सियासत

 |  3-मिनट में पढ़ें  |   12-08-2017
अरविंद मिश्रा
अरविंद मिश्रा
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के क्षेत्र गोरखपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, में अब तक 63 मरीजों की मौत हो चुकी है. यहां कथित तौर पर ऑक्सीजन की कमी से इतने सारे मासूम जिंदगियां मौत के मुंह में समा गए. बताया जा रहा है कि 69 लाख रुपये का भुगतान न होने की वजह से ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कम्पनी ने ऑक्सीजन की सप्लाई गुरुवार की रात से ठप कर दी थी.

इससे तीन दिन पहले ही मुख्यमंत्री योगी इस अस्पताल का दौरा भी किये थे लेकिन ऑक्सीजन की कमी के बारे में इन्हे नहीं बताया गया. सरकार की तरफ से जारी बयान के अनुसार बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण नहीं हुई है. जिलाधिकारी राजीव रौतेला ने मेडिकल कालेज के निरीक्षण के दौरान बताया कि बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में आक्सीजन सिलेंडर की कमी नहीं है.

गोरखपुर, मौत, ऑक्सीजन   गोरखपुर हादसा चींख चींख के सवाल कर रहा है कि इन मौतों का जिम्मेदार कौन है

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इतने बड़े हादसे के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है? आखिर किस पर विश्वास किया जाए? एक बार अगर बकाये वाली बात को मान भी लिया जाए, तो क्यों नहीं इस बकाये की गम्भीरता को समझा गया. आखिर क्या मजबूरी थी कि भुगतान नहीं किया गया? किस स्तर पर भुगतान की फाइल रुकी हुई थी. और इसके पीछे कारण क्या था? क्या वह कारण मासूमों की जिन्दगी से ज्यादा मूल्यवान था? क्या ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के लिए 69 लाख रुपए इतनी बड़ी रकम थी कि उसने सप्लाई बंद करने जैसा फैसला ले लिया? या फिर इसके लिए मुनाफे पर आधारित यह व्यवस्था जिम्मेदार है?

मीडिया रिपोर्टों में यह भी सामने आ रहा है कि ऑक्सीजन की आपूर्ति से निपटने के लिए विभाग ने अधिकारियों को 3 और 10 अगस्त को कमी के बारे में सूचित किया था. इसी के बाबत दो चिठियां भी प्रकाशित की गई हैं जिसमें साफ-साफ ऑक्सीजन की कमी की बात लिखी हुई है.

इसमें ज्यादातर बच्चे इंसेफेलाइटिस (जापानी बुखार) से पीड़ित थे. यह एक प्रकार का दिमागी बुखार होता है जो वाइरल संक्रमण की वजह से होता है. इसका प्रकोप साल के तीन महीने अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में अपने जोरों पर होता है. इस बीमारी से ग्रसित बच्चों को ऑक्सीजन की सख्त जरूरत होती है.

यह सिर्फ गोरखपुर या इस एक अस्पताल की बात नहीं है. पूरे ही देश में स्वास्थ्य सेवाओं का यही हाल है. यह तो सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वो जनता को हर तरह की स्वास्थ्य सेवा दे. लेकिन इसमें हमेशा सरकार की विफलता सामने आती है. मसलन नवंबर 2014 में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सरकारी नसबंदी शिविर में 137 महिलाओं का ऑपरेशन हुआ था जिसमे 13 महिलाओं सहित 18 लोगों की मौत हुई थी. साल 2013 में कोलकाता के बी सी रॉय बच्चों के अस्पताल में लगभग 50 बच्चों की मौत की खबर सामने आई थी. इन सबों के बावजूद हमने कुछ सबक नहीं लिया.

हालांकि यूपी सरकार इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. जाहिर है जब तक जाँच होगी तब तक हमेशा की तरह इस मामले को भी फाइलों के नीचे दबाया जा चुका होगा और फिर ऐसा मौका आएगा और फिर से हाय तौबा मचेगी. देश के लगभग हर हिस्से से ऐसी ही घटनाएं गाहे-बगाहे आती रहती हैं और इन पर हम सिर्फ शोक जताते हैं. और ज़ाहिर है इसके ठोस उपाय की जगह सरकार और विपक्ष एक दूसरे को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराएंगे.  

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हैरानी की बात है कि अस्पताल जाकर भी योगी आदित्यनाथ को ऑक्सीजन की स्थिति मालूम न हुई

काश! औरत की कौख़ से गाय पैदा होती साहेब!!

लेखक

अरविंद मिश्रा अरविंद मिश्रा @arvind.mishra.505523

लेखक आज तक में सीनियर प्रोड्यूसर हैं.

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