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 |  5-मिनट में पढ़ें  |   12-08-2017
रमा सोलंकी
रमा सोलंकी
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कुछ गौरक्षक डंडे और झंडे के दम पर सांसे चलने का इंतज़ाम कर देते...देखो न साहेब दम घुटने से आदमी के बच्चे मर गए!!

कितनी कीमत लगाएँगे मासूम मौतों की योगी जी? बच्चे मरे हैं साहेब, वो भी गरीब के..सस्ती ही होंगी लाशें उनकी!

साहेब सूबे के पुराने मुखिया ने कोख की कीमत लखनऊ से 20 लाख लगायी है, आप भी अपना दाम बता दीजिये न ? सुना है लाश की कीमत इस सूबे में जिंदा से ज्यादा मंहगी है.

गोरखपुर, बच्चे, अस्पताल

काश! औरत की कोख से गाय पैदा होती तो गरीब की मौत सांसे रूकने से नही होती. ये घुटन ऑक्सीजन सिलेंडर के बंद होने की नहीं योगी जी, उस सत्ता की है, उस सियासत की है जो एक हफ्ते तक बस यह फैसला नहीं कर पायी कि 70 लाख की कीमत कौन देगा?

मुबारक हो आपके कुछ लाख बच गए और किसी गरीब ने उफ्फ़ तक नहीं की, समझ गए न आप गरीब की चमड़ी ही नहीं संवेदना भी मोटी होती है. करीब तीस लाशें आपके शहर गोरखपुर से निकली हैं. कुछ शमशान जायेंगी और कुछ चिता पर. कुछ तो गंगा की गोद में कहीं किनारे लग जाएगी योगी जी.

मासूम लाश का कोई मज़हब नही होता. पर हां, एक मां का मजहब उसकी औलाद होती है.

घुटन से मौत हुई है...सही बोलूँ तो गला घोंटकर प्रशासन की लापरवाही ने इन बच्चों को मारा है, इरादतन हत्या हुई है इन बच्चों की मेरी नज़र में. आप सबूत माँगेंगे न?

सुनिए साहेब!! ऑक्सीजन का बजट आ गया है जल्दी ही भुगतान कर दिया जाएगा, रही ऑक्सीजन सप्लाई की बात अभी ऑक्सीजन पर्याप्त है, ऑक्सीजन सिलेंडर पर्याप्त मात्रा में है.

यह बात इस बीआरडी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के माननीय प्रिंसिपल महोदय राजीव मिश्रा के मुख से निकली है. जहां से ऑक्सीजन आती है उस फर्म का करीब 70 लाख बकाया था और एग्रीमेंट में क्या शर्त थी कि 10 लाख से अधिकतम बकाया नहीं रखा जा सकता.

तो भुगतान क्यों नहीं हुआ?

करीब 6 महीने से लगातार फर्म पुष्पा सेल्स और आपके संस्थान, प्रशासन, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा, डीएम के बीच पत्राचार चल रहा था इस विवाद को लेकर और उसका नतीजा करीब 30 मासूम बच्चों की मौत.वाह!! उस पर भी लड़ाई लाशों की गिनती पर है 7 मरे या 30, चाहें एक मरा हो पर लापरवाही किसकी है, जबाबदारी किसकी है?

लगातर यह फर्म चेतावनी दे रही थी कि गैस सप्लाई बंद कर दी जाएगी और आपके जिलाधिकारी यह आश्वासन की बकाया राशि चुका दी जाएगी और आपको लखनऊ में पता भी नहीं चला, आपको जानकारी भी नहीं मिली. ये कैसा सूचना तंत्र है आपका योगी जी, आपकी गौशाला में एक गाय अगर खाना नहीं खाती तो आप लखनऊ से गोरखपुर पहुंच जाते है, यहां तीस आदमी के बच्चे मरे है, आदमी के!

बोलिए न आप, अब क्या इस पर होगी सीबीआई जांच?

ठीक 24 घंटे पहले लिक्विड ऑक्सीजन की रेटिंग 900 पर पंहुच गई थी और आप ठीक दो दिन पहले गोरखपुर दौरे पर थे, अस्पताल गए थे.

