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 |  3-मिनट में पढ़ें  |   15-08-2017
श्रुति दीक्षित
श्रुति दीक्षित
  @shruti.dixit.31
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सबसे ज्‍यादा पढ़े-लिखे लोगों वाला राज्‍य केरल पियक्‍कड़ाें पर नकेल कसने को लेकर एक से बढ़कर एक कोशिश करता है. केरल सरकार पीने वालों के लिए राशनिंग का प्रावधान भी कर चुकी है. लेकिन अब उसने जो नया पैंतरा अपनाया वह चर्चा का विषय बन गया है.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक नए मोटर वेहिकल ड्राइविंग रेगुलेशन 2017 में ये साफ लिखा है कि हर ड्राइवर को नियम और कायदे मानने होंगे जो शराब, ड्रग्स, सिगरेट आदि के सेवन के विरुद्ध हैं. इसी के साथ, ये भी ध्यान रखना है कि उनके साथ जो भी जा रहा है वो भी इसका सेवन ना करे.

टैक्सी, ओला, शराब

इस सेक्शन में ये भी लिखा हुआ है कि ये ड्राइवर की जिम्मेदारी है कि उसके साथ जाने वाला इंसान भी शराब ना पिए हुए हो. मतलब पहले तो ये था कि ड्राइवर को तब सजा मिलेगी जब वो खुद शराब पीकर गाड़ी चलाएगा, लेकिन अब तो ये है कि अगर साथ वाले ने भी शराब पी है तो उन्हें भी गाड़ी में नहीं बैठाएंगे. नया रूल ये कहता है कि अगर पैसेंजर ने शराब पी है और टैक्सी ड्राइवर को ये पता है तो टैक्सी ड्राइवर के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी.

क्या है सच?

पहले ये खबर वायरल हो रही थी कि ये फैसला केंद्र सरकार ने दिया है. और लोग इसे शेयर किए जा रहे थे. सोशल मीडिया पर इसको लेकर बवाल भी मच रहा था. तफ्तीश करने पर पता चला कि ये असल में केंद्र सरकार का नोटिस नहीं है बल्कि ये केरल ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री का आदेश है. न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने केरल के मोटर वेहिकल डिपार्टमेंट के सीनियर डेप्यूटी कमिशनर का एक बयान भी पब्लिश किया था जिसमें कहा गया था कि 'ये ड्राइवर की जिम्मेदारी होगी कि उसके साथ बैठे पैसेंजर ने कहीं शराब तो नहीं पी है, अगर पी है तो ड्राइवर को बुक किया जाएगा.'

तो चलिए ये तो साफ हो गया कि ये खबर केंद्र की नहीं सिर्फ केरल की है, लेकिन फिर भी ये बहस का विषय तो है. इसमें दो बातें ध्यान देने योग्य हैं...

टैक्सी, ओला, शराब

1. ड्राइवर की जिम्मेदारी है ये कि कौन पिया हुआ है या कौन नहीं इसे देखे.

2. मतलब जो लोग शराब पिए हुए हैं वो ना खुद गाड़ी चलाएं और ना ही कैब से जाएं, तो इसका मतलब क्या हुआ? सड़क पर ही रहें या पैदल चलें?

अब अगर सड़क पर रहते हैं तो भी खतरा है और पैदल चलते हैं तो भी खतरा... दोनों जगह या तो पुलिस शराबी कहकर पकड़ लेगी, या फिर कहीं एक्सिडेंट हो सकता है, गुंडे पकड़ सकते हैं या फिर ऐसा कुछ भी हो सकता है. ऐसे में क्या ये सही फैसला है कि एक सुरक्षित रास्ते को भी बंद कर दिया जाए? मैं शराब पीने वालों का समर्थन नहीं कर रही हूं, लेकिन जो पीते हैं वो सही सलामत घर पहुंचें ये भी तो जरूरी है ना?

मोटर वेहिकल बिल लंबे समय से अटका हुआ है. ये बिल 30 साल पुराने मोटर वेहिकल एक्ट को बदलता है. पर कैसे बदलता है ये भी तो देखने का विषय है ना? किसी भी मामले में अगर किसी इंसान के लिए कोई खतरा पैदा हो जाए ऐसे नियम कायदे को सही तो किसी भी हालत में नहीं माना जा सकता है. शराब छुड़वाने या फिर किसी भी तरह का नशा करने से रोकने के लिए कई तरीके हो सकते हैं, लेकिन ऐसा तरीका जिससे इंसानों के लिए खतरा पैदा हो जाए सरासर गलत है.

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लेखक

श्रुति दीक्षित श्रुति दीक्षित @shruti.dixit.31

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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