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 |  3-मिनट में पढ़ें  |   10-01-2017
पारुल चंद्रा
पारुल चंद्रा
  @parulchandraa

जिस जगह की महिलाएं कुछ भी करने से पहले पुरुषों की इजाज़त लेती हों, वो अगर नाचें- गाएं, ड्राइविंग, स्कैटिंग और बास्केटबॉल खेलने लग जाएं तो वहां के पुरुषों के तो होश उड़ना तय हैं.

पिछले कुछ दिनों से एक वीडियो ने कुछ लोगों की नींदें हराम कीं, तो किसी किसी को सुंदर सपने भी दिखाए. सऊदी अरब की महिलाओं के लिए खुल कर जीवन जीना शायद एक खूबसूरत ख्वाब ही है और उन्हें एक आजाद जिंदगी जीते देखना वहां के मर्दों के लिए किसी बुरे ख्वाब जैसा. ये बुरा ख्वाब असल में एक वीडियो है जिसे सऊदी अरब की ही एक प्रोडक्शन कंपनी 8ies ने बनाया है.

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 पुरुषों से बिना पूछे महिलाओं को कोई काम करने की इजाज़त नहीं है

वीडियो में बुर्कानशीं महिलाओं को नाचते- गाते, ड्राइविंग-स्कैटिंग करते और बास्केटबॉल खेलते दिखाया गया है. ये वो नजारे हैं, जिन्हें शायद ही किसी ने असल जिंदगी में देखा हो. क्योंकि अरब का कानून महिलाओं के लिए बेहद सख्त है. वहां महिलाएं क्या करें और क्या न करें इसका फैसला उनके पिता, पति या दूसरे पुरुष सदस्य ही लेते हैं.

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एक लंबी फेहरिस्त है जो महिलाओं को उनकी असल जगह दिखाती है, और जिसका महिला अधिकारों से कोई लेना देना नहीं है. ये है पाबंदियों की फेहरिस्त जिसमें मना है- महिलाओं का ड्राइविंग करना, मेकअप करना, ऐसे कपड़े पहनना जिसमें शरीर दिखाई दे, पुरुषों से बात करना, स्विमिंग करना, खेल कूद में भाग लेना, खरीदारी के दौरान कपड़े ट्राइ करना, जिमिंग करना, बिना इजाज़त के घूमना, वगैरह-वगैरह.

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 महिलाओं के ड्राइविंग करने पर पाबंदी

वीडियो की शुरुआत ही साउदी अरब के समाजिक तानेबाने पर एक करारा प्रहार करती है, जिसमें दिखाया गया है कि कुछ महिलाएं कार में पीछे बैठी हैं और उस कार को एक बच्चा चला रहा है. कानूनन महिलाएं ड्राइविंग नहीं कर सकतीं और किसी पुरुष सदस्य को हमेशा साथ होना चाहिए, भले ही वो बच्चा क्यों न हो. गाने के बोल आप समझ नहीं पाएंगे, लेकिन वो गा रही हैं 'अब खुदा ही हमें मर्दों से छुटकारा दिलाए'.

देखिए वीडियो-

2013 में भी अरब के एक कॉमेडियन ने सिंगर बॉब मार्ले के गीत 'No women, No cry' को दोबारा लिखा और वीडियो के जरिए अरब के कानून पर तंज़ किया था. इस वीडियो में महिलाओं के ड्राइविंग करने पर लगी रोक पर करारा प्रहार किया गया है.

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फिलहाल इस वायरल वीडियो में वो सबकुछ है जिसे महिला अधिकारों से जोड़ा जा सकता है, जो असल में है ही नहीं, जिसे इस वीडियो के जरिए मांगने की केशिश की जा रही है. पुरुष सत्ता को अंगूठा दिखाता ये वीडियो खासा चर्चित हो रहा है. अब इसे पितृसत्ता के खिलाफ फ्रस्टेरेशन कहें या उनपर प्रहार, पर जो भी है बहुत खूबसूरत है. ये वो नजारा है जिसे शायद कल के सऊदी अरब की झलक दिखती है. महिलाएं अपने हक के लिए आवाजें उठा रही हैं, खुद के लिए लड़ाई लड़ रही हैं और सबसे अच्छी बात कि उनका साथ कुछ समझदार पुरुष भी दे रहे हैं. अब भले ही कुछ कट्टरपंथी पुरुष इसपर लानतें भेजें, लेकिन उम्मीद है कि यहां का समय भी जरूर बदलेगा. पर इस तरह के वीडियो यहां भी आएं, तो बात बने.

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लेखक

पारुल चंद्रा पारुल चंद्रा @parulchandraa

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं

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