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 |  4-मिनट में पढ़ें  |   17-02-2017
पारुल चंद्रा
पारुल चंद्रा
  @parulchandraa
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यौन शोषण, बलात्कार, गैंग रेप भले ही रोज की ही बात हो, लेकिन एक चीज जो नहीं बदलती वो है पीड़ा- रेप सर्वाइवर की और उनसे जुड़े लोगों की. भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में बच्चियां हवस की शिकार बनाई जा रही हैं. इन्हीं बच्चियों में से एक की कहानी बेहद भावुक कर देने वाली है.

मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया के एक स्कूल में पढ़ने वाली 15 साल की बच्ची कैसिडी का दो साल पहले स्कूल के ही छात्रों ने गेंगरेप किया. वो उस दर्द को झेलती रही और आखिरकार दिसंबर 2005 में उसने आत्महत्या कर ली. उसकी मौत के बाद उसके लैपटॉप से एक पत्र मिला जो कैसिडी ने स्कूल की बाकी लड़कियों के लिए लिखा था.

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इस पत्र को लिखने का मकसद बाकी लड़कियों को आगाह करना था, जो उस स्कूल में अब भी पढ़ रही थीं. इस पत्र में कैसिडी ने लिखा कि किस तरह उसका शोषण किया गया था और स्कूल के स्टाफ ने उसकी कोई मदद नहीं की.

जब मां को वो पत्र मिला तो कैसिडी की मां लिंडा ने फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर की और कहा कि-

“Bullying killed my child”. मुझे मेरी बेटी को 22 महीने तड़पता हुआ देखना पड़ा. वो डरती थी कि तुम उसे ढूंढ लोगे, और वापस उसके साथ वो सब करोगे, तुम में से कुछ उसे लगातार परेशान करते रहे, फोन पर और सोशल मीडिया पर डराते रहे. उसे उस घटना को याद करके डरती थी, उसे बुरे सपने आते थे, पैनिक अटैक्स आते थे, वो मानसिक रूप से टूट चुकी थी. मैं बहुत बुरी, गुस्सेल या बदला लेने वालों में से नहीं हूं, पर तुम बच्चों ने ये क्या कर दिया. मुझे आशा है कि तुम कभी खुद को माफ नहीं कर पाओगे और कभी कैसिडी ट्रेवन का नाम नहीं भूलोगे. जब तक तुम जिओगे तुम्हारे हाथ खून से रंगे रहेंगे.'

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मां लिंडा को इसके बाद बहुत से मैसेज आए, और उन्हेंने Bullying Killed My Child; Cassidy’s Story नाम से एक पेज बनाया.

लिंडा ने अपनी बेटी का लिखा पत्र सबके सामने रखा, जिसमें लिखा था-

स्कूल के सभी छात्रों के लिए चेतावनी

''मैं इस स्कूल की छात्रा थी और इसी स्कूल के कुछ छात्रों ने मेरा बलात्कार किया. ऐसा करके मेरा मकसद आपका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करने का नहीं है, इसे करने के बहुत से कारण हैं, जिन्हें मैं बताने वाली हूं.

मेरा मकसद लोगों को उस हादसे के बारे में आगाह करना है(छात्राओं और उनके पेरेंट्स को भी) क्योंकि अगर वो मेरे साथ ऐसा कर सकते हैं तो मेरे जैसे किसी के साथ भी कर सकते हैं. आप ये सब रोक सकते हैं. याद रखिए कि जो कुछ भी मेरे साथ हुआ वो स्कूल के ही छात्रों ने किया, इसपर भरोसा करना जरा मुशकिल है लेकिन ये सच है.

मैं ये अपने बलातकारी छात्रें से बदला लेने के लिए नहीं कर रही, जिन्होंने रेप प्लान किया, मुझे रेप के बारे में डराया धमकाया, मुझे परेशान किया. मैं ऐसा इसलिए कर रही हूं कि 1500 छात्रों में वो 7-12 छात्र भी वहां पढ़ रहे हैं, जिनके बारे में आगाह करना जरूरी है. स्कूल के किसी स्टाफ ने मेरी कोई मदद नहीं की (इस बारे में फिर कभी बताउंगी). तुम सबको उस वाकये के बार में बताना ऐर आगाह करना मेरा फर्ज है(वो नहीं जो तुमने स्कूल में सुना बल्कि वो, जो असल में हुआ था). 

मैं ये सब मेरे लिए कर रही हूं. मैं पिछले डेढ़ साल से अकेली हूं. मुझे आश्चर्य होता है कि स्कूल में मेरे बारे में न जाने क्या-क्या कहानियां बनाई जा रही हैं और कितनी कहानियां आप लोगों ने मेरे बारे में सुनी हैं,  पर आज भी वो छात्र जो मुझे जानते भी नहीं मुझे फेसबुक पर 'स्लट' बुलाते हैं. मैंने स्कूल बदल दिया, घर बदल दिया, फिर भी मुझसे संपर्क किया जा रहा है, परेशान किया जा रहा है. मैं लोगों को अफवाहें फैलाने से तो रोक नहीं सकती लेकिन ईमानदारी से कहती हूं कि कई स्टूडेंट्स इस बारे में नहीं जानते और वो अब भी वो खतरे में हैं.

मेरा नाम कैसिडी ट्रेवन है, और मेरा बलात्कार किया गया.

अगर कोई भी तुम्हारे साथ कुछ भी ऐसा करने की कोशिश करे तो यकीन करो, इसके लिए लड़ना. अगर तुम ऐसा नहीं करोगी तो तुम पूरे जीवन भर पछताओगी जैसा कि मैं कर रही हूं. तुम ये कर सकती हो.

सतर्क रहो, आगाह रहो, सुरक्षित रहो.''

अपनी जान लेने से पहले कैसिडी ने ये पत्र लिखकर तमाम लड़कियों को आगाह किया जो रेप की शिकार होने के बाद असहाय महसूस करती हैं और इतनी हताश हो जाती हैं कि जान लेने के सिवा उन्हें कोई रास्ता नजर नहीं आता. कैसिडी ने कहा तकि हिम्मत करो और खुद के लिए लड़ो, जो वो नहीं कर सकी, पर करने की सीख दे गई.

आज कैसिडी नहीं लेकिन उसकी मां लिंडा अपनी बेटी को याद करके हर पल एक मौत मरती है.

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लेखक

पारुल चंद्रा पारुल चंद्रा @parulchandraa

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं

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