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 |  4-मिनट में पढ़ें  |   14-02-2017
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कोई इंसान किस हद तक गिर सकता है? क्या इसकी कोई सीमा है? शायद नहीं. तभी तो आए दिन कोई ना कोई ऐसा कांड सामने आ जाता है जिससे इंसानियत शर्मसार हो जाए. ऐसा ही एक मामला सामने आया है अमेरिका का जहां एक 20 साल की लड़की ने एक 4 साल के बच्चे का रेप किया. इतना ही नहीं इस हरकत को लाइव स्ट्रीम भी किया गया. ये हरकत लाइव स्ट्रीमिंग एप पेरिस्कोप पर टेलिकास्ट की गई थी. उस महिला का ट्रायल हुआ और उसे सजा भी मिल गई.

abuse_650_021417022444.jpgवो महिला जिसने बच्चे का शोषण किया

कुछ दिन पहले स्विडन में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था जिसमें रेप को फेसबुक पर लाइव टेलिकास्ट किया गया था. जिस देश में रेप को लेकर कई कड़े कानून हैं वहां एक तीन युवकों ने मिलकर एक गैंगरेप का फेसबुक पर लाइव ब्रॉडकास्ट किया. पुलिस को इस मामले की खबर लाइव ब्रॉडकास्ट देखने वाली 21 साल की एक महिला ने दी. महिला के अनुसार लड़के कह रहे थे "...अब हम उसके कपड़े फाड़ेंगे और अपना काम करेंगे". ब्रॉडकास्ट खत्म होते ही लड़कों ने कहा "अब तुम्हारा रेप हो चुका है" और फिर हंसने लगे. थोड़ी देर में एक और ब्रॉडकास्ट लाइव हुआ जिसमें लड़की को फोर्स किया जा रहा था कि वो कहे कि उसके साथ कुछ नहीं हुआ. लाइव ब्रॉडकास्ट की बढ़ती लोकप्रियता के बाद अब लाइव क्राइम का चलन भी बढ़ रहा है.

ताजा मामला भले ही अमेरिका का हो, लेकिन इसे सुनकर भारत में भी कई लोग चौंकेंगे. इस घटना के दो पहलू हैं. पहला चाइल्ड एब्यूज और दूसरा मेल एब्यूज. ये दोनों ही तरह के जुर्म भारत में भी होते हैं. मसला सिर्फ ये है कि रिपोर्ट नहीं की जाती. इतनी जल्दी कोई फैसला नहीं सुनाया जाता.

सिर्फ पुरुष ही नहीं होते दोषी-

अक्सर पुरुषों को दोषी पाया जाता है. 90% मामलों में होते भी हैं, लेकिन 10% मामलों में नहीं होते. पुरुष रेप केस रजिस्टर ही नहीं किए जाते.  

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दहेज के खिलाफ बनाए गए नियम को भी पुरुषों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है. 2014 में सेक्शन 49a (दहेज मामला) में गिरफ्तार हुए लोगों में से 9% लोगों पर गलत इल्जाम लगाया गया था. सभी केस में सिर्फ 15% का ही ट्रायल हो सका.

पुरुषों का शोषण-

भले ही ये सुनने में अजीब लगे, लेकिन हमारे समाज की एक सच्चाई ये भी है. अमेरिका में 21 में से 1 पुरुष फिजिकल एब्यूज का शिकार होता है और भारत में अभी तक इसको लेकर कोई स्टडी नहीं हुई है.

नहीं है कोई कानून-

इंडियन पीनल कोड की धारा 375 जिसमें रेप और शारीरिक शोषण से जुड़े कानून में कहीं भी मेल रेप या किसी भी तरह के एब्यूज के बारे में कोई नियम नहीं है. इसके अलावा, IPC सेक्शन 354 A, 354 B, 354 C और 354 D जिनमें सेक्शुअल हैरेस्मेंट, स्टॉकिंग आदि के खिलाफ कानून बने हैं उसमें सिर्फ महिलाएं ही विक्टिम हो सकती हैं. एक कानून धारा 377 के तहत बना जरूर है, लेकिन उसमें सिर्फ पेनाइल (penile) सेक्शुअल इंटरकोर्स पर ही कोई नियम है.

बच्चों के बारे में क्या बोला जाए?

भारत में चाइल्ड एब्यूज, ट्रैफिकिंग और रेप की घटनाएं आम हैं. ये रिपोर्ट भी होती हैं, लेकिन आखिर कितने मामलों में सजा होती है? चलिए देखते हैं चाइल्ड एब्यूज से जुड़े कुछ आंकड़े-

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- 1998 में एनजीओ रिकवरी एंड हीलिंग फ्रॉम इंसेस्ट (RAHI) ने भारत में 600 मिडिल क्लास बच्चों पर स्टडी की थी और उनमें से 76% का कहना था कि वो सेक्शुअल एब्यूज का शिकार हुए थे.

- 2006 में चेन्नई में एक स्टडी की गई थी जिसमें 2211 स्कूल जाने वाले बच्चों से बात की गई थी. इसमें से 48% लड़कों ने ये बात मानी कि उनका शोषण हुआ है. 39% लड़कियों ने मानी और इनमें से 15% ऐसे थे जिनके साथ बहुत ही बड़ी कोई घटना हुई थी.

- 2007 में 125000 बच्चों का 13 राज्यों में सर्वे किया गया था. इसमें से 53% ने कहा था कि उनके साथ कुछ गलत किया गया है. 20% का कहना था कि उनके साथ बहुत बड़ी घटनाएं हुई हैं और कुल बच्चों में से 57% लड़कों ने ये माना कि उनका शोषण हुआ है.

आए दिन ऐसे केस भारत में होते रहते हैं जिनमें बच्चों के साथ कोई ना कोई घटना होती है. छोटी बच्चियों का रेप और उनकी हत्या तक कर दी जाती है. ऊपर दिए गए सर्वे के नतीजों से साफ होता है कि जितनी घटनाएं लड़कियों के साथ होती हैं उतनी ही लड़कों के साथ भी होती हैं. उम्मीद है कि इस मामले में कोई खास कानून बनेगा जो दोषियों को सजा देगा.

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