कह रहा होगा. क्योंकि अब उसे भारत वापस लौटा दिए जाने का कोई खतरा नहीं है और उसे सिर्फ 30 दिन जेल की ही सजा काटनी होगी. जरा सोचिए दस सालों तक अपनी पत्नी को प्रताड़ित करने की सजा सिर्फ 30 दिन की जेल! पता नहीं किस दुनिया में रहते हैं हम.

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सरवत फातिमा सरवत फातिमा @ashi.fatima.75

लेखक इंडिया टुडे में पत्रकार हैं

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