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 |  3-मिनट में पढ़ें  |   10-01-2017
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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बीते दिनों से फेसबुक पर एक वीडियो जंगल की आग की तरह फैल चुका है. टॉम, डिक एंड हैरी ने उसे शेयर करके 'अपनी मूल जिम्मेदारी' का निर्वाह कर दिया है. वीडियो एक फौजी का है. मैं फौजी को नहीं जानता, मगर उसकी यूनिफार्म, उसकी मायूसी, उसकी बेबसी और बंदूक को जानता हूं.

हां वो फौजी ही है, सवा सौ करोड़ देशवासियों का फौजी. वही फौजी जिसे अखबारों और फाइलों में देखकर देशवासी, नौकरशाह, नेता सभी भावुक हो जाते हैं. वही फौजी जिनके साथ हमारे प्रधान सेवक सेल्फी लेते हुए उसके हितों की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं. वही फौजी जो रूटीन लाइफ में चीन, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश की सेना से लड़ते हुए अपने फ्री टाइम में लिट्टे, उल्फ़ा, बोडो और आतंकवादियों से भिड़ता है, मरता है जिसके शव को तिरंगा मिलता है और अंत में वो फौजी इतिहास बन जाता है.

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बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव ने फेसबुक अकाउंट से कई वीडियो पोस्ट किए

हांड कपा देने वाली कड़ाके की ठंड में एक फौजी को नाश्ते में मिला जला हुआ पराठा और चाय, लंच या डिनर में, हल्दी नमक मिला और पूरी बटालियन में दाल के नाम से मशहूर पानी ये बात चीख-चीख के कह रहा है कि हमारे तंत्र में कैंसर है, और हमारी राजशाही को कोढ़ हो चुका है.

आप तेज बहादुर यादव को शराबी, कबाबी, बदचलन, अड़ियल तो कह सकते हैं, मगर इस बात को नकार नहीं सकते कि भ्रष्टाचार हमारे तंत्र को दीमक की तरह खोखला कर चुका है. याद रहे यही बात तेज बहादुर ने वीडियो में भी कही है और उसे अब जान जाने का भी डर बना हुआ है.

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आगे बढ़ने से पहले मुझे अपने पत्रकारिता के दिन याद आते हैं जब मैंने लखनऊ स्थित सचिवालय कैंटीन में 20 रूपये की नेताओं को मिलने वाली स्पेशल थाली देखी थी. वो थाली जिसमें 3 तरह की सब्जियां, एक दाल, मिठाई 4 चपाती, अचार, सलाद, पापड़ और रायता होता था. वो थाली जो महंगे होटलों में 200 रूपये के आस पास मिलती है. मैं खुद ऐसी कई ऐसी थालियां उड़ा चुका हूं. मैंने एनेक्सी की 2 रुपए वाली गिंजर टी और 75 पैसे में मिलने वाली मठरी भी खाई है और 1 रूपये में मिलने वाले मोतीचूर के लड्डू अपने ड्राइवर तक को खिलाए हैं. गौरतलब है कि ये सब्सिडी तंत्र हमारे नेताओं को देता है और आगे भी देता ही रहेगा.

बात लम्बी हो गयी है अंत में सवाल ये उठता है कि मोदी जी के अलावा देश के नेता ये स्पेशल थाली छोड़ वो जला पराठा खा सकते हैं, पानी रूपी वर्चुअल प्रोटीन की दाल पी सकते हैं तो शायद जवाब न हो.

बहरहाल मैं आज फिल्म देखने जा रहा हूं. मैं वहां कुर्ता पहन के जाऊंगा. मुझे वहां बजने वाले राष्ट्रगान पर खड़ा होना है. कुर्ता पहन के राष्ट्रगान पर खड़े होने का अपना एक अलग सुख है जिसकी कल्पना शब्दों में नहीं की जा सकती. बाकी तेज बहादुर यादव शायद देशद्रोही और गद्दार है. वो जबरदस्ती हमारे तंत्र पर, हमारी व्यवस्था पर और हमारे सैनिकों पर लांछन लगा रहा है. निसंदेह ही हमें ऐसे लोगों को इग्नोर करना चाहिए और तंत्र के उम्दा प्रदर्शन पर वाह वाह करना चाहिए.

लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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