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Updated: 22 फरवरी, 2017 07:45 PM
अरविंद मिश्रा
अरविंद मिश्रा
  @arvind.mishra.505523
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मुंबई में बीएमसी यानी भारत के सबसे अमीर नगर निगम, बृहन्मुंबई महानगरपालिका के लिए मंगलवार को वोट डल गए. इसके नतीजे 21 फरवरी को आ भी जायेंगे. और इसके बाद यह तय हो जाएगा कि आने वाले 5 साल तक मुंबई पर कौन राज करेगा. देश की सबसे अमीर मानी जाने वाली बीएमसी के इस चुनाव में भाजपा और शिवसेना दोनों की साख दांव पर लगी है क्योंकि विधानसभा चुनाव के बराबर माने जाने वाले इस चुनाव में भाजपा और शिवसेना ने 20 सालों का साथ छोड़कर अलग चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था.

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आजतक का एग्जिट पोल-

अगर हम आजतक के एग्जिट पोल की बात करें तो यहां किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलता हुआ नहीं दिख रहा है. कभी एकसाथ रहीं शिवसेना और भाजपा इस पोल में एक-दूसरे को कड़ी टक्कर देते नज़र आ रहे हैं.

आजतक के एग्जिट पोल में बीजेपी को 80-88 सीटें मिलने का अनुमान है वहीं 86-92 सीटें शिवसेना के खाते में जाते दिखाई दे रहा है. इस एग्जिट पोल के अनुसार 30 से 34 सीटें कांग्रेस को मिल सकती है. एग्जिट पोल में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को 7-5 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं एनसीपी को 3-6 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है.

बीजेपी-शिवसेना गठबंधन टूटने के बाद पहला चुनाव

पिछले 20 सालों से बीएमसी पर शिवसेना और बीजेपी गठबंधन का कब्ज़ा रहा है. वर्ष 2012 में भी दोनों पार्टियां मिलकर चुनाव लड़ते हुए बीएमसी पर कब्ज़ा जमाया था. लेकिन इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं. बीजेपी और शिवसेना अलग-अलग चुनाव लड़े हैं. इस बार दोनों पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ जमकर आरोप प्रत्यारोप भी लगाए.

पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भी दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था, लेकिन बाद में नरेंद्र मोदी और उद्धव ठाकरे के बीच मुलाकात के बाद दोनों ने साथ मिलकर सरकार बनायी थी. पर जब से सरकार बनी है तब से बीजेपी और शिवसेना तमाम मुद्दों पर आमने-सामने हैं.

पिछले महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव में भी दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़े थे और इसमें बीजेपी शानदार प्रदर्शन करते हुए सरकार बनाई थी. दरअसल बीजेपी 2014 में हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मिली कामयाबी से काफी उत्साहित थी और उसे ऐसा विश्वास था कि बीएमसी में भी उसकी हिस्सेदारी बढ़ेगी. इससे पहले बीजेपी हमेशा जूनियर पार्टनर रहती थी लेकिन इस बार बराबरी की हिस्सेदार बनना चाहती थी जो कि शिव सेना को कबूल नहीं था और इस प्रकार दोनों में सहमति नहीं बन पायी. यही वजह थी कि दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव में उतरीं. शिवसेना के लिए चुनौती अपनी मराठी मानुष हितैषी की छवि को बरकरार रखने की है.

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बीएमसी क्यों महत्वपूर्ण होता है

मुंबई का पूरा प्रशासन बीएमसी के हाथों में होती है और महानगर के विकास से लेकर इसके रख-रखाव, साफ-सफाई, सौंदर्यीकरण और प्रशासनिक काम काज तक का ज़िम्मा भी उसी के पास होता है. सबसे ज़्यादा पैसे बजट में इसे ही मिलते हैं. इसका सालाना बजट 37,000 करोड़ रूपये से अधिक होता है. यह भारत के 16 राज्यों के वार्षिक बजट से भी ज़्यादा है. तो जाहिर है सियासी पार्टियों के लिए इतने बड़े बजट और इतने सारे अधिकारों वाली नगरपालिका पर कब्ज़े की जंग बेहद दिलचस्प भी होती रही है.

इस बार चुनाव में बीजेपी तथा शिवसेना दोनों का प्रतिष्ठा दांव पर लगा है और जिसका फैसला 23 फरवरी को आएगा. इस बार बीएमसी पर किसका राज होगा ये तो उसी दिन पता चल पायेगा लेकिन इस बीच सभी पार्टियों का दावा है की वो ही चुनाव जीत रहे हैं.

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लेखक

अरविंद मिश्रा अरविंद मिश्रा @arvind.mishra.505523

लेखक आज तक में सीनियर प्रोड्यूसर हैं.

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