- आपको कोई जानकारी नहीं दी गई?- और ऐसे हालात थे तो क्या आपको इस प्रशासनिक हालात का जायजा नही लेना चाहिए था?- अस्पताल में इतना बड़ा पैसों को लेकर विवाद चल रहा था और आपको ख़बर ही नहीं, भनक ही नहीं लगी?

सवाल तो बहुत है पर जवाब एक 'लापरवाही'

करीब 19 बरस आपने गोरखपुर से दिल्ली की दूरी तय की योगी जी, यह दिमागी बुखार की बिमारी नई नहीं थी, आपने प्रयास भी किए होंगे मगर परिणाम क्या रहा. 19 मार्च 2017 को आप प्रदेश के मुखिया बने, एक लम्बा सफर गोरखपुर से लखनऊ तक का पर विपक्ष पर आरोप लगाने के अलावा क्या कदम उठाए गए. कल सुबह न जाने कितने अधिकारियों पर गाज़ गिरेगी, सस्पेंड होंगे और कुछ करियर टंग डिप्लोमेट मुआवजे की राशि तय करेंगे, लाशों की कीमत तय की जाएगी, बहुत सारे ट्वीटर टटर टटर करेंगे..पर कंपनी पर कार्यवाही होगी और बकाया बकायदा ऐसे चुकाया जाएगा.

और हर बार की तरह यह आपकी कार्यवाही होगी...अधिकारियों का निलंबन और आपकी गुड एक्शन मीटिंग. आपकी गलतियों की बलि चढ़ेंगे सूबे के अधिकारी. एक बात तो बात सपाट है आपकी आठ महीने की सरकार मे अधिकारी ऐसे सस्पेंड होते है जैसे रोज़ कलेंडर की तारीख बदलना.

यह जुमला नहीं योगी जी, आने वाले वक्त का आप पर अविश्वास है.

गोरखपुर, बच्चे, अस्पताल

आप मुख्यमंत्री हैं तो आपकी ही जवाबदेही होगी, आपने यह फरमान तो जारी कर दिया कि मदरसों मे झंडा फहराया जाएगा, राष्ट्रगान गाया जाएगा. ये आदेश क्यों नही जारी किया कि ऑक्सीजन सप्लाई के लिए पैसे तुरंत प्रभाव से चुकाये जाएं.

माननीय मुख्यमंत्री जी देश वेंटिलेटर पर नहीं था, मासूम जाने वेंटिलेटर पर थे. गाय हमारी माता है, जी बिल्कुल है और यह सम्मान भी है पर जो आदमी के बच्चे की माता है उसका भी सम्मान होना चाहिए. कढ़वी है पर बात सपाट है यूपीएससी में उत्तर प्रदेश काडर काले पानी की सजा बन गया है, आपका मूड बस खराब हो, आपको बात समझ न आए, आपकी मर्जी और फिर क्या अधिकारी सस्पेंड.

उम्मीद है आप जागे होंगे, मुख्यमंत्री निवास की बत्ती नहीं बुझी होगी, अलग-अलग आला अधिकारी आपको तर्कों और मौतों के सरकारी आंकड़ों में उलझा रहे होंगे, कुछ तो आपके बयान तैयार कर रहे होंगे. बड़े जादूगर होते हैं मुख्यमंत्री के आसपास के लोग, जादू की छड़ी धुमाते है और सब कुछ छूमंतर. पर कोई आपको नहीं बोलेगा सीएम साहब "सच ये है की गलती हुई है". उनके भी तो बाल बच्चे हैं जिनका दर्द सीने से पेट तक आता है और वो गरीब के बच्चे महज़ सरकारी रजिस्टर पर लिखा आंकड़ा हैं.

आप उत्तर प्रदेश के मुखिया हैं, उम्मीदें भी आपसे होंगी और शिकायत भी. ज़रा दिल पर हाथ रखकर सोचिएगा, एक आधी पसली का बाप दो लाशें लेकर आपके गोरखपुर की सड़कों पर अस्पताल से निकल रहा होगा. एक अपने मासूम बच्चे की और दूसरी उसकी मां की जिंदा लाश.

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लेखक

रमा सोलंकी रमा सोलंकी @rama.solanki.7

लेखिका Hallabole.com की मैनेजिंग एडिटर हैं

